मतदान से पूर्व हों कुछ अहम सवाल, योजना, योग्यता और योगदान

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। व्ही.एस.भुल्ले: कहते है कर्तव्य विमुख प्रियजन, सज्जन, विद्धवान, सहोदर न तो कभी स्वयं, परिवार, समाज, क्षेत्र, गांव, गली, नगर, कस्बों सहित राष्ट्र का भला कर पाते, न ही वह उन जबावदेही, उत्तरदायित्वों का निर्वहन कर पाते जिसके लिये उन्हें बतौर मानव के रुप में जाना जाता है। और वह समृद्ध, खुशहाल जीवन से वंचित हो, अपने प्रियजन, बन्धु, बाध्वों का भी जीवन समृद्ध, खुशहाल नहीं बना पाते। लोकतंत्र के मंथन के वक्त जब एक अच्छे-सच्चे जनप्रतिनिधि के रुप में अमृत हासिल कर, गांव, गली, गरीब, नगर, कस्बे को समृद्ध, खुशहाल बनाया जा सकता है। 


ऐसे में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी से योजना, योग्यता, योगदान जैसे अहम सवालो को दरकिनार कर कौन, आया, कौन गया किसने क्या कहा, कौन जीतेगा, कौन हारेगा, किसका भविष्य बनेगा, किसका बिगड़ेगा कि चर्चा चुनावों के दौरान, स्वस्थ लोकतंत्र, जनतंत्र के लिये शर्मनाक भी है और दर्दनाक भी। प्राकृतिक आपदा या छवि चमकाने के लिये तिल का ताड़ बनाने वाले आज जब जबावदेही तय करने का वक्त है तब अपने उत्तरदायित्व जबावदेही कत्र्तव्य निर्वहन पर आखिर क्यों चुप है। 

लोकतंत्र का दुर्भाग्य कहे या सौभाग्य कि जो समझ सकते है या बोल सकते है वह वोट देने से पूर्व स्वयं के जीवन की समृद्धि, खुशहाली के सवालों पर चर्चा करने के बजाये गांव, गली के प्रभावशाली, नाते-रिश्तेदारों की बातों, भाषणों में मस्त है। यहीं कारण है कि हम मतदाता के पास अपना जनप्रतिनिधि सरकार अपने वोट के माध्यम से चुनने के संवैधानिक अधिकार होने के बावजूद भी वोट देने के बाद पीडि़त, वंचितों की तरह उसी गली, गांव में भटकने मजबूर होना पड़ता है।    

वहीं वोट मांगने वालो की खुशहाली, समृद्धि में तो इजाफा होता है मगर गांव, गली, गरीब, किसान का कारवां संघर्षरत रह पीडि़त, वंचित बना रहता है। आजादी के 70 वर्ष का इतिहास गवाह है। इन 70 वर्षो में खूब वोट देने वालो ने बगैर सवाल किये, इसके, उसके कहने पर या अपनी समझ अनुसार वोट दिये और वोट लेने वालों ने वोट लिये, जो बुजुर्ग हमारे बीच रहे वह आभावों में ही चल बसे जो बच्चे थे वह युवा हो चले फिर भी मायूसी, गरीबी, बैवसी बैहाली क्यों? यह सवाल चुनावों के दौरान अवश्य होना चाहिए। जो जल हमें कुआं, तालाब, पोखर, नदियों में सहज उपलब्ध था आज उससे हम मेहरुम क्यों? 

क्यों सेकड़ों फीट गहराई तक कुंआ, तालाब, पोखर, नदियों का पानी पहुंच रहा है। जिसके चलते हजारों सेकड़ों पशु-पक्षी हर वर्ष मरते है। कहीं हर वर्ष की प्राकृतिक आपदायें, बैमोसम बारिश, ओलावृष्टि उन सेकड़ों हजारों बेजुबान जीव-जन्तुओं पशु-पक्षियों का श्राफ तो नहीं, जो भीषण गर्मी के दौरान चारा, पानी के अभाव में बगैर किसी शिकायत के दम तोड़ जाते है। चूंकि मौका चुनाव का है इसीलिये वोट देने से पूर्व वोट मांगने वालो से यह सवाल अवश्य जरुर निर्भीक होकर करना चाहिए फिर जो अच्छा-सच्चा, सक्षम प्रत्याशी लगे उसे वोट दे अपना जनप्रतिनिधि चुनना चाहिए सबसे अहम सवाल सर्वप्रथम वोट मांगने वालो से यह होना चाहिए कि आपके पास  समृद्ध खुशहाल जीवन के लिये आपके पास क्या कार्य योजना है और उसे वह कैसे पूरा करेगें। दूसरा प्रत्याशी की शैक्षणिक, सार्वजनिक योग्यता क्या है। तीसरा प्रत्याशी का स्वयं सामाजिक, सार्वजनिक जीवन या किसी भी क्षेत्र में क्या उल्लेखनीय योगदान आज तक रहा है।

अगर हमारे महान मतदाता हमारे प्रियजन, सज्जन, विद्ववान इतना स्वयं, परिवार, समाज, गांव, गली, गरीब, नगर, राष्ट्र के लिये कर पाते है तो यह हमारे मजबूत स्वस्थ लोकतंत्र सहित समृद्ध, खुशहाल जीवन में सबसे बड़ी सफलता होगी और यह तभी संभव है जब हम पूरी जबावदेही और सोच विचार के साथ चुनावी चर्चाओं से इतर अधिक से अधिक मतदान सवालों के साथ करें। 
जय स्वराज 
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