गोलबंद सियासी गिरोह से घिरी सियासत स्वच्छ, स्वस्थ राजनीति, विकास में निष्ठा पूर्ण सेवा भाव अहम

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। यह बात आज की नहीं, बल्कि लगभग दो दशक पुरानी है। जब शिवपुरी की राजनीति में अपने-अपने सियासी लाभ भुनाने गोलबंद गिरोह या गुटीय राजनीति का प्रादुर्भाव हुआ। देखते-देखते ही गोलबंद राजनीति का बट-वृक्ष इतना फला-फूला कि आसपास की स्वच्छंद राजनीति में पनपने वाले पौधे स्वत: ही मुरझाने लगे और भोले-भाले नागरिकों, राजनेताओं को यह ऐहसास ही नहीं हो सका कि आज की राजनीति अब सेवा भाव की नहीं, बल्कि षडय़ंत्रपूर्ण सियासत और रातो-रात धनाड्य बनने का माध्यम बन चुकी है। साथ ही गोलबंद हो, अपनी-अपनी सियासत चमकाने व अपना-अपना घर भरने में तब्दील हो चुकी है। परिणाम कि धीरे-धीरे शिवपुरी जिले से स्वस्थ, स्वच्छ राजनैतिक पर पराओं का ही सत्यानाश हो गया। 

हद तो तब हो गई जब शीर्ष लेवल के सडक़ या सत्तासीन नेता अपनी खुन्नस निकालने गिरोहों में बटी सियासत को सह दे, अपने-अपने सियासी एजेंडों को पूर्ण करने में जुट गये। ऐसे में न तो जनभावनाओं व स्वयं के वैचारिक आधार का कोई महत्व रहा, बल्कि स्वार्थ सिद्धि के मंच पर घोषित-अघोषित रुप में सब मशगूल हो लिया। परिणाम कि बिलबिलाती जनता अब षडय़ंकारी गिरोह की बदौलत इस हद तक जा पहुंची कि वह सही गलत में फर्क किए बगैर अपनी आक्रोशित प्रतिक्रियायें देने में अब संकोच नहीं कर रही। विकास की बिना पर विगत 20 वर्षो से चुन-चुन कर, महाभ्रष्ट, अर्कमण्य, अलाल, अधिकारियों की तैनाती इस बात के संकेत है कि यह जिला सियासी षडय़ंत्रों के किन मकडज़ालों से जूझने मजबूर है। 

देखा जाए तो चुने हुए जनप्रतिनिधियों का कार्य सदन में बैठकर लोक जन कल्याणकारी नीतियां बनाना और योजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराना होता है। मगर क्रियान्वयन और जनकल्याणकारी योजनाओं विकास के कार्यो को उनके अंजाम तक पहुंचाने की जवाबदेही प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारियों की होती है। मगर दुर्भाग्य कि विगत 20 वर्षो में जिस तरह से माहती योजनाओं का एवं विकास का जघन्य भ्रष्टाचार के चलते जो सत्यानाश हुआ है उसने समस्त सीमाऐं ही नहीं लांगी, बल्कि इतिहास रच डाले। इन्हीं भ्रष्ट लोगों से पोषित सियासी गोलबंद गिरोह भी पोषित हो, बिलबिलाती जनता के दु:ख, दर्द बांटने के बजाए अपना-अपना भविष्य और अपना-अपना घर भरने की संस्कृति को जन्म देते रहे। 

अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो गोलबंद सियासी षडय़ंकारियों का मंसूबा तो यहां तक है कि कैसे भी हो, एक भी सेवा कल्याण से जुड़ी राजनीति में आस्था रखने वाला कम से कम शिवपुरी की राजनीति में शेष न रहे। जिससे वह ाुलेआम जनधन से अपनी सियासत चमका, अपने मंसूबे पूरे कर सके। 
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