कॉग्रेस: शिवपुरी में सफाये का खतरा बरकरार, बड़े बदलाव की दरकार

धर्मेन्द्र गुर्जर, दि.एम.पी.मिरर समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। शिवपुरी जिले की 5 विधानसभा सीटों पर जिस तरह के हालात 2018 को लेकर बन रहे है वह कॉग्रेस के लिए मुश्किल में डालने वाले हो सकते है। क्योंकि जिस तरह से सत्ताधारी दल भाजपा सरकार की हितग्राही मूलक योजनाओं के माध्यम से लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे है। वहीं कॉग्रेसी आपसी सरफुटब्बल कर व्यानबाजी में मशगूल है। जिसका भरपूर लाभ सत्ताधारी दल, प्रधानमंत्री आवास, शौचालय, उज्जवला, मुद्राकोष, मु यमंत्री, प्रधानमंत्री स्वरोजगार संबल, आयुष्मान, कन्यादान जैसी लोग लुभावन लाभकारी योजनाओं के माध्यम से उठाने में लगा है। 

जहां तक कोलारस विधानसभा क्षेत्र का सवाल है तो उपचुनाव में ही कॉग्रेस अपनी जीत का आंकड़ा लगभग 28 हजार से घटाकर 8 हजार कर चुकी है और आये दिन विरोधाभासी खबरें भी कॉग्रेस के लिए शुभसंकेत नहीं। वहीं पिछोर विधानसभा में भले ही कॉगे्रस का 25 वर्ष से एक छत्र राज हो। मगर पिछले विधानसभा चुनाव में जीत-हार के लगभग 8 हजार के अंतर में साबित कर दिया कि हालात अब पहले जैसे नहीं। 

रहा सवाल करैरा की सुरक्षित सीट का तो यूूं तो इस विधानसभा सीट पर ज्यादातर दूसरा मौका करैरा की जनता ने किसी को नहीं दिया। वहीं करैरा विधायक के आये दिन आरोप-प्रत्यारोप में उलझे रहने के चक्कर में कॉग्रेस की हालात दिन व दिन खराब होती जा रही है। जहां तक शिवपुरी का सवाल है तो यहां पर भाजपा की खासी पकड़ और राजनीति का केन्द्र होने के कारण कॉग्रेस वैसे भी अपनी मजबूत पकड़ बनाने में अक्षम, असफल साबित होती रही है। पोहरी विधानसभा में तो बैसे ही टिकट को लेकर कहीं कॉग्रेसी खुलेयाम ताल ठोकने से नहीं चूक रहे। वहीं सत्ताधारी दल का जातीय गणित और विकास उन्मुख कार्यो के साथ सत्ताधारी दल लगातार अपनी जड़े जमाये हुये है। भले ही भाजपा में हो टिकट के दावेदारों की संख्या दिन ब दिन बढ़ रही हो। मगर संगठन के कड़े अनुशासन का लाभ सत्ताधारी दल को ऐन चुनाव के वक्त मिलना लाभकारी बना रहता है। 

बहरहाल अगर कॉग्रेस ने अपनी दिशा-दशा और रणनीति के अलावा चेहरे मोहरो में बड़ा बदलाव नहीं किया और पुराने चेहरों पर ही विश्वास व्यक्त किया तो कॉग्रेस को 2018 में सुनहरे अवसर से हाथ धोना पड़ सकता है। जहां तक इन 5 विधानसभा क्षेत्रों की जनता की मनो स्थिति का सवाल है तो वह अभी भी ऐतिहासिक बदलाव के मूड में नजर आ रही है। अगर कॉग्रेस ने सही रणनीत और सही अच्छे और सच्चे चेहरों का चुनाव किया। भले ही वह गरीब मगर स्वच्छ छविदार हो। तो निश्चित ही कॉग्रेस को बड़ा लाभ हो सकता है। भले ही सत्ताधारी दल कितना ही आर्थिक रुप से मजबूत क्यों न हो। जैसी कि समुचे जिले में आम चर्चा है।
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