खुशहाल प्रदेश ही बदहाल व्यवस्था ,गाडिय़ों की आवाज से सहर जाता है दीवान

व्ही.एस.भुल्ले ,विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। यूं तो मौका था म.प्र.के ही गांव खैरोना का जहां शासकीय कार्यक्रम खत्म होने से पहले 100 फीसदी विकलांग दीवान गुर्जर अपने दादा के साथ कई लोगों की मदद से तेज चलती साईकिल पर अपने घर वापिस जा रहा था। शरीर और दिमाग से विकलांग बैचारा दीवान यह भी नहीं समझ सकता कि उसे क्या हुआ है। तेज जाती साईकिल पर जाते दीवान के दादा श्याम सिंह को रोककर पूछा कि इतनी जल्दी कहां जा रहे हो। अभी तो कार्यक्रम खत्म भी नहीं हुआ। इस पर दीवान के दादा श्याम सिंह का बेबसी भरे स्वर में जवाब था कि भैया तुम ही जा बैचारे को कछू दिवा दो। साईकिल नहीं तो पेंशन ही दिवा दो। कई बार आ चुके कार्यक्रम में, मगर अबे तक कोहू मदद नहीं भई। दीवान गुर्जर पुत्र रामेश्वर गुर्जर उम्र लगभग 15 वर्ष के दादा यह कहते-कहते आंख में आंसू भर लाये कि भैया जा मोड़ा की कोहू मदद नहीं कर तू। का करे कई बार सचिव से व अन्य लोगन से निवेदन करो। 

मगर कोई मदद नहीं करता। मगर दीवान को साईकिल पर ले जाते युवकों से जब पूछा गया कि आप लोग इस इतनी जल्दी क्यों ले जा रहे हो। इस पर उन्होंने कहा कि यह गाडिय़ों की आवाज से डर जाता है तथाा हमारे गांव का ही रहने वाला है। 

बहरहॉल अगर खुशहाल प्रदेश जहां हितग्राही सेवामुखी योजनाओं का अंबार लगा है तथा विगत वर्षो में ढेर भरे अभियान शिविर लगे। मगर ऐसे जरुरतमंद लोगों की मदद न हो सके, तो खुशहाल प्रदेश पर सवाल उठना लाजमी है और उन मूड़धन्यों की बयानबाजी जो बीमारी प्रदेश खुशहाल प्रदेश कहने का दावा करते नहीं थकते। मामला म.प्र. के शिवपुरी जिले के जनपद पंचायत शिवपुरी का है। काश दीवान को भी खुशहाल प्रदेश में, खुशहाली की अनुभूति हो सके, तो सत्ताओं की सार्थकता बन सके।  
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