माननीय, श्रीमान मातृशक्ति से सीखें, निडर, कर्तव्य निष्ठा

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। व्ही.एस.भुल्ले: आज देशवासियों को दीपाली रस्तोगी जैसे लोक सेवक पर गर्व भी होना चाहिए और स्वयं को ऐसे लोकसेवकों को पाकर गौरान्वित भी महसूस करना चाहिए। यूं तो संविधान की शपथ लें, राष्ट्र-जनसेवा की शपथ लें, शासकीय सेवा में कई लोग आते है। मगर म.प्र. केडर की आईएस अधिकारी दीपाली रस्तोगी जैसे अधिकारी विरले ही होते है जो पूरी निडरता के साथ निष्ठा पूर्ण ढंग से अपने कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों का निर्वहन करने में नहीं हिचकते।

ज्ञात हो कि अभी हाल ही में म.प्र. की आईएस अधिकारी जनजातीय विभाग की आयुक्त दीपाली रस्तोगी ने म.प्र. के सभी कलेक्टरों को आदेश जारी कर निर्देशित किया है कि किसी भी प्रकार के सरकारी आयोजन, सम्मेलन, विकास यात्रा के नाम उनके विभाग के बजट में मौजूद धन राशि का उपयोग कतई न किया जाए। यदि कलेक्टर ऐसा करते है तो इसे गंभीर वित्तीय अनिमितता माना जाएगा और उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। इससे पहले भी दीपाली रस्तोगी ने एक आदेश जारी कर, निर्देशित किया था कि विभाग के होस्टलों, आश्रमों और अन्य आवासीय संस्थानों के विद्यार्थीयों को शैक्षणिक गतिविधियों के अलावा अन्य किसी प्रकार की गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति न दी जाए। यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह समेत सभी मंत्रियों के कार्यक्रमों, रैलियों में स्कूल के बच्चों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी जाती थी और जैसा कि विधित है इन दिनों म.प्र. मुख्यमंत्री जनआर्शीवाद यात्रा पर है। जिसे चुनावी यात्रा माना जा रहा है। मगर सरकारी योजनाओं के माध्यम से इसका खर्च शासकीय विभागों को उठाना पड़ रहा है। 

ऐसे में उल्लेखनीय बात यह है कि जब सरकार के मुखिया या देश के प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में राजनैतिक उद्देश्य की पूर्ति हेतु कई नौकरशाह संविधान की शपथ के विरुद्ध यश मेन की मुद्रा में अपने मूल कर्तव्यों को भूल नजर आते है। ऐसे में एक महिला अधिकारी का पुरुषार्थ उसका सामर्थ और अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठा तथा संविधान की शपथ के प्रति कृतज्ञता गर्व की बात है। जिस पर समुचे देश को गर्व होना चाहिए। 
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