10 मौंतो का एक भी जबावदेह नहीं, विपक्षी दलों की चुप्पी पर उठे सवाल

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी।  ज्ञात हो जिस तरह से शिवपुरी के पर्यटन स्थल सुल्तानगढ़ पर 9 व पवा पर 1 बच्चे की डूबने से असमायिक मौंते हुई है इतनी बड़ी सरकार, व्यवस्था के रहते एक भी जबावदेह का इन मौतों को लेकर सामने न आना। सवाल तो खड़े करता ही है साथ ही विपक्षी दलों की भूमिका पर सत्ताधारी दल की अर्कमण्यता को लेकर भी सवाल उठते है। जिले भर में बड़ी तादाद में जबावदेह लोगों की तैनाती होने के बावजूद भी डूबने से हुई मौंतो की जबावदेही सुनिश्चित न होना किसी भी सुशासन पूर्ण व्यवस्था के लिए शर्मनाक ही नहीं, दर्दनाक भी होना चाहिए। यहां यक्ष सवाल यह है कि अगर सुल्तानगढ़ और पवा जैसे पर्यटन स्थल वन विभाग की मिलकियत में आते है तो फिर आम आदमी का हस्तक्षेप क्यों। अगर यह राजस्व क्षेत्र में आते है तो इतने महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल होने के बाद यहां चौकीदार की तैनाती क्यों नहीं?

जो स्थल घातक रहे हो या इससे पूर्व भी इन स्थलों पर अगर दुर्घटनाऐं घटित हुई है या दुर्घटना से पूर्व घटना होने से रोका गया है, तो फिर पुलिस की नजरों से यह पर्यटन स्थल कैसे ओझल हो सकते है। देखा जाए तो वन विभाग में यूको टूरिज्म व राजस्व क्षेत्र में कई पर्यटन स्थल होने के बावजूद उन्हें बेचिराग या घने जंगल मान लेना कहां का न्याय है। सवाल और भी हो सकते है मगर जिस तरह से सरकार ने अपनी लापरवाही पर पर्दा डाल जबावदेह लोगों को बगैर कार्यवाही के ही क्लीन चिट दे रखी है और विपक्षी दल जिस तरह से 10 मौंतों पर मुंह में मुसीका डाल चुप बैठा है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था व सामाजिक सरोकारों तथा सेवा भाव के साथ न्याय संगत नहीं। जबावदेही सुनिश्चित होना ही ऐसी घटना न घटित हो, उसके लिए सबक हो सकता है। क्योंकि इन स्थलों पर पूर्व में भी घटनाऐं हो चुकी या समय रहते घटना होने से पूर्व लोगों की जाने बचाई जा चुकी हो। इस यथार्थ को भी हमें नहीं भूलना चाहिए।
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