जीत के जुनून में जुटे दल योजना, योग्यता, योगदान से जुड़े सवाल हुए चुनाव से दरकिनार

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। देखा जाये तो कोलारस, मुंगावली उपचुनाव के मतदान की निर्धारित तारीख 24 फरवरी में, अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं। ऐसे में जीत के जुनून में जुटे दलों के बीच से योजना, योग्यता, योगदान जैसे अहम, यक्ष आवश्यक, सवालों का चुनावी चर्चा से बाहर हो जाना, बड़े ही दु:ख और स्वस्थ लोकतंत्र के लिये बड़े ही शर्म की बात है। अब इसे हम हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि चुनाव की बेला पर हर बार की तरह लोगों के जीवन से जुड़े अहम सवाल होने के बजाये वह चुनावी चर्चा से बाहर है। या यो कहे कि हम यह चर्चा चुनावों के दौरान सक्षम लोगों से करने में अभी तक अक्षम और असफल साबित हुए है। हम नहीं पूछ सके उन राजनैतिक दलों एवं उन प्रत्याशियों से जो जीत के लिए समुचे मुंगावली कोलारस विधानसभा क्षेत्र के गांव, गलियों में वोट मांगते मय दल, बल झुंण्ड के रुप में घूम रहे है।

हम उन लोगों को न तो अपना दु:ख दिखा सके, न ही अपनी पीड़ा बता सके। देखा जाये तो हम पीडि़त, वंचित, गांव, गली के लोग उन वोट मांगने वाले दल, प्रत्याशीयों और उन नेता, कार्यकर्ताओं की टोलियों को जो पोलिंग बूथों तक पहुंच विगत 3 माह से हमें यह बताने, समझाने में जुटे हैं कि हम गांव, गली के गरीब किसानों, पीडि़त वंचित किसकों वोट दें, किसको न देंं। हम नही बता सके, न ही सुना सके उन सक्षम, सफल लोगों को जो हमारे बेहतर भविष्य के लिये संघर्षरत रहने और हमारे लिये कुछ करगुजरने का दावा करते है।

देखा जाये तो भीषण गर्मी आने को है और कुएं, तालाब, नदी, नाले सूखे पड़े है हमारे जीवोत्पार्जन के साधन हमारे खेत, पशुधन और लोग शुद्ध पेयजल के लिए अभी संघर्ष कर, किलोमीटरों का सफर कर रहे है। भीषण गर्मी के दौरान न तो खेतों में कुछ बचता है, न ही सहज ढंग से पशु-पक्षी पशुधन को पेयजल उपलब्ध रहता है। जिसके आभाव में हमारे पशु-पक्षी हर वर्ष बड़ी तादाद मेंं तड़प-तड़प कर मरते हैं। हम नही बता व सुना सके उन वोट मांगने वाले दल, नेता, प्रत्याशियों को कि रोजगार के नाम हमारे सामने पलायन और संसाधनों के नाम हमारे पास, हमारे खाली हाथ और आभाव ग्रस्त जीवन है, जिन्हें संरक्षण, स वर्धन की स त जरुरत है।  

हम नहीं बता सके कि हमें और हमारे नौनिहालों को भी अच्छी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवायें चाहिए जिससे हमारे बच्चे स्वस्थ और शिक्षित बन अपने गांव, गली, राष्ट्र निर्माण में अपना अहम योगदान दें, अपनी राष्ट्र के प्रति सेवा सुनिश्चित कर सके । आखिर 3 माह से जीत के जुनून में जुटे वह दल प्रत्याशियों ने भी हमें यह बताने की कोशिश आखिर क्यों नहीं की। जो कि उनका कर्तव्य भी है और उत्तरदायित्व भी। कि कोलारस, मुंगावली विधानसभा क्षेत्र की अहम समस्यायें पेयजल, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य के निदान के लिये आखिर उनके पास 5 माह की क्या कार्य योजना है। जिससे इन अहम समस्याओं का निदान हो सके। आखिर वोट मांगने या चुनाव लडऩे वालों की सामाजिक, सार्वजनिक क्षेत्र सहित शैक्षणिक योग्यता क्या है और अभी तक के जीवन काल में परिवारिक, सामाजिक, सार्वजनिक क्षेत्र में उनका क्या योगदान रहा है। 

बहरहाल 24 को मतदान भी होगा और 28 को परिणाम भी आयेंगे मगर 28 के बाद न तो टोलियों में फैले नेता गांव, गली में नजर आयेंगे न ही अहम मुद्दों को दरकिनार कर आरोप, प्रत्यारोप का शोर तेज कर अपना मंसूबा पूरा करने वाले वह लोग जो बड़े-बड़े वादे, आश्वासन देने में नहीं हिचक रहे। देखा जाये तो जैसी कि समुचे क्षेत्र में चर्चा है। कि इस उपचुनाव को लेकर, अगर 28 के बाद गांव, गली में कुछ शेष दिखेगा तो रोजमर्रा की समस्यायें बेरोजगारी, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य जैस संकट जिनसे संघर्ष अब हमारी मानो, इस महान लोकतंत्र में नीत और नियत बन चुकी है। मगर अभी भी वक्त है अगर हम वोट मांगने वालों से कार्य योजना, योग्यता, योगदान के बारे में वोट देने से पहले पूछ सके और अच्छे-सच्चे प्रत्याशी को चुनने के लिये सोच समझकर मतदान कर सके, तो जो हमारा लोकतंत्र और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अधिकार व कर्तव्य भी है। उसके निर्वहन में हमारी यह बड़ी सफलता भी होगी और सक्षमता भी, जो हमारा ही नहीं, हमारी आने वाली नस्ल के लिये इस महान लोकतंत्र में स्वस्थ संदेश होगा।  जय स्वराज

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