अघोषित सत्ता स्वामियों को सच्चे जनसेवक का स्पष्ट संदेश: आखिर सेवा पर उठते सवाल, कितने सार्थक

वीरेन्द्र भुल्ले/विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जब से मप्र में तीसरी मर्तवा भाजपा सरकार की कमान शिवराज सिंह चौहान ने स हाली लगभग तभी से अघोषित सत्ता स्वमियों की मण्डली से औपचारिक, अनौपचारिक सवाल उठना शुरु हो गये और निशाना कोई और नहीं सत्ता प्रमुख शिवराज ही रहे। ऐसा नहीं, कि शिवराज की सेवा को लेकर इससे पूर्व भी सवाल कुछ कम रहे हो, मगर तब तौहमत विपक्ष के हाथों मली जाती थी और चमकदार अघोषित सत्ता स्वमियों की मण्डली शिवराज के साथ खड़ी नजर आती थी फिर मौका जो भी रहा हो।

            मगर तीसरी मर्तवा मप्र की जनता शिवराज को सरकार चलाने का मौका क्या दिया तभी से दबी या खुली जबान औपचारिक अनौपचारिक रूप से सरकार के मु िाया उनके खासम-खास नौकरशाह और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल बने रहे। मगर वहीं सवाल कुछ नये चेहरे या बगैर चेहरों के अघोषित सत्ता स्वमियों के समूह या दल के ही कुछ लोगों के मुंह से सार्वजनिक हो, खुलकर सामने आने लगे, तो बुद्धिजीवी वर्ग भी चिन्तन और चिन्ता की दिशा में बढऩे लगा। परिणाम कि चिन्तन व अपुष्ट खबरों और चर्चाओं में जो सार दिखाई दिया वह बड़ा ही चिन्ताजनक रहा।  

            देखा जाये तो मप्र की राजनीति में जब से पूर्व संगठन मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की विदाई के साथ सरकार के चन्द नौकरशाहों के हाथ सत्ता की अघोषित कमान क्या हुई कि अघोषित सत्ता स्वमियों की मण्डली अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हो गयी। जिसमें आध्यापक वर्ग आन्दोलन से लेकर त्रिस्तरीय पंचायती राज संगठन का आन्दोलन, किसान आन्दोलन और सपाक्स जैसे संगठनों के आन्दोलन सहित कुछ सहयोगी मंत्रियों की धार मप्र में पैनी होने लगी। इन सबका परिणाम यह रहा कि भाजपा एक लोकसभा और क्रमश: 4 विधानसभा उपचुनावों में हार का मुंह देखती रही और जिसकी तौहमत सत्ता के मुखिया शिवराज सिंह के चेहरे पर मडऩे की कोशिश होती रही। जिसे शिवराज सिंह ने चुनावी हार-जीत को लेकर खारिज कर दिया।  

             अगर शिवराज के दल के मुखर कुछ नेताओं के व्यानों पर भी संज्ञाल ले, तो चाहे वह पूर्व मु यमंत्री बाबूलाल गौर, पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री सरताज सिंह, पूर्व मंत्री वर्तमान सांसद का संसद में अनूप मिश्रा का सवाल, पूर्व मंत्री ढालसिंह सैन, विक्रम वर्मा और वर्तमान मंत्री दर्जा प्राप्त रघुनंदन शर्मा की सलाह इस बात के स्पष्ट संकेत है कि भाजपा के अन्दर ही अपनी सरकार के मुखिया के खिलाफ सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। जिस तरह से प्रदेश अध्यक्ष के रुप में नंदकुमार सिंह चौहान की ताजपोसी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मंत्री मण्डल से विदाई और शिवराज समर्थक विधायकों की मंत्री मण्डल में अहम विभागों में ताजपोशी सहित। अघोषित रुप से मु यमंत्री के समर्थक नौकरशाहों की मनमानी जिन पर मंत्री मण्डल के सहयोगियों को भी इकनौर करने के अपुष्ट रूप से आरोप जब-तब लगते रहे। 

             मगर कोलारस में ऐड़ी चोटी का जोर लगाने के बावजूद भी भाजपा सरकार को मिली हार इतनी दर्दनाक होगी कि मु यमंत्री ने बेरखेड़ी जैसे ग्राम में समाज विशेष की राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में अघोषित सत्ता स्वमियों को यह संदेश स्पष्ट करने की कोशिश की है जैसी कि राजनैतिक हल्कों में चर्चा है। कि उनकी सेवा और संगठनात्मक ताकत कुछ कम नहीं, वह भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में। क्योंकि जिस तरह से उन्होंने भरी मंच से कहा कि एक मु िाया के रुप में एक पालक के रुप में उन्होंने प्रदेश के हर नागरिक, बच्चे, बूढ़े, जवान, माता-बहिनों के लिये बगैर किसी जाति वर्ग में भेद किये जन्म से लेकर मृत्यु तक सहयोग और सेवा की अपनी योजनाओं के माध्यम से कत्र्तव्य और उत्तरदायित्व निर्वहन करने की कोशिश की है। जिसमें बच्चों के लिये पहली से लेकर पीएचडी तक फ्री शिक्षा और बच्चों से लेकर बूढ़ों तक इतनी मंहगी स्वास्थ्य सेवा और प्राकृतिक या आसामाहिक मृत्यु पर 2 लाख की आर्थिक सहायता सहित जरुरतमंद गरीब, मजदूर, किसान के लिये पंचायतों में दहासंस्कार तक के लिये आर्थिक मदद की व्यवस्था की है। कुपोषण से मुक्ति की दिशा में माता-बहिनों को गर्भवती से लेकर बच्चे को जन्म देने तक लगभग 24 हजार रुपया नगद देने की भी व्यवस्था सरकार ने की है। किसानों को उपार्जन का उचित मूल्य दिलाने भाव का अन्तर गोदाम किराया, माल के रुप में रिण और मन मर्जी से उचित मूल्य मिलने पर बेचने की व्यवस्था दी है। प्राकृतिक आपदा, ओलावृष्टि, सूखा से निवटने की 30 हजार का बीमा और 25 हजार प्रति हेक्टेयर मिलाकर कुल 55 हजार रुपया प्रति हेक्टेयर राहत राशि की भी व्यवस्था सरकार ने की है। बिजली का लाभ हर गरीब को मिले उसके लिये 200 रुपया प्रति माह फिक्स बिजली बिल एवं नि:शुल्क विधुत कनेक्शन की व्यवस्था सरकर ने की है। 

            ज्ञात हो कि इससे पूर्व लाडली लक्ष्मी, कन्यादान, गांव की बेेटी 75 एवं 85 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्र-छात्राओं की उच्च शिक्षा में स पूर्ण खर्चा, तीर्थदर्शन, डायल 100 जैसी सेवा भावी योजनायें मप्र में प्रचलित है। लगता है कि यह सरकार के एक ऐसे सेवक की सेवा की पराकाष्टा ही है जिसे आज अपनों के ही बीच अघोषित सत्ता स्वमियों की मण्डली से दो-चार होना पड़ रहा है। अघोषित रुप से विपक्ष विहीन हो चुके प्रदेश में फिलहाल ऐसी कोई चुनौती शिवराज के सामने नहीं थी। सिवाय शासकीय योजनाओं के सफल व सक्षम क्रियान्वयन और मृत प्राय: होते विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोपों के बीच। 

मगर जिस तरह से वह अघोषित सत्ता स्वमियों का भार झेलने पर मजबूर है वह किसी भी सच्चे जनसेवक के लिये दर्दनाक होता है जो उनके आचार-व्यवहार में बेरखेड़ी की धन्यवाद सभा में देखने मिला। उन्होंने अपना भाषण भले ही अपने चिरपरिचित अंदाज में दिया हो। मगर जो आचार-व्यवहार मंच पर उपस्थित लोगों, प्रेस या उनके शुभचिन्तकों के बीच महसूस किया गया वह शिवराज की व्यथा समझने काफी है जैसा कि आम चर्चा और लोग फुस-फुसाते दिखे। 

       मगर सबसे बड़ी चर्चा का विषय फिलहाल राजनैतिक हलको में यह रहा कि जाति विशेष बाहुल्य ग्राम बेरखेड़ी में जाति विशेष की राष्ट्रीय अध्यक्ष की उपस्थिति इस बात के स्पष्ट संकेत है कि एक शान्त प्रिय जनसेवक की सेवा में अगर बगैर किसी दोष के बाधा खड़ी की जायेगी, तो निश्चित ही लोकतंत्र में संघर्ष के रास्ते कभी बंद नहीं हो सकते। सच क्या है और झूठ क्या यह तो भाजपा या अघोषित सत्ता स्वमियों की मण्डली या फिर सेवा के क्षेत्र में सबसे बड़े जनसेवक के रुप में उभर रहे मप्र के मु यमंत्री ही जाने, फिलहाल तो सरकार के चेहरे को लेकर मुखर सवाल समुचे प्रदेश में जोरो पर है। देखना होगा कि पूर्व की भांति चेहरा बदलने को लेकर शुरु हुये अभियान को सफलता मिलेगी या फिर असफलता यह कहना फिलहाल जल्दबाजी ही होगी।  
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