एक्शन मोड में म.प्र. सरकार, मुखिया ने मातहतों से मांगे परिणाम

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 19 मार्च 2018 म.प्र.। जिस तरह की अव्यवस्था, अराजकता से मप्र के लोग विगत कुछ वर्षो से दो-चार होते चले आ रहे है जिसके चलते बढ़ते जनाक्रोश और आलोचनाओं के मद्देनजर लगता है कि अब मप्र सरकार एक्शन मोड में दिखाई दे रही है। देखा जाये तो जिस तरह से मप्र के मुख्यमंत्री ने छेड़-छाड़, बलात्कार, हत्या की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर समुचे प्रदेश के पुलिस कप्तानों की वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मज मत कर, ताकीत की है कि मुझे अब कारण नहीं, परिणाम चाहिए। मनचले मजनूयों पर पुलिस की ऐसी प्रभावी र्कायवाही होनी चाहिए जिसके परिणाम भी दिखे और लोग मेहसूस भी करे। 

ज्ञात हो कि प्रदेश भर के आला पुलिस अधिकारियों को 7 दिन का समय व्यवस्था सुधारन के लिये देने वाले मप्र के मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह 7 दिन पश्वात पुन: वीडिया कॉन्फ्रेंस के माध्यम से वह कानून व्यवस्था की समीक्षा करेंगें। इतना ही न हीं, जिस तरह से मप्र सरकार ने मप्र के लोगों को भर्तियों में प्राथमिकता व संविदा कर्मियों और संविदा नीति को दुरूस्त बनाने की बात सार्वजनिक की है। उसके चलते लगता है कि सरकार फुल एक्शन मोड पर है। 

मगर यथार्थ और व्यवहारिक सच्चाई इस बात की गवाह है कि सरकार को बहुत कुछ करना अभी बाकी है। मगर कम समय के रहते, देखना होगा कि सरकार को संचालित करने वाले थिंकटेको की टीम ऐसा कौन सा अलाउद्दीन का चिराग ढूंढकर लाती है। जिससे अराजकता पूर्ण व्यवस्था और हताश-निराश युवा, बेरोजगार किसानों को राहत मिल पाती है। बहरहाल बातें कोई कितनी ही न कर ले, आश्चासन कोई कितने ही क्यों न दें, मगर सच्चाई यह है कि अल्लहड़ हो चुकी मशीनरी और अहंकार में डूबी सत्ता से सरकार को पार पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन-सा नजर आता है। 
जय स्वराज 

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