विश्वास खोते दल का विश्वाघात दिवस

व्ही.एस. भुल्ले/विलेज टाइम्स समाचार सेवा, 26 मई 2018। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि वर्तमान व्यक्तिगत सामाजिक आचार, विचार, चाल चरित्र, आचरण, व्यवहार में गिरावट के चलते, साफ-सुथरी राजनीति और राजनीति सहित सत्ता, दलों से सकारात्मक परिणाम मूलक राजनीति और सज्जन पुरूषों की सहभागिता घटी है। जिसके  दुषपरिणाम, परिणाम शून्य नीतियां हर क्षेत्र में बढ़ती अराजकता के रूप में हमारे सामने है। मगर फिलहाल भाजपा की मोदी सरकार पर कांग्रेस के ग भीर आरोपों को लेकर यक्ष सबाल यह है कि अगर जाप्ते की माने तो देशभर में अपने चाल चरित्र, आचारण व्यवहार के चलते मुद्दा विहीन विश्वास खोती कांग्रेस ने अपने पुराने सिपहसालारों पर एक बार फिर से विश्वास व्यक्त कर 26 मई को विश्वासघात दिवस के रूप में मनाया, अगर खबरों की माने तो यह कार्यक्रम अखिल भारतीय स्तर से लेकर प्रदेश, जिला विकासखण्डों में मनाने का प्रयास हुआ है। जिसमें जारी प्रेस नोट में जहाँ यूपीए सरकार की कामयाबियों को गिनाया गया है तो दूसरी ओर मोदी सरकार को असफल और सरकार से  झूठे प्रचार को मुद्दा बनाया गया है।

मगर यहाँ यक्ष सबाल यह है कि लीक दर लीक दौड़ पड़ी कांग्रेस क्या अपनी पूर्ववत गलतियों से कोई सबक ले पाई तो जबाब होगा बिल्कुल नही। देखा जाये तो लोकसभा सहित देश के कई बड़े राज्यों में अपनी सरकार गवा चुकी कांगे्रस में निजाम तो बदला मगर न तो वह संगठन में ऐसे कोई अमूल-चूल परिवर्तन कर पायी न ही ऐसे मुद्दे निर्धारित कर नये वैचारिक लोगों को जोड़ पायी, जिससे कांग्रेस नये क्लेवर के साथ प्रभावी नजर आती है। 

देखा जाये तो संगठन विस्तार के नाम वही क्षेत्रीय क्षत्रप और उनके चेले-चपाटों की नये सिरे ताजपोशी और मुद्दों के नाम वही आरोप प्रत्यारोप जिन्हें 2014 में देश की जनता और कई बड़े प्रदेश मप्र, छत्तीसगढ़ में जनता विगत 14 वर्षों से नकार रही है। कारण साफ है कि कांग्रेस नया कुछ नहीं कर पायी, बेहतर हो कि कांग्रेस ऐसे लोगों की तलाश करें जो वैचारिक हो और मुद्दे अहम, तभी देश में कांग्रेस के प्रति लोगों में पुन: विश्वास कायम हो पायेगा। क्योंकि जब तक कांगेे्रस स्वयं के प्रति विश्वास और मजबूत वैचारिक संगठन खड़ा नही कर लेती, तब तक वह चाहे विश्वाघात दिवस मनाये या फिर भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार नाकामयाबियों को गिनाये उसका कल्याण अस भव ही है।
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