2013 का इतिहास दौहराते राजनैतिक दल

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। वर्तमान राजनैतिक हालातों के मद्देनजर म.प्र. को आज अपने नौजवानों से बड़ी उम्मीद है इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि अगर म.प्र. के राजनैतिक दल 2013 का इतिहास दौहराते है तो आम जन के हालात और नैसर्गिक सुविधाओं की स्थिति क्या होगी यह कहना जल्दबाजी होगी। विषम हालातों में आज म.प्र. फिर से नौजवानों से उम्मीद गढ़ाये बैठा है कि वह म.प्र. की समृद्धि, खुशहाली के लिये एक मर्तवा फिर से अपने-अपने निहित स्वार्थ छोड़, अपने-अपने परिवार, समाज व प्रदेश के लिये वह निस्वार्थ भाव से त्याग करे। 

यूं तो 25 वर्ष का ल बा समय इस बात का गवाह है कि प्रदेश ही नहीं प्रदेश की समृद्धि, खुशहाली की चिन्ता किसी को नहीं, सिवाय सत्ता संघर्ष और सत्ता का शोषण के। कारण कि आज हम एक ऐसी बैवसी मायूसी भरा जीवन जीने पर मजबूर है। जो हमारे इतिहास के विरुद्ध है, ही नहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, रोजगार जैसी नैसर्गिक सुविधाओं पर कलंक है और ऐसी सत्ताओंं की सेवा पर वह बदनुमा दाग है। जो व्यवस्था जुटाने के बजाये भाषणों से भरमा, झूठे आश्वासनों से जनसेवा में लिप्त रहती है। 

मगर म.प्र. की राजनीति में विकल्प के अभाव में प्रदेश की जो दुर्गति म.प्र ने देखी है। वह किसी से छिपी नहीं, स्थापित संस्थायें सत्ता अपने आचरण, व्यवहार से अपनी मूल पहचान खो रही है तो दूसरी ओर हमारा वर्षो पुराना सिस्टम दरक रहा है। 

ऐसे में उम्मीद उन विद्या विद्यवान, उघोगपति, किसान, गांव, गली, गरीब और म.प्र. के उन नौजवानों से है जो म.प्र. को अपने सपनो का समृद्ध, खुशहाल प्रदेश बनाना चाहते है। जो अपनी प्रतिभा, पुरुषार्थ के बल म.प्र. को नये सिरे से गढऩा चाहते है। जो चाहते है उनका शेष जीवन उन दलों की गुलामी से मुक्त कटे, जो बेहतर भविष्य के सपने दिखा सतत सत्ता सुख भोगना चाहते है। हमें  और हमारे नौजवानो को अब 2018 में विचार करना होगा कि हम कैसी सत्तायें, सरकारें और शासन चाहते है वरना देर होते समय नहीं लगेगा और हम फिर एक मर्तवा 5 वर्ष का समय गवाने मजबूर होगें जैसी कि स भावना और मौजूद दलों को सत्ता प्राप्ति का मुगालता है। बेहतर हो कि हम एक ऐसा मार्ग प्रस्त करें जो सहज, सुगम और परिणाम उन्मुखी हो, और उन दलों का विकल्प बन सके जो अभी तक नौजवान, बुजुर्ग ही नहीं, बच्चों के सपनों को साकार करने में अक्षम, असफल साबित होते रहे है।  

SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment