आदर्श नीतियों का अभाव, अन्याय और अराजकता का कारण, संविदा कर्मियों के बीच पहुंचे स्वराज मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले

धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर, विलेज टाइम्स समाचार सेवा। कई दिनों से शिवपुरी कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे, संविदा कर्मियों के बीच आज स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने संविदा कर्मियों की पीढ़ा को जायज एवं उनके साथ हो रहे अन्याय को नजायज ठहरा दुख व्यक्त करते हुये कहा कि यह हमारा सौभाग्य है या दुर्भाग्य कि आज हमें अपने कर्तव्यों से दूर हो, जीवन निर्वहन के सुगम रास्ते के लिये धरना प्रदर्शन कर, अपना दुख और पीढ़ा व्यक्त करना पड़ रही है वह भी अपने ही शासन और सरकारों के सामने। दुख की बात तो यह है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जहां जनता के प्रति सरकारें, सेवक सहित सभी लोकतांत्रिक संस्थायें जबावदेह होती है। मगर आज उसी जनता को सरकारों की आदर्श नीतियों के आभाव में अन्याय और पीढ़ा झेलना पड़ रही है तथा मौजूद सेवायें अराजकता की ओर अग्रसर। 

उन्होंने कहा कि अगर सरकार की नीतियां प्रभावी स्पर्शी परिणाम मूलक और जनकल्याणकारी हो, तो कोई कारण नहीं, जो सेवकों को धरना प्रदर्शन जैसे रास्तों पर चल अपना दुख, दर्द व्यक्त करना पड़े। कारण साफ है कि न तो राजधर्म का ही पालन हो पा रहा और न ही पूर्ण निष्ठा के साथ कर्तव्य निर्वहन हो पा रहा है। क्योंकि शासन और सरकार की नीतियां, सेवा या रोजगार के क्षेत्र में आदर्श नहीं। 

उन्होंने प्रति प्रश्र करते हुये कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, विकास के क्षेत्र में अनुभवी लोगों से बेहतर सेवायें किसी और की नहीं हो सकती। क्योंकि कई वर्षो तक संविदा आधार पर अपनी सेवायें देेने वालों के पास उन सेवाओं का अनुभव तो होता ही है साथ ही वह जमीनी सच्चाई से भी वाकिब होते है।

अगर शासन की नीतियां सेवा के क्षेत्र में आदर्श, प्रभावी परिणाम मूलक होती, तो आये दिन होने वाली हड़ताल, धरना प्रदर्शन से आम जनता को दो-चार नहीं होना पड़ता। इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है कि अपनी पीढ़ा व्यक्त करने जो लेाग धरना प्रदर्शन करते है उनसे कई दिनों तक कोई जबावदेह व्यक्ति उनकी पीढ़ा तक पूछने तक नहीं आता। जबकि  यह भी किसी न किसी सेवा से जुड़े लोगों का कर्तव्य और उत्तरदायित्व होता है। इसी से यह अन्दाजा लगाया जा सकता है कि हमारी सरकारें शासन कितने संवेदनशील और जबावदेह है। अगर वाक्य में ही सरकारें सेवा के क्षेत्र में एक बेहतर आदर्श प्रस्तुत करना चाहती है तो उन्हें आदर्श नीतियों का निर्माण कर, गुणवत्ता पूर्ण सेवा देने प्रशिक्षित अनुभवी सेवकों की आवश्यकता होगी। जो उसे संविदा कर्मियों के रुप में काम करने वाले सेवकों से प्राप्त हो सकती है।

आज जब समुचे समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास को लेकर कोहराम मचा है। और दूरांचल क्षेत्र गांव, नगर, कस्बा छोड़ जिला मु यालय सहित महानगरों तक में सहज सस्ती प्रमाणिक गुणवत्ता पूर्ण सेवाओं का आभाव है। ऐसे में लगभग 19 हजार के  करीब स्वास्थ्य, सेवा से वर्षो से जुड़े, सेवकों के दर्द और दुख से किसी भी सरकार और शासन का अनभिज्ञ रह, अंहकारी व्यवहार न्यायोचित नहीं। 

बेहतर हो कि सरकार और शासन को ऐसी नीतियों का निर्माण करना चाहिए जिससे सरकार को अच्छे सेवक प्रशिक्षु बतौर और कुछ वर्ष के व्यवहारिक अनुभव के बाद गुणवत्ता पूर्ण अच्छे सेवक मिल सके। जिससे आम नागरिक को गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवायें मिल सके। तो वहीं सरकार को अच्छे सेवक तथा सेवकों को रोजगार की सुरक्षा। तभी इस तरह के अन्याय, अराजकता पूर्ण माहौल से मुक्ति मिल सकेगी और यह तभी संभव है जब सरकारें, शासन व सेवक संवेदनशील बन, जनता की सेवा में अपनी पूर्ण निष्ठा के साथ कत्र्तव्य निर्वहन कर सके। यहीं सेवकों का कर्म होना चाहिए और शासन का राजधर्म। क्योंकि किसी भी लोकतंत्र में सरकारें आदर्श तो सेवक सरकारों के प्रतिबिंब होते है।इस मौके पर स्वराज संयोजक वीरेन्द्र भुल्ले के अलावा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी उपस्थित थे। अपने उदबोधन पश्चात नीतिगत समर्थन की घोषण कर, स्वराज संयोजक ने संविदा कर्मियों के साथ हो रहे अन्याय पर अपनी सहमति व्यक्त कर, सहयोग का आश्वासन दिया।
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