वातानुकूलित और समृद्ध हुई लोक, जनसेवा, कल्याण की मिसाल बना प्रदेश

व्ही.एस.भुल्ले विलेज टाइम्स समाचार सेवा। विकास सेवा कल्याण की जो इबारत प्रदेश में विगत 14 वर्षो में जो लिखी गई और उसके चलते सेवा विकास कल्याण की जो बेमिशाल तस्वीर साफ हुर्ई उसे बताने वह आंकड़े ही काफी है जो कि एक बीमारु राज्य की तस्वीर किस तरह बदली फिर वह आंकड़ें कृषि, सिंचाई, बिजली, सडक़ से संबंधित हों या फिर सेवा कल्याण से जुड़े सरोकारों से। अगर प्रचार-प्रसार में प्रचलित आंकड़ों की माने तो सभी क्षेत्रों में बेमिशाल कार्य हुआ। जिन्हें हम शासन के विभागों द्वारा जारी विज्ञापनों में भी देख समझ सकते है। अरबों रुपया विज्ञापनों अन्य प्रचार, संवाद, पंचायत, सम्मेलनों पर खर्च, इस बात के गवाह है कि प्रदेश ने विकास, सेवा कल्याण ही नहीं, लोग सेवा कल्याण को देख, समझ, उसे मेहसूस भी कर सके। जिसे सेवा कल्याण विकास की ऐतिहासिक मिशाल ही नहीं, उसे अनुकरणीय भी कहा जायेगा।

जिस बीमारु राज्य में कभी प्रदेश का मुखिया जब तब हेलिकॉप्टर, जहाज से व सरकार के  मातहत व हमारे माई-बाप के नाम से प्रचलित श्रीमान, टूटी-फूटी जीवों या फिर जिला स्तर पर एक दो ए बेस्डरकार के सहारे गांव, गली की खांक छान लोगों से जीवंत संपर्क बना योजनाओं के क्रियान्वयन को सार्थक सफल बनाने दिन रात एक कर देते थे तथा भीषण गर्मी के दौरान बगैर पंखा या फिर पंंखें, कूलरों में बैठ सेवा कल्याण विकास की नीतियां बना उन योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करते थे व रात्री विश्राम शासकीय आवासों या गांवों व विश्राम गृहों में करते थे। आज वहीं माई-बाप मुखिया वातानुकूलित आवास, कार्यालयों में बैठ व जहाज, हेलिकॉप्टर तथा लग्झरी वाहनों में फर्राटे भर लोक व जनसेवा व विकास कर रहे है। जनता का आर्थिक क्षैणिक, सामाजिक, राजनैतिक, स्वास्थ इत्यादि का विकास हुआ हो या न हुआ हो। मगर मुखिया मातहतों माई-बापों का ऐसा विकास कि समुचे प्रदेश के गांव, गली, ट्रेक्टर, लग्झरी वाहन व दो पहिया वाहनों से पटे पड़े है। शायद ही प्रदेश में गरीबी की तुलना में कोई भी ओहदेदार ऐसा बचा हो। जिसके पास भलें ही चार पहियां वाहन रखने की सामर्थ पात्रता न हो। मगर उनके कार्यालयों या मुख्यालयो पर लग्झरी वाहनों की भीड़ खड़ी मिल जायेगी। यह विकास की ही तो मिशाल है कि सरकार, शासन के ओहदेदार समृद्ध, खुशहाल है। वहीं जनता जनार्दन भी एक रुपये किलो गेंहू, चावल, तीर्थदर्शन कर मालामाल है। अगर यो कहे कि हमारे महान प्रदेश में समृद्धि सेवा की व्यार और विकास का सैलाब आ गया है तो कोई अति संयोक्ति न होगी। 
जय स्वराज

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