महाकाल दरबार में मत्था टेक अब ओरछा पहुंच राम राजा का आर्शीवाद लेगें सिंधिया

दि.एम.पी.मिरर: मूल्य सिद्धान्त और विकास की राजनीति में गहरी आस्था व्यक्त करने वाले म.प्र. विधानसभा  चुनाव प्रचार समिति के प्रमुख, शिवपुरी-गुना सांसद पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया यूं तो किसी परिचय के मोहताज नहीं। जिनका परिचय मंदसौर की सभा में कॉग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ऊर्जावान, युवा मेहनत कस नेता के रुप में स्वयं दे चुके है पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व.श्रीमंत माधवराव सिंधिया के पुत्र और विगत 1 दशक से अधिक समय से शिवपुरी-गुना के सांसद होने के साथ वह दो मर्तवा केन्द्रीय मंत्री भी रहे है। अपनी दादी स्व.राजमाता विजयाराजे सिंधिया के लाड़ले रहे। ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनके संसदीय क्षेत्र में विकास पुरुष ही नहीं, किसानों के संघर्ष और उनकी पीढ़ा के समय उनके साथ कंधे से कंधा मिला किसानों की आवाज को बुलन्द करने वाले नेता के रुप में समुचे म.प्र. में उनकी स्वीकार्यता बढ़ी है। फिर चाहे वह अपना हक मांग रहे निहत्थे किसानों पर मंदसौर में हुए पुलिस द्वारा गोली काण्ड का मसला रहा हो या फिर सूखा, ओला पीडि़त किसानों का दर्द वह हमेशा अन्नदाताओं की आवाज बुलन्द करते रहे। मंदसौर में किसानों के विरुद्ध हुए गोली चालान के विरोध में मंदसौर की आक्रोश रैली हो या फिर किसानों को पुलिस की गोली से हुई मौत के विरोध में भोपाल के दशहरा मैदान में सत्याग्रह, धरना हो। समुचे म.प्र. ही नहीं, देश से छिपा नहीं है। 

व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोप की राजनीति से दूर रह, जनकल्याण, विकास की सकारात्मक राजनीति करने वाले सिंधिया जब तब शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और शुद्ध पेयजल को लेकर भी आम पीढि़त, वंचित, मजदूर, किसानों की आवाज बुलंद करते रहे है। साथ ही वह अल्प रक्त या कुपोषण से ग्रस्त माता, बहिनों, बच्चों की हालत को लेकर भी म.प्र. में मौजूद सरकार की अर्कमण्यता ही नहीं, जनता के साथ सरकार का क्रूर व्यवहार भी मानते है। 

आज जब वह महाकाल के दरबार में मत्था टेक मालवा के बाद ग्वालियर च बल सहित सागर, रीवा, शहडोल, जबलपुर संभागों के जिला मु यालय तेहसील मुख्यालय की ओर ओरछा से राम राजा का आर्शीवाद ले, म.प्र. विधानसभा चुनाव प्रचार समिति के प्रमुख होने के नाते अन्नदाताओं को न्याय और गरीब पीडि़त, वंचितों को न्याय दिलाने चुनाव प्रचार समिति एवं कार्यकर्त्ता बैठकों के लिए निकले है जिसे वह 7 जुलाई से 15 जुलाई तक छ: संभागों की कई विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकत्र्ताओं से रुबा-रु हो पूरा करेगेंं। 

इस बीच वह क्षेत्रीय नेताओं, कार्यकत्र्ताओं और समाजसेवी परिवारों के बीच शौक संवेदना व्यक्त करने भी जायेगें। साथ ही कॉग्रेस नेता, कार्यकर्ताओं से भेंटकर संवाद और जनस पर्क भी करेगें। भिण्ड, ग्वालियर, शिवपुरी होते हुए ओरछा, खजुरोहा, सागर, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, शहडोल, सिंगरौली, कटंगी, गोविन्दगढ़, बहौरी, जयसिंह नगर, अमझौरी, जबलपुर, मण्डला, डिंडोरी के नेता कार्यकत्र्ता की बैठक लेगें।

देखा जाए तो सिंधिया के इस 9 दिवसीय तूफानी दौरों को लेकर राजनैतिक पण्डित में भी सिंधिया की सक्रियता को लेकर कई कयास लगना शुरु हो गये है। भगवान महाकाल, मां नर्मदा सहित राम राजा का आर्शीवाद ले क्या वाक्य में सिंधिया अपने सहयोगी नेताओं के समन्वय व आलाकमान से मिले आर्शीवाद के बिना पर 3 बार की भाजपा सरकार को 2018 में क्या वाक्य में ही ढेर कर पायेगें। जैसी कि चर्चा चंबल के शेर के नाम से सिंधिया को लेकर समुचे राजनैतिक हल्कों में बलवती हो रही है। 

अब देखना होगा कि एक ईमानदार, संघर्षशील मेहनतकश, सेवा भावी, विकास उन्मुख नेता और जीवन मूल्य सिद्धान्तों की राजनीति के सहारे क्या सिंधिया वह सबकुछ कर पायेगें जिसकी आशा-आकांक्षा आलाकमान ही नहीं, आम कॉग्रेसी कार्यकर्ता और म.प्र. के किसान, गरीब, मजदूर, पीडि़त, वंचित जनता को है। आखिर क्या यह म.प्र. का युवा नेता अपने रण कौशल और सकारात्मक राजनीति के सहारे फिलहाल कॉग्रेस में वह दम भर पायेगा जिसकी आशा विगत 10 वर्षो से कॉग्रेस लगाये बैठी है। अगर अन्दर खानों की माने तो कॉग्रेस में अगर सबकुछ ठीक रहा तो कोई कारण नहीं जो 2018 के परिणाम अप्रत्याशित ही नहीं कॉग्रेस के पक्ष में हो, तो कोई अति संयोक्ति न होगी।
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