राष्ट्रीय सत्ता कबाड़ दल जिन्दाबाद ?

व्ही.एस.भुल्ले @तीरंदाज | सत्ता के लिये झुण्ड बद्ध दो फाड़ होते राजनैतिक दलों से सत्ता हथियानों वालो की बनती सरकारों के शुअवसर पर, मुये तू कै अर्र-बर्र बक रिया शै। कै थारे को मालूम कोणी हारे महान भारत के दक्षिणी द्वार के राज्य में एक हफते में ही दूसरा मु यमंत्री बनने की शपथ ले रिया शै। सुना है कर्नाटक के मु यमंत्री के साथ गाड़ी भरे मंत्री भी पद गोपनियता और सेवा निष्ठा की शपथ लेगे और गठबन्धन के सहारे राज्य, जन सेवा और कल्याण के नये-नये कीर्तिमान स्थापित कर महान कर्नाटक राज्य का नाम रोशन करेगें। 

         मगर सुना है अन्य राज्यों में अल्मत में सरकारें कबाडऩे वालो का दल कर्नाटक में सर्वाधिक सीटे जीतने के बावजूद भी अब विपक्ष में बैठेगा और कान फोड़ू टी.वी. चैनल बालो के मंच पर चीख-चीख कर लोकतंत्र राजनैतिक, मूल्य सिद्धान्त नैतिकता पर तूफान उठेगा। तो वहीं सत्ता से दूर हुये भाई लोग नीति नियत पर सवाल उठा इतिहास गिना रहे है। तथा वहीं गठबन्धन के गर्व से मिली सत्ता के सिपहसालार एक-एक प्रत्याशी को 20-20 करोड़ तो स पूर्ण चुनावी खर्च विपक्षी दल का हजारों करोड़ में बता रहे है। साथ ही इस खर्च सहित काला धन कुबेर दल की जांच की बात निष्पक्ष जांच एजेन्सी से कराने की मांग भी हाथों हाथ उठा रहे है। 

भैये- तने तो बावला शै कै थारे को मालूम कोणी राजनीति के गुर पहले तो राज्य व जन कल्याण के लिये राजनीति होती थी आज सिर्फ और सिर्फ राज करने की नीति ही राजनीति है। जिसमें खुलकर साम, नाम, दण्ड, भेद की सरेयाम लटयाई चल रही है। और जनधन पर धन और बाहु बल की राजनीति सत्ता के लिये सेवा के नाम खूब फल फूल रही है। 
भैया- तो इतने पर तो हारा राज्य समृद्ध खुशहाल बन जायेगा और गांव, गली, गरीब का जीवन हाथों हाथ सुधर जायेगा। 
भैये- कै थारे को मालूम कोणी थारे जैसे लगभग 80 करोड़ सस्ते राशन के मोहताज गांव, गली, गरीब की सेवा और थारी आने वाली नस्लों की ऐसी व्यवस्था हारे लोकतंत्र में हो ली की मुये सत्ता तो दूर की कोणी कभी सत्ता कबाडू दलों के रहते सुख का मुंह तक नहीं देख पायेगी। क्योंकि स्वयं के वोट के अलावा जिनके पास खाने का राशन नहीं वह चुनाव लडऩे ला ाों करोड़ों की अकूत दौलत चुनावों में लुटाने कहा से लायेगें। 
भैया- मने समझ लिया थारा इसारा अब मने भी हाथो हाथ धन कुबेर और बाहुबली और गुण्डों का गठबन्धन से राष्ट्रीय सत्ता कबाड़ दल बनाऊंगा। कीमत जो भी हो हर हाल में अपने दल को चुनाव जिता हर राज्य में अपनी सरकार बनाऊंगा। फिर गरीबों का जनधन सेवा कल्याण के नाम लुटे या फिर प्राकृतिक संपदा,  सच बोल्यू तो आज के लोकतंत्र से बेहतर लोकतंत्र बनाऊंगा एक बार सत्ता क्या मिली तो सत्ता कबाड़ दल की एश्वर्य की ऐसी गाथा और दिव्य भव्य इतिहास लिखबाऊंगा जो भूतो न भविष्यते हो, न कि दिल्ली के मु यमंत्री विधायकों की तरह स्वयं के हालात अपराधियों से भी बत्तर कर अपनी फजीअत करवाऊंगा। जिस पर न तो पक्ष, विपक्ष, बन्धन, गठबन्धन, न्याय दिलाने वाले ध्यान दे रहे न ही महान ऐतिहासिक दिल्ली वाले ही कुछ बोल पा रहे। इतने पर तो चल जायेगी, हो न हो अगली सरकार अब सत्ता कबाड़ दल की ही तुझे हारे महान लाल किले पर नजर आयेगी बोल भैया कैसी रही। 
जय जय श्री राम 
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