कौन है, चमन में ऐसा जो देता है, तल्ख हवायें, राहुल का मौके पर चौका, प्रधानमंत्री ने दी अविश्वास पर नसीहत

वीरेंद्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस सदन को देखने लोगों की पथरा रही थीं आंखें आखिर वो दिन आ ही गया। भले ही पूर्ण बहुमत के विश्वास को, अविश्वास प्रस्ताव के बहाने देखने का मौका देश को मिला हो, भले ही 48 घंटे की लंबी बहस को अगंभीर करार दिया हो। कम से कम सदन नये रुप, संस्कृति, संस्कारों से ओतप्रोत तो दिखा। तो वहीं दूसरी ओर सौहार्द पूर्ण वातावरण मेें आरोप-प्रत्यारोप तथा सवाल-जबाव भी हुए और कुछ अप्रत्याशित मसलों तथा घटे कुछ घटनाक्रमों ने चर्चा भी खूब बटोरी, तो सरकार का ध्यान देश के कुछ अहम मसलों पर भी खींचा गया। जो मीडिया में बहस के विषय भी बने तो कुछ ने सुर्खियां भी खूब बटोरी।
 
इस अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जहां कॉग्रेस अध्यक्ष सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधा तो दूसरी और वह पूर्व की भांति सरकार की नीतियों की आलोचना करते भी दिखे। मगर सारी परम्पराएं दरकिनार कर और नई संस्कृति को जन्म देते हुए उन्होंने जो हिन्दू, शिव के अर्थ के ज्ञान के लिए आर.एस.एस भाजपा का शुक्रगुजार स्वयं को बता उनका शुक्रिया अदा कर नई संस्कृति को जन्म दे प्रधानमंत्री के पास जाकर उनके  गले लग जो मौके पर चौका लगाया। उससे भले ही सदन स्तब्ध और विरोधी दल सहित टी.वी विवादों में वह आलोचना का शिकार हुए हो। मगर उन्होंने साफ कर दिया कि कॉग्रेस का अर्थ क्या है और सियासी लाभ लेने कैसे मौकेे पर चौका लगाया जाता है। 

ये अलग बात है कि प्रधानमंत्री ने भी उनका राहुल  की हौसला अफसाई की और पीठ थपथपा कर उनसे हाथ मिला उनके कान में कुछ बुदबुदाया। वहीं प्रधानमंत्री ने अपने सम्बोधन में उनकी सरकार पर लगे आरोप और अविश्वास प्रस्ताव के औचित्य तथा सार्थकता पर सवाल खड़े करते हुए एक शेर पड़ डाला। कि न मांझी, न रहवर, न हक में हवाएं हैं। कस्ती भी जर्जर, ये कैसा सफर है। इतना ही नहीं उन्होनें एक-एक कर आंकड़े सहित सरकार उपलब्धियों गिनाई तो वहीं कुछ मुद्दों पर विपक्ष को ऐतिहात व संयम बरतने की भी सलाह दी। जिसमें सेना और विदेश नीति पर उनका इशारा रहा। कुल मिलाकर अविश्वास प्रस्ताव का आखिरकार वही हुआ जो पूर्व प्रत्याशित था। मगर जो भी होकम से कम इस अविश्वास  प्रस्ताव के बहाने ही सही राहुल को कांग्रेस व  स्वयं की छवि चमका कांग्रेस का अर्थ बताने का मौका और मीडिया में सुर्खियां बटोरने का अवसर अवश्य मिल गया। जिसे वर्तमान राजनैतिक हालातों में सार्थक व सफल ही कहा जाएगा।
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