जनाकांक्षाओं कुचलने सत्ता, संगठनों का षडय़ंत्र, लोकतंत्र को घातक

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। गत वर्षो से देश ही नहीं समूचे म.प्र. में दमन के खिलाफ होने वाले आंदोलनों को दमनात्मक रुप से कुचलने का खेल यूं तो सत्ता, संगठनों का समय-समय पर चलता रहा है और वह कामयाब भी रहे है। मगर चुनावों के नजदीक आते ही जिस तरह से सत्ता, संगठन से जुड़े सौपानों में जनाकांक्षाओं को कुचलने की आक्रमक प्रवृति पनप रही है वह बड़ी ही खतरनाक है। जैसा कि हाालिया घटना ग्वालियर, सतना, शहडोल, इंदौर में शान्तिपूर्ण आंदोलन कर रहे आंदोलनकारियों पर पुलिसिया लाठी चार्ज के बरबर स्वरुप में सामने आया है। अगर आंदोलनकारियों की मानी जाये तो जिस तरह से पुलिस की आड़ में सत्ताधारी दल के लोग भी जनाकांक्षाओं से जुड़े आंदोलनों को कुचलने में सक्रिय दिख रहे है। वह विचारणीय है। विचारणीय तो यह भी है कि जहां-जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री या केन्द्रीय मंत्रियों के समक्ष प्रदर्शन हो रहे है वहां पुलिस और पार्टी के लोगों पर मारपीट व आंदोलन को उग्र होने के लिए इस तरह की घटनाओं से उकसाने की कोशिश हो रही है। जैसा कि पूर्व में भी हुए आंदोलनों को पुलिस की दम पर कुचलने का आरोप अन्य राजनैतिक दल, कर्मचारी, संगठन व पंचायतीराज संगठन से जुड़े लोग समय-समय पर लगाते रहे है।

मगर हाल ही में जिस तरह का आरोप सपाक्स संगठन के लोगों ने सरकार, संगठन व पुलिस पर दमन के लगाए है और आगाह किया है कि अगर शान्तिपूर्ण आंदोलन को इस तरह लाठी पुलिस और पार्टी के गुंडों के सहारे कुचलने की कोशिश होती रही और आंदोलन हिंसक हुआ तो इसकी जबावदेही शासन और सरकार की होगी। ज्ञात हो पूर्व में भी अध्यापकों के आंदोलनों और त्रिस्तरीय पंचायतीराज संगठन के आंदोलन को पुलिस की लाठियों के बल कुचल सतत सत्ता का मार्ग प्रस्त किया गया व जाति, वर्ग में बांट सत्ता के लिए षडय़ंत्र रचा गया वह किसी भी स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए सिद्ध नहीं कहा जा सकता। मगर लगता नहीं कि समाज को तोडऩे वाली आग इतनी जल्दी ठंडी होने वाली है। क्योंकि जिस तरह मानवता को दरकिनार रख वोटों की खातिर कानून लाया गया है। वह किसी भी स य समाज में स्वीकार्य योग्य नहीं कहा जा सकता। 

देखना होगा कि क्या सत्ता या सत्ता से जुड़े लोग संवाद के रास्ते इस समस्या का समाधान खोजते है या फिर संघर्ष के रास्ते न्याय पाने चल निकली, जनाकांक्षाओं को पूर्व की भांति कुचल सत्ता का मार्ग प्रस्त करते है।  
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