50 वर्ष तक सत्ता हारी होगी.............तीरंदाज ?

व्ही.एस.भुल्ले, भैया- कान खोल के सुनले, गर हारा दल 2019 जीता तो 50 वर्ष तक हारी सरकार होगी। क्योंकि हारा आलाकमान बोल्या कि 2019 भी हम ही जीतेगें और अगले 50 वर्ष तक भी हारी सरकार होगी। तो क्या भाया यह हारे आलाकमान का अहंकार है। जो भाई लोग इसे हारे आलाकमान का अहंकार साबित करने पर तुले है। भाया कै वाक्य में ही गांव, गली, गरीब अब हारे लोकतंत्र से ढईया बाहर हो लिया। जिसे सत्ता, समृद्धि, सुख सिर्फ अब सपना बनकर रह जायेगा। अगर लोकतंत्र में वोट की ताकत निर्णायक है तो हारी संख्या, सस्ते राशन के मोहताज वालो की, तो 80 करोड़ के पार है। अल्प रक्त की शिकार माता-बहिनों की सं या भी 50 फीसदी से अधिक है और आने वाली पीढ़ी भी बड़ी तादाद में वर्तमान हालातों के चलते कुपोषित रहने वाली है, तो क्या ऐसे में भी हम गांव, गली, गरीब को सत्ता नहीं मिलने वाली।  

भैये- तने तो बावला शै, कै थारे को मालूम कोणी, अभी तो 2019 की जीत के लिए रिर्हसल भर चल रहा है। कहीं धर्म, जाति, क्षेत्र तो कहीं हाथों हाथ बटौना बांट कई दल और गिरोहों का वोट पक्का हो रहा है। 
भैया- मगर थारे वृतान्त में हारे आलाकमान का दोष कहां है जो 50 वर्षो तक सत्ता की बात पर देश भर में बबाल कट रहा है। 

भैये- बात दोष, निर्दोष, न्याय, अन्याय की नहीं, कै थारे को मालूम कोणी लोकतंत्र में अब समुद्र मंथन चल रहा है। जिसमें हीरे जवाहरात छोड़, विष, अमृत दोनो ही निकलने वाले है। किसके हाथ क्या लगेगा है, यह अलग बात है हारा देश समृद्ध, खुशहाल बने यहीं हम गांव, गली, गरीब के लिए हाला है जो हम सस्ते राशन के मोहताज लोगों को समझने वाली बात है। 

भैया- मगर हम तो राम और गाय भक्त है, सो अमृत तो हमारे ही हाथ लगने वाला है और गिरोंहों में तब्दील दलों को विष का प्याला मिलने वाला है।  
भैये- मगर गऊ माता की स्थिति को लेकर तो हारा कलेजा मुंह को आवे। जिनकी सेवा स्वयं प्रभु के द्वारा की गई और जो हारी सेवा, पूजा का प्रतीक भी है। मगर उस महान जीव वंश का सत्ता के लिए उपहास मने तो बोल्यू भाया महापाप हो रहा है। 

भैया- देखता जा आगे-आगे होता है क्या, जिन लोगों को यह अहम, अहंकार है कि वह जन-धन की बदौलत इस महान लोकतंत्र का किला फतह कर अपनी-अपनी सत्ता स्थापित कर लेगें और जो लोग सोचते है कि अगर अहम, अहंकार टूटा तो पुन: राज हम ही इन गांव, गली, गरीब पर करेगें। तो भैया ऐसे लोग मुगालते में है। क्योंकि अब इस महान भूभाग पर न्याय युद्ध शुरु हो चुका है। हैरान, परेशान, गांव, गली, गरीब जाग चुका है। क्योंकि जिस स यता में रंग के आधार पर गऊ माता का जन्म प्रलय का संकेत है तो यहां तो हारे महान भूभाग पर गऊ माता का सरेआम अपमान ही नहीं, उनके जीवन से खिलवाड़ कर, उन्हें भूखा, प्यासा, मरने छोड़ कत्लखानों में पहुंचा मांस का धंधा, खूब फल फूल रहा है, जो प्रमाणिक है। 

भैये- मने समझ लिया थारा इशारा, जिस भूभाग पर गऊ माता का अपमान होगा वह भूभाग कैसे समृद्ध, खुशहाल होगा। गिरोहबंद दल भले ही अपना-अपना अहम, अहंकार को भुना ले, मगर इस महान भूभाग का अब स्वरुप क्या होगा यह तो हजारों वर्ष से पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी त्याग-तपस्या से हमारी नस्लो को पालने वाली गऊ माता ही जाने। अगर पोषित करने वाले इस महान वंश को अगर अब भी हमारी नस्ले सत्ता अपने-अपने अहम, अहंकार और निहित स्वार्थ, सत्ता को छोड़ उसे मान-सम्मान दिला, उनका जीवन सुरक्षित, सरंक्षित नहीं कर सकी, तो सत्ताऐं तो आयेगीं, जायेगीं ही। मगर इस महान भूभाग पर मौजूद उन कुपोषितों की संख्या भी आज की स्थिति में मौजूद उन गऊ माताओं की तरह हो जायेगीं जो भोजन पानी के लिए दर-दर की ठोकरे खा आभाव ग्रस्त जीवन जीने पर मजबूर है। तब न तो वह मजबूत सत्तायें और न ही वह समाज ही समृद्ध, खुशहाल समाज की वह संस्कृति सुरक्षित रह पायेगी। 
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment