सिंधिया के नेतृत्व में संभव है, सरकार सत्ताधारी दल ही नहीं, शेष कॉग्रेस भी बनी सिंधिया का सरदर्द

वीरेन्द्र शर्मा, विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 2018 के आसन्न विधानसभा को लेकर म.प्र. में जिस तरह की चर्चाये राजनैतिक गलियारों में सरगर्म है। उन्हें देख, सुनकर कहा जा सकता है। जैसा कि राजनैतिक पण्डितों का भी मानना है कि सिंधिया के नेतृत्व मेें म.प्र. में एक सफल सरकार कॉग्रेस बना सकती है। कारण जिस तरह से सिंधिया समुचे प्रदेश में कॉग्रेस को लेकर चल रहे है और जो निशाना उन्होंने ग्वालियर-चंबल, मालवा, भोपाल, बुन्देलखण्ड सहित महाकौशल, विदर्भ, मालवा, भोपाल निमाण में अपने साथी वरिष्ठ सहयोगियों की मदद से साध रखा है और निरंतर दौरों के माध्यम से पार्टी में जान फूकने की कोशिश कर रहे है। वह किसी से छिपा नहीं ऐसा नहीं कि सिंधिया को महाकौशल, विदर्भ वघेलखण्ड, बुन्देलखण्ड निमाण क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं का व नेताओं का भरपूर सहयोग नहीं मिल रहा। बल्कि वरिष्ठ कॉग्रेसी नेताओं के दौरे, बैठकों के माध्यम से वह भी कॉग्रेस को पार घाट लगाने की जुगत में है। 

मगर जिस तरह से ग्वालियर-चंबल, मालवा, इन्दौर से लेकर झाबुआ और होसंगाबाद, भोपाल से लेकर विदिशा, सागर, रीवा से लेकर छतरपुर तक सिंधिया को जनसमर्थन आशा-आकांक्षाओं के साथ मिल रहा है। वह काबिले गौर है। जहां तक खबरों की माने तो सिंधिया को लेकर कॉग्रेस का आम कार्यकर्ता ही नहीं, आम जनता के बीच भी खासा उत्साह है। मगर सिंधिया के सामने सबसे बड़ा संकट आलाकमान की आंखों से दूर शेष कॉग्रेस आज भी सिंधिया के लिए सरदर्द साबित हो रही है। जो न तो आलाकमान के लिए शुभसंकेत है, न ही कॉग्रेस के लिए।  

मगर जिस तरह की चर्चा सिंधिया को लेकर प्रदेश भर में सरगर्म है। अगर उनका ईमानदारी से विशलेषण कर कॉग्रेस रणनीत तैयार करती है। तो कोई कारण नहीं जो सिंधिया के नेतृत्व में सरकार संभव न हो। बशर्ते म.प्र. के सभी वरिष्ठ, सहयोगी पूरी निष्ठा के साथ जिस तरह से मेहनत कर रहे है उसे जारी रखते है तथा मीडिया में सटीक पैठ बनाने में कामयाब होते है तो कॉग्रेस को सफलता संभव है। वरना चुनाव भी होगें और हार जीत भी। मगर किसकी इसका इंतजार फिलहाल करना होगा। 
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment