जातियों के सहारे जीत का जुनून घातक

वीरेन्द्र भुल्ले, विलेज टाइम्स समाचार सेवा: जिस तरह से साम, नाम, दण्ड, भेद तथा जातियों के सहारे जीत का जुनून कोलारस उपचुुनाव में देखने मिल रहा है जैसी कि आम चर्चा है। और अपुष्ट सूत्रों की माने तो इस उपचुनाव में जिस तरह से लोकतंत्र की भ्रूण हत्या देखने पर आम मतदाता मजबूर है उसे देख, सुनकर तो यही कहा जा सकता है। कि अब सत्ता का सपना गांव, गरीब, किसान से कोसो दूर होता जा रहा है जिस तरह की चर्चा इस विधानसभा उपचुनाव में प्रत्याशी के लिये 28 लाख तक के खर्चे की है। ऐसे में क्या मुफलिसी में जीवन जीने वालो के लिये लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता की दहलीज तक पहुंच पाना क्या अति संयोक्ति पूर्ण नहीं। 

देखा जाये तो जिस तरह से देश के दो प्रमुख राजनैतिक दल देश के करोड़ों बेरोजगार हाथों के दर्द को दरकिनार कर, देश के सर्वोच्च सदन से लेकर सडक़ तक रोजगार के नाम चाय, पकौड़े की चर्चा कर, इस महान देश ही नहीं, इस देश के महान नागरिकों की आशा-आकांक्षाओं का मखौल उड़ाने में लगे है। ठीक उसी प्रकार कोलारस उपचुनाव में जिस तरह से अपने-अपने प्रत्याशियों के नामांकन के वक्त धन व जन बल के सहारे आम गांव, गरीब, किसान का मखौल सेकड़ों वाहन, हजारों की भीड़ और हेलिकॉप्टर का भ्रमण से उड़ाया गया वह इस बात के स्पष्ट संकेत है। कि ऐसे में देश ही नहीं, देश का लोकतंत्र भी अब दिशा बदल रहा है।  

इसके परिणाम फिलहाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिये जो भी हो, मगर कोलारस उपचुनाव में जीत के जुनून ने जिस तरह से जातियों पर दांव लगाया है उसे देख सुनकर तो यही कहा जा सकता है कि आज सेवा से इतर सत्ता इतनी अहम हो चुकी है। जहां सत्ताधारी दल को जातिये के गणित जीत के लिये बैठाने मंत्री मण्डल तक का विस्तार करना पड़ा। तो वहीं विपक्षी दल को भी दवे पांव कोलारस विधानसभा क्षेत्र में बहुसंख्यक रुप में मौजूद विभिन्न जातियों को लुभाने अघोषित तौर पर कई नेताओं को जातिये समीकरण के आधार पर उतारना पड़ा है। 
अपुष्ट सूत्रों की माने तो जिस तरह से सत्ताधारी दल ने स्वयं मुख्य मंत्री सहित जिले के प्रभारी मंत्री रुस्तम सिंह, गृह परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह, राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, जनस पर्क सिंचाई मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा और अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लालसिंह आर्य सहित नवीन मंत्री मण्डल विस्तार में नारायण सिंह कुशवाह, जालिम सिंह पटेल और कुसुम यादव को सक्रिय कर, जो गणित बैठाला है। इसके अलावा प्रभावी रुप से और कोलारस क्षेत्र में खासा प्रभाव रखने वाली खेल मंत्री श्रीमंत यसोधरा राजे को मैदान में उतारा है उससे साफ जाहिर है कि धाकड़, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, यादव, गुर्जर, दांगी, ब्राह ण, कुशवाह, लोधी, वैश्य इत्यादि थोकबंद वोट बैंक को कबाडऩे की जो जुगत लगाई है वह आम मतदाता से छिपी नहीं। 

ऐसा ही कुछ विपक्षी दल कॉग्रेस ने दवे पांव अपना हिसाब जमा रखा है। मगर आम मतदाता के सामने वर्तमान परिपेक्ष में यक्ष सवाल यह है कि आखिर वह अपना मत किसे और क्यों दे। इसके लिये प्रबुद्धजनों का एक वर्ग खासकर स्वराज से जुड़े लोगों का कहना है कि मतदान तो हर नागरिक को लोकतंत्र के पर्व पर अवश्य करना चाहिए। क्योंकि यह नागरिकों का कत्र्तव्य है। मगर मत देने से पूर्व वोट मांगने वालो से तीन सवाल अवश्य करना चाहिए कि जिस पार्टी या प्रत्याशी के लिये वोट मांगा जा रहा है या देने के लिये कहा जा रहा है उसकी विकास व जनकल्याण के लिये उसके पास योजना क्या है और उसकी शैक्षणिक, पारिवारिक, सामाजिक, गांव, नगर, जिला, प्रदेश, देश में सेवा, जनकल्याण के क्षेत्र में क्या योग्यता है और उसका स्वयं, परिवार, समाज, जनसेवा, राष्ट्र सेवा या अन्य सेवा के क्षेत्र में अभी तक चुनाव लडऩे से पूर्व क्या उल्लेखनीय योगदान रहा है। 

अगर यहां तीन सवाल आम मतदाता वोट डालने से पूर्व प्रत्याशी से कर सका, तो निश्चित ही एक अच्छा और सच्चा जनप्रतिनिधि चुनने में कोलारस क्षेत्र की जनता को सफलता हासिल होगी और कोलारस क्षेत्र की आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति भी हो सकेगी।  

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