गुना संसदीय क्षेत्र में, ढहने के कगार पर पहुंचा कॉग्रेस का किला, कई विधानसभा क्षेत्रों में कॉग्रेस की हालत खराब

दि.एम.पी.मिरर समाचार सेवा। अगर समुचे गुना संसदीय क्षेत्र की 8 तथा ग्वालियर संसदीय क्षेत्र की 8 विधानसभा क्षेत्रों रायसुमारी पूर्ण चर्चाओं की माने तो कॉग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ ग्वालियर तो पूर्व मेंं ही ढह चुका है। मगर वर्तमान हालातों के मद्देनजर गुना जैसा कॉग्रेस को मजबूत गढ़ भी ढहने के कगार पर जा पहुंचा है। जिस तरह से कोलारस, मुंगावली विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने स्वयं के मुख्य चुनाव में 30 हजार के लगभग हार के आंकड़ों को कवर करते हुए लगभग 7 हजार कोलारस व 5 हजार के आसपास हार का आंकड़ा समेट लिया है और जिस तरह का माहौल वर्तमान हालातों के मद्देनजर कोलारस, मुंगावली ही नहीं पिछोर, चंदेरी, बमौरी में बना हुआ है जो कॉग्रेस के कब्जे वाले विधानसभा क्षेत्र है और जिस तरह से भाजपा ने गुना सहित अशोकनगर, शिवपुरी में शासकीय योजनाओं एवं जीवंत संपर्क के माध्यम से स्वयं की स्थिति में सुधार किया है। उसके चलते कॉग्रेस का यह मजबूत गढ़ भी अब लगभग ढहने के कगार पर जा पहुंचा है।

कारण कि कॉग्रेस के पास न तो कोई स्पष्ट रणनीति है न ही चमकदार छवि वाले मेहनतकश नेता सिर्फ स्थानीय सांसद और म.प्र. चुनाव संचालन समिति के अलावा। देखा जाए तो आज जिस अंदाज में विगत कुछ महीनों से कॉग्रेस की कार्यप्रणाली इन क्षेत्रों में चल रही है वह बड़ी ही घातक है।न तो वह सत्ताधारी दल के विरुद्ध अहम मुद्दों पर आक्रमक है, न ही आम जनता के बीच सकारात्मक। दुर्भाग्य कि आम विधानसभा चुनावों के नजदीक होने के बावजूद भी वह अपनी सकारात्मक प्रभावी उपस्थिति दर्ज करवाने अक्षम, असफल साबित हो रही है। यहीं कारण है कि बढ़ती भाजपा की सक्रियता ने गुना संसदीय क्षेत्र ही नहीं ग्वालियर संसदीय क्षेत्र की सबसे अहम करैरा, डबरा और पोहरी विधानसभा क्षेत्रों को खतरे में डाल दिया है। जो कि हमेशा से ग्वालियर संसदीय क्षेत्र में हार-जीत का फैसला करते रहे है। 

यूं तो गुना संसदीय क्षेत्र में 8 विधानसभा क्षेत्र आते है। जिसमें गुना, बमौरी, अशोकनगर, मुंगावली, चंदेरी, पिछोर, कोलारस, शिवपुरी आते है। आठों विधानसभा क्षेत्रों में भले ही चंदेरी, मुंगावली, बमौरी, पिछोर, कोलारस जैसी सीटों पर कॉग्रेस का कब्जा हो। मगर अशोकनगर, शिवपुरी, गुना विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का फिलहाल कब्जा है। 

ये अलग बात है कि कॉग्रेस ने कोलारस, मुंगावली का उपचुनाव बहुत कम अंतर से भले ही जीत लिया हो। मगर जीत का अंतर बताता है कि मुंगावली, कोलारस में अभी भी सबकुछ ठीक नहीं, न ही चंदेरी, बमौरी, पिछोर क्षेत्र में सबकुछ ठीक चल रहा है। जिस आक्रमकता के साथ भाजपा अपनी पैठ इन विधानसभा क्षेत्रों में बना रही है वह स्पष्ट तौर पर कॉग्रेस के लिए खतरे की घंटी है।

देखा जाए तो जिस तरह से भाजपा अपने आलाकमान की मंशा अनुरुप गुना संसदीय क्षेत्र में अपनी पैठ बढ़ा रही है और जिस सक्रियता के साथ वह लोगों के बीच हितग्राही मूलक योजना के माध्यम से जुड़ रही है। अगर चर्चाओं की माने तो अकेला गुना संसदीय क्षेत्र ही नहीं, बल्कि ग्वालियर संसदीय क्षेत्र की वह सबसे अहम पिछोर, करैरा, पोहरी विधानसभा क्षेत्रों में भी अपनी बढ़त जनाधार के माध्यम से बनाने में जुटी है। 

मगर कॉग्रेस के आगे सबसे बड़ा संकट यह है कि वह आज भी अपने सत्ता मद की खुमारी और अहंकार से बाहर निकल न तो कुछ देखना चाहती है, न ही सुनना चाहती है और न ही नये धारदार, जनाधार वाले लोगों को जोडक़र अपना जनाधार बढ़ाना चाहती है। जबकि भाजपा दबे पांव जहां केन्द्र व राज्य सरकार की नीतियों का लाभ आम मतदाता को दिला अपनी पैठ मजबूत करने में जुटी है। तो वहीं कॉग्रेस के स्थानीय रणनीतकार अपने शीर्ष नेताओं को भ्रम में रख उन्हें सच से मुखातिब कराने से परहेज कर रहे है। जो कॉग्रेस के लिए 2018 ही नहीं 2019 के लोकसभा चुनावों में भी घातक हो सकता है। देखना होगा कि क्षेत्रीय सांसद और कॉग्रेस के रणनीतिकार किस रुप में इसे लेते है। जबकि आने वाले चुनावों में एक-एक सीट की हार-जीत में बड़ी अहम भूमिका होगी। 
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