संगठन की सीख, कॉग्रेस, बसपा से ले

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कहते है संगठन मजबूत हो तो लक्ष्य व प्रतिष्ठा उसे तब हासिल होती है जब वह अनुशासित हो और नेतृत्व त्वरित सटीक निर्णय लेने में सक्षम हो, फिर वह निर्णय कितने ही कड़े क्यों न हो। ऐसे निर्णय लेने में बसपा सुप्रीमों मायावती का कोई सानी नहीं। क्योंकि वह मजबूत, संगठन और प्रतिष्ठा की खातिर कई मर्तबा कड़े निर्णय लेती रही है। बल्कि कई मौकों पर तो उन्होंने बगैर किसी राजनैतिक नफा नुकसान की परवाह किये कड़े निर्णय लिए है। फिर उनके द्वारा निर्णय उ.प्र. सरकार के मुखिया बतौर रहे हो या फिर संगठन प्रमुख के नाते, उन्होंने एक बेहतर मजे हुए नेता की तरह अपनी निर्णय क्षमता से देश वासियों को कई मर्तवा अचंभित किया है। आज जब एक मर्तवा फिर से उन्होने पार्टी लाइन से अलग व्यानबाजी करने वाले बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयसिंह प्रकाश को उनके सभी पदो से हटा दिया है।

ज्ञात हो कि बसपा सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, धर्म निरपेक्ष व सर्व धर्म, सम्मान की सोच एवं नीतियों में विश्वास रखती है। जैसा कि स्वयं बसपा सुप्रीमों मायावती ने स्पष्ट किया है। मगर जिस तरह से जयप्रकाश सिंह ने कार्यकर्ता सम्मेलन में कॉग्रेस आलाकमान और उनकी मां के बारे में बोला वह बसपा की पार्टी लाइन नहीं है।

कास इस बात को कॉग्रेस या कॉग्रेस आलाकमान समझ पाये कि पार्टी की गाइड लाइन को लाघना व बैवजह की व्यानबाजी कर पार्टी का अनुशासन तोड़ स्वयं की छवि चमकाने बार-बार कॉग्रेस को कलंकित करने जैसे कृत्य करते है। ऐसे नेताओं के खिलाफ अगर कॉग्रेस आलाकमान ने भी समय रहते बगैर नफा-नुकसान की परवाह किए बगैर कड़े निर्णय ले, अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ स त कार्यवाहीं की होती। तो इस तरह कॉग्रेस को बार-बार लांछित और कंलकित न होना पड़ता, न ही कॉग्रेस सहित कॉग्रेस आलाकमान को विपक्षी दलों के बेबुनियाद हमलों को झेलना पड़ता। बैवजह की व्यानबाजी के पीछे व्यान वीरो का मतव्य जो भी हो। मगर इससे साफ जाहिर है कि कॉग्रेस के अन्दर ही कॉग्रेस आलाकमान पर पार्टी तोडऩे या टूटने का जो भय दिखा जो दबाब की राजनीति को परवान चढ़ाया जा रहा है। वह कॉग्रेस जैसी महान पार्टी के  लिए दर्दनाक भी है और शर्मनाक  भीहै। जिस बसपा के पास फिलहाल एक भी सांसद नहीं और केवल उ.प्र. तक उसका प्रभाव सीमित है वह एक मिनिट में राष्ट्रीय नेता को गलत व्यानबाजी करने पर हटा देती है। मगर जिस कॉग्रेस पार्टी पर 50 से अधिक सांसद व समुचे देश में कार्यकर्ता, शुभचिन्तकों एवं कॉग्रेस के लिए कार्य करने वाले निष्ठावान नागरिकों की लंबी चौड़ी फौज है ऐसी कॉग्रेस में ऊलजुलूल व्यानबाजी देने वालो को हटाना तो दूर, एक नोटिस तक जारी नहीं हो पाता है। बल्कि जो लोग राष्ट्र तक को अपमानित करने या कॉग्रेस की छवि खराब करने तक में नहीं चूकते ऐसे लोगों को तत्काल कॉग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। फिर वह सांसद, विधायक हो या फिर संगठन में किसी भी अहम ओहदे पर विराजमान। अगर अनुशासन के लिए की गई कड़ी कार्यवाहीं के चलते दो पांच नेता, सांसद, विधायक कॉग्रेस से बाहर चले भी जाते है तो कॉग्रेस जैसा बड़ा स्वीकार्य संगठन खत्म होने वाला नहीं और न ही देश से कॉग्रेसी विचारधारा खत्म होने वाली। ये सच कॉग्रेस आलाकमान को समझ लेना चाहिए। क्योंकि किसी भी संगठन की पहचान उसके वैचारिक आधार एवं व्यवहार सहित उनके आचरण से होती है न कि ऐसे नेताओं के नामों से जो खुद की पहचान बनाने संगठनों में मौजूद पदों या सत्ता में मौजूद पदों के मोहताज होते और कॉग्रेस के लिए गर्व की बात यह है कि देश और कॉग्रेस के लिए कॉग्रेस के कर्तव्य निष्ठ नेताओं ने जान की ही बाजी नहीं, अपना सबकुछ लुटाकर अनगिनित कुर्बानियां दी है। असल पहचान के हकदार तो वहीं नेता है जिन्हें भुला आज के नेता अपनी छवि ऐन-केन चमका अपनी स्वार्थ सिद्धि करना चाहते है।

मगर कॉग्रेस का र्दुभाग्य यह है कि जो जागीरो पर कब्जा कर गोलबंद हो 24 अकबर रोड से लेकर 10 जनपथ में पैठ बना पीढ़ी दर पीढ़ी मय परिजन चेले, चपाटों को संगठन में अहम नेता, कार्यकर्ता बता, देश भर ही नहीं कई प्रदेशों में अपनी राजनैतिक दुकाने चमका चला रहे है। उससे आम वैचारिक, समर्थक ही नहीं, अन्तिम पंति में खड़ा आम कार्यकर्ता, नागरिक, समर्थक भी कॉग्रेस को लेकर काफी हताश-निराश है।

कारण जिस तरह से आज कॉग्रेस वर्किंग कमेटी या म.प्र. में संगठन,पदाधिकारियों की सूचियां जारी हो रही है अगर उनका ठीक से अवलोकन हो जाए तो उसमें सिवाय, उन लोगों के जो किसी न किसी छत्रप के सागिर्द सिपहसालार है के नाम तो है। मगर इसके उलट न तो किसी नये युवा, नौजवान, आम नागरिक, शुभचिंतक, विद्यवान, समर्थकों के नाम है जिसके आधार पर लोग कह सके कि कॉग्रेस नये किलेवर के साथ नये लोगों से मुखातिब है। जो युवा पीढ़ी की आशा-आकांक्षाओं पर आने वाले समय में खरी उतर सके और एक सशक्त सत्ताधारी दल से सडक़ पर संघर्ष कर सके। देखा जाए तो जिनकी गहरी आस्था कॉग्रेस या राष्ट्र मेेें है वह बैचारे मजबूर और बैवसों की भांति कॉग्रेस से आज भी बाहर पड़े है। जिन्हेंं इस बात का भी दर्द है कि बगैर किसी कारण के अस्त होते वह एक ऐसे सूर्य को अस्त होते देखने पर मजबूर है जिसे डुबाने वाले भी वहीं लोग है, जो आज टिकट की दौड़ में ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे है और उनके वहीं संरक्षक है जिनके चेहरों को चमक कभी कॉग्रेस या गांधी परिवार ने दी।

बेहतर हो कि आलाकमान बसपा सुप्रोमो से सीख ले कड़े निर्णय ले बगैर किसी की परवाह किये। जो निर्णय राष्ट्र-जन और संगठन के हित में हो। खासकर म.प्र. में जंबो जेट कार्यकारिणी तथा हालिया गठित राष्ट्रीय कार्यकारणी में सुमार नेताओं को 3 राज्यों में आसन्न चुनावों में क्षेत्र वायज विधानसभा ही नहीं, सेक्टर वायज जबावदेही सुनिश्चित कर, परिणाम देने के लिए उत्तरदायित्व सुनिश्चित करें। जो अपने प्रभार क्षेत्र के नये-पुराने कॉग्रेस समर्थित या वैचारिक लोगों की लिस्ट तैयार कर आलाकमान को सौंपे जिससे टिकट वितरण और चुनाव प्रचार में जबावदेही सुनिश्चित करते वक्त यह तय हो सके कि उसका क्षेत्र में कितना जनाधार है जिसके लिए टिकट या संगठन में पद मांगा जा रहा है या जिन नये नेताओं को प्रतिभा के आधार जोड़ा जा रहा है उनकी उपयोगिता संगठन या चुनाव के दौरान क्या बेहतर हो सकती है। केवल उन्हीं नेताओं को प्रदेश भर में कॉग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने व संगठन को मजबूत बनाने यात्राओं के माध्यम से आक्रमण रणनीति पश्चात उत्तरदायित्व तय किये जाये जिनमें या तो अंदम्य साहस अधभुत प्रतिभा, वक्ता या संगठनात्मक क्षमता हो और जिनकी छवि निष्कलंक तथा साफ सुथरी हो। मगर यह तभी संभव है जब कॉग्रेस आलाकमान अपनी टीम के माध्यम से अलग से स पर्क अभियान चला सीधे नये लोगों को जोडऩे का अभियान तत्काल शुरु कर एक नया संदेश लोगों के बीच दें, वरना भविष्य सामने है अगर समय रहते इस पर कॉग्रेस आलाकमान ने ध्यान नहीं दिया तो बहुत देर हो चुकी होगी। तब कॉग्रेस के पास पछतावें के अलावा और कुछ शेष न होगा। 
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