बेबस सिंधिया बोले, सुनते नहीं मोदी, शिवराज

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। वीरेन्द्र भुल्ले, म.प्र. शिवपुरी। गत दिनों से सपाक्स द्वारा म.प्र. भर में नये एससी-एसटी एक्ट के विरोध में चल रहे प्रदर्शन की कड़ी में आज म.प्र. के शिवपुरी जिला मुख्यालय पर भी सपाक्स समर्थकों द्वारा काली पट्टी बांध एवं काले झंडे दिखा विरोध प्रदर्शन किया गया। जिसको लेकर कॉग्रेस व सपाक्स समर्थकों के बीच हल्की-फुल्की झूमा-झटकी भी हुई और सिंधिया ने शहर में प्रवेश करते ही सीधे अपने निवास ब बई कोठी पहुंच, पहले से काली पट्टी बांध सिंधिया का इंतजार कर रहे सपाक्स के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं से भेंट की और उनके द्वारा दिए गए ज्ञापन को भी लिया। इस बीच सपाक्स कार्यकर्ताओं के सवालों का जबाव देते हुए सिंधिया ने कहा कि मोदी, शिवराज सुनते ही नहीं, मगर मैं किसी के साथ अन्याय नहीं होने दूंगा। 

देखा जाये तो क्षेत्रीय सांसद एवं म.प्र. कॉग्रेस चुनाव संचालन समिति के संयोजक सिंधिया अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार शिवपुरी पहुुंचे। वहीं सपाक्स कार्यकर्ता भी अपनी पूर्व घोषित कार्यक्रम अनुसार भेंट मुलाकात के बावजूद काले झंडे दिखाते दिखे। मगर अहम सवाल पर न तो सपाक्स अपना प्रदर्शन गरिमापूर्ण ढंग से सिद्धान्त: कर सकी और न ही सिंधिया सटीक उत्तर दे सके। कारण साफ है कि कानून किसी की भी पहल पर बना हो। मगर संसद सदस्य या सरकार कैसे अपने उत्तरदायित्व से बच सकते है। वहीं विरोध करने वाले भी बजाये विरोध करने के बजाये बेवजह की वार्तालाप करते दिखे। क्योंकि जो समस्या आज देश व समाज के सामने एससी-एसटी एक्ट को लेकर है। उसका समाधान तो अब संसद ही कर सकती है न कि कोई सांसद या मंत्री। यह समझने वाली बात है। 

बहरहाल लोकतंत्र में जन व राष्ट्र विरोधी नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है। मगर वह मुद्दा आधारित होने के साथ सिद्धान्त: व सार्थक संस्थाओं के सामने हो। तो उसकी सिद्धता भी होती है और ऐसे विरोध प्रदर्शनो को सफलता भी हासिल होती है। हालाकि सपाक्स का रास्ता फिलहाल अवश्य कठिन है। अगर उसे सार्थकता हासिल हुई, तो यह मजबूत लोकतंत्र की दिशा में नई पहल होगी। जो उत्तम साध्य और उचित साधनों पर अधिक निर्भर करेगी।   
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