वोट से पहले तीन सवाल, योजना, योग्यता और योगदान, न जाति, समाज, वादे, बहलावे पर, बटन दबे परिणामों पर

विलेज टाइम्स समाचार सेवा: यूं तो चुनावों के दौरान मतदान करना हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य ही नहीं, उसका अपना संवैधानिक अधिकार भी है। इसीलिये हर नागरिक को मतदान कर लोकतंत्र को मजबूत बनाने, लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक, कर्तव्य और उत्तरदायित्व भी है। जिससे आम नागरिक अपने पसंद का जनप्रतिनिधि चुन निर्वाचन प्रक्रिया को सफल बना, अपने नैसर्गिक, प्रकृति प्रदत्त एवं संवैधानिक अधिकारों को सुरक्षित कर अपनी आशा-आकांक्षा पूर्ति का अपने जनप्रतिनिधि के माध्यम से मार्ग प्रस्त कर सके। जिससे वह अपना ही नहीं, अपनी आने वाली पीढ़ी का भविष्य भी उज्जवल और समस्या मुक्त और संसाधन युक्त बना सके। इसीलिये हर नागरिक को हर हाल में मतदान अवश्य कर अपने-अपने कर्तव्यों उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। 

मगर आज जिस तरह से आम मतदाताओंं को वादे, आश्वासन, जातिगत आधार या अन्य प्रलोभन, संस्कारिक या सामाजिक भावना, पर परा, पहचान, नाते, रिश्तेदारों के सहारे राजनैतिक दल या नेता वोट हथियाने की तैयारी में पूरे लावो लश्कर के साथ जुटते है और वोट डलते ही पीछे मुडक़र नहीं देखते है, ऐसे लोगों से हर मतदाता को सावधान रहने की जरुरत है। क्योंकि आज की राजनीति में साधन, संसाधन संपन्न ये दल या फिर नेता अपनी जीत सुनिश्चित करने हर प्रकार का हथकंण्डा अपनाते है। जिसकी कल्पना मात्र करना भी दूर की कोणी है। घर के मुखिया से लेकर नाते-रिश्तेदार, पहचान या प्रभावशाली लोगों से लेकर जाति समाजों के स मेलन, इतना ही नहीं, अपनी जीत सुनिश्चित करने विभिन्न समाजों के नेताओं का जमावड़ा, उनके स मेलन एवं जनधन का प्रदर्शन करने बड़ी-बड़ी रैलियां, झूठे आश्वासन, कान फोडू प्रचार और भावनात्मक भडक़ाऊ भाषण तक देने से नहीं हिचकते है। 

अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो पैसा, शराब या अन्य साम्रगियों का वितरण सहित प्रभावशाली लोगों के माध्यम से भी आम भोले-भाले मतदाता को प्रभावित करने से नहीं चूकते। मगर हर मतदान के बाद जीत-हार होती है उसके बाद फिर न तो वह नाते-रिश्तेदार, जाति, समाज के लोग आड़े वक्त ढूंढे मिलते है, न ही वह वोट मांगने और हारने-जीतने वाले। 

अगर वोट देने से पहले वोट मांगने या दिलवाने वालो से तीन सवाल कर वोट दिया जाये तो अवश्य ही आम मतदाता अपने बहुमूल्य वोट के माध्यम से अच्छा और सच्चा जनप्रतिनिधि चुन सकते है। जो लोगों की आशा-आकांक्षाओं पर खरा भी उतरे और आम जन सहित क्षेत्र का विश्वास कर लोगों की सेवा भी कर सके। 

पहला सवाल योजना को लेकर हो कि आमजन के विकास व जनकल्याण के लिये उसके या उसके दल के पास क्या योजना है। दूसरा सवाल कि अभी तक के जीवन काल में या दल के कार्यकाल में चुनाव लडऩे से पूर्व संगठन, स्वयं, परिवार, समाज या सार्वजनिक जीवन में उसका क्या उल्लेखनीय योगदान सार्वजनिक जीवन में या स्वयं के कर्तव्य निर्वहन के दौरान रहा है। तीसरा सवाल कि जिस पद के लिये वोट मांगा जा रहा है उस पद के अनुसार उसकी शैक्षणिक, परिवारिक, सामाजिक, सार्वजनिक योग्यता क्या है। हो सकता है कि इन तीन सवालों के उत्तर में आपको अपनी आशा-आकांक्षाओं के अनुरुप योग्य प्रत्याशी अवश्य मिल जाये, जो लेाकतंत्र को मजबूत ही नहीं, आपकी आशा-आकांक्षा पूर्ति करने की कोशिश अवश्य कर सकेगा। क्योंकि वोट मांगने वालो का परिक्षण भी आपको करना है और उसके माध्यम से विकास, जनकल्याण सेवा के परिणाम भी आपको को ही मिलना है इसीलिये मतदान अवश्य करे, मगर कुछ सवालों के साथ, न कि दल, जाति, नाते-रिश्तेदार, प्रभावी लोग, प्रलोभन, वादों के आधार पर। तभी हम और आप अच्छा और सच्चा, सेवक जनप्रतिनिधि चुनने में सफल और सक्षम साबित होगें। 
जय स्वराज 
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