कुचिन्तन, कर्तव्य विमुखता का दंश झेलता शहर

धर्मेन्द्र सिंह/विलेज टाइम्स समाचार सेवा 10 जून 2018। कहते है दुर्भाग्यशाली, बदकिस्मत अनाथ उसे कहा जाता है जिसका कोई पालक अर्थात नाथ न हो जिसके पास स्वच्छद जीवन निर्वहन हेतु अर्थात (पैसा) अवसर, (मौका) न हो, सहयोग के लिए सारथी और दुख, परेशानी में कोई रक्षक शुभचिन्तक तथा पुरूषार्थ सामर्थ व्यक्त करने वह संसाधन और बल न हो। मगर दुर्भाग्य इस शहर का कि संघर्ष, सेवा, सामर्थ की पूर्ण निष्ठा ईमानदारी के साथ परकाष्ठा करने वाले स्वच्छ आचरण, व्यवहार के जनप्रतिनिधि और इस शहर के पास वह सब कुछ होने के बाबजूद भी आज यह शहर तार-तार पढ़ा है, और कुचिन्तन कर्तव्य विमुखता के चलते दुर्दशा का दंश झेलने पर मजबूर है।

कौन नही जानता शिवपुरी में पेयजल की समस्या नई नहीं है और विगत 20 नही 30 वर्षो से सिन्ध की मांग चल रही है। मगर इसका विकराल रूप तब सामने आया जब  पूर्व विधायक माखन लाल नगर पालिका अध्यक्ष हुआ करते थे और यह समस्या वर्तमान खेल युवा कल्याण धार्मिक न्यास, धर्मस्य, मंत्री श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया के संज्ञान में लाया गया और फॉरी तौर पर कुछ वर्षो के लिए स पबैलों से पेयजल सप्लाई की कल्पना के साथ मढ़ीखेड़ा से सिन्ध लाने की बात हुई इस बीच स पबैलों की स्थापना के साथ दनादन बेखौफ अन्दाज में बोर बैलों का उत्खनन भी शुरू हुआ मगर कानूनी दांव-पेच के चलते निर्धारित समयावधि में सिन्ध स्वीकृत नहीं हो सकी और शुरूआती स्वीकृति श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया के प्रयासों से होने के बाद श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया ने कोर्ट रोड़ की सभा में 25 लाख की राशि भी भरी सभा में दिलाई।  इस बीच स्थानीय सांसद पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्रीमंत ज्यातिरादित्य सिंधिया के द्वारा केन्द्र सरकार से लगभग 50 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत कराई, मगर तब से लेकर अब तक कभी फोर लाईन का रोड़ा तो कभी फॉरेस्ट तो अब घटिया पाइप लाइन का मामला सिन्ध के शुद्धपेय जल और शहर वासियों के बीच रोड़ा बना है। 
कौन नही जानता कि आज से 15 वर्ष पूर्व खनवरियों के वृहत धरने को जिसमें स्वयं धरना दे खदान माफिया से मैदान में दो-दो हाथ करने में श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया पीछे नहीं रही, चाहे देश की पहली प्रधान मंत्री सडक़ रही हो, या फिर जिलेभर में जल ग्रहण मिशनों की श्रंखला और खेल अकादमी सहित जब शहर धूल के ढेर में तब्दील हो, सडक़ों के नाम खून के आंसू बहाने पर मजबूर था तब शहर भर में चौड़ी, सरपट सडक़ों को करोड़ों रूपये लागत से निर्माण, इतना ही नहीं जिलेभर के थोक बन्द मंदिरों के जीर्णोद्वार से लेकर 18 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन भगवान लक्ष्मीनारायण मंदिर का निर्माण, तुत्र गति से जारी है। जिसमें संग्राहलय जीर्णोद्वार से लेकर भगवान सिद्धेश्वर, गोरखनाथ, कालिया मर्दन जैसे प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्वार शहर के लिए ही नही आने वाली पीढिय़ों को मिशाल साबित होगा।
मगर राजनैतिक द्वेष और शहर के भोले-भाले शहर वासियों को कुछ विघ्नसन्तोषी अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा पूर्ति और अपने निहित स्वार्थ साधने एक ऐसे अन्धकार में धकेलने की असफल कोशिश में जुटे है। जिसमें उन्हें सफलता मिल पाना अस भव है। कुछ दौर आये और गये मगर शहर आज भी वही का वही है और विकास सुधार की ओर अग्रसर। मगर इस बीच राजनीति में जो कुचिन्तन और प्रशासनिक तंत्र में जो कर्तव्य विमुखता के साथ कालूषित राजनीति ने जन्म लिया अब उसके चलते शहर को लेकर जो गुरूर आम जनता में कभी होता था वह अब दरकने लगा है वह भी तब की स्थिति में जबकि ताकतवर, कर्तव्यनिष्ठ, दिन-रात एक करने वाले वैभवशाली और सहनशीलता की पराकाष्ठा झेलते जनप्रतिनिधि और जनता है। 
मगर समझने योग्य बात यह है कि आखिर वो कौन लोग है जो अपनी महत्वाकांक्षा निहित स्वार्थ पूर्ति के लिए इस शहर व इस शहर के जनप्रतिनिधियों सहित जनता का भला नही चाहते। इन्हें ढूढ सार्वजनिक करना ही अब जनता, जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य होना चाहिए। जिससे शहर समझ सके कि सच क्या है? और समाधान क्या? हालांकि यह कार्य आसान नहीं मगर असंभव भी नही।
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