जीत के लिये जातिगत जमावड़ा

शिवपुरी विलेज टाइम्स समाचार सेवा: अब इसे लगभग 8 माह के लिये चुने जाने वाले विधायक के लिये हो रहे उपचुनाव को गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचित लोग इसे अपना सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि वोट मांगने वाले नेता या दल आम मतदाता को वोट मांगने से पूर्व विधायक बनने तैयार, प्रत्याशी की 9 माह की विकास, जनकल्याण, रोजगार, पेयजल, स्वास्थ, चिकित्सा जैसी अहम नैसर्गिक आवश्यकताओंं की न तो कार्य योजना बता रहे है, न ही उनकी योग्यता जो उन्होंने शैक्षणिक, सामाजिक या विकास के तौर पर हासिल की हो। न ही वह अपने जीवन का वह बहुमूल्य योगदान जो उन्होंने जन, राष्ट्र, क्षेत्र, गांव, समाज, परिवार सेवा मेंं किया हो। बता रहे है जैसी कि चर्चा समुचे कोलारस क्षेत्र में चल रही है। जबकि आम जनता, योजना, योग्यता और योगदान पर अब अनौपचारिक सवाल खड़े कर रही है। 

अगर अपुष्ट सूत्र और जनचर्चाओं की माने तो कोलारस उपचुनाव में अपने-अपने प्रत्याशियों को विजयी बनाने कॉग्रेस, भाजपा जैसे दल भी इस अहम सवाल को भूल और गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचितों की भावना को दरिकनार कर,  जातिगत आंकड़े और जमावड़े के बीच भावनात्मक शोषण, जनसंपर्क, जनसंवाद, सभायें, नुक्कड़ सभाओं और लंबे-चौड़े आश्वासन तथा पूर्व कार्यो का बखान कर, कोहराम मचा, आम मतदाता का ध्यान अहम समस्याओंं से दूर कर वोट कबाड़ अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने में जुटे है। जो कि स्वस्थ लोकतंत्र ही नहीं, गांव, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचितों के लिये दर्दनाक भी है और स्वस्थ लोकतंत्र के लिये शर्मनाक भी। फिर वह वोट दलीय प्रत्याशियों के पक्ष में मांगे जाये या फिर निर्दलीयों के पक्ष में, यह स्वस्थ लोकतंत्र में आम मतदाता के साथ धोखा ही नहीं, अन्याय भी है। जिस तरह की चर्चा औपचारिक-अनौपचारिक तौर पर इस उपचुनाव में देखने सुनने मिल रही है उससे न तो गांव, गली, गरीब, किसान, पीडि़त, वंचित का भला होने वाला है न ही इस क्षेत्र का।  

चूंकि उपचुनाव है और लगभग 8 माह के लिये किसी न किसी प्रत्याशी को तो बहुमत के आधार पर चुना ही जाना है। इसीलिये दलों को जन भावना अनुरुप दिल और दिमाक से इतर कोलारस क्षेत्र के पीडि़त, वंचित आम नागरिक, गांव, गली, किसानों के दर्द के बारे में सोचना चाहिए। उनकी पीड़ा का समाधान कैसे हो, चुनाव के दौरान इस दिशा में चर्चा शुरु होना चाहिए। तथा आम मतदाता को मत देने से पूर्व यह भी सोचना चाहिए कि उनके दर्द, पीड़ा समाधान में कौन सफल, सक्षम, सच्चा सार्थी साबित हो सकता है। साथ ही क्षेत्र के विकास, जनकल्याण सेवा की कार्य योजना उसकी शैक्षणिक या सामाजिक योग्यता और परिवार, समाज, क्षेत्र, गांव, कस्बा विकास में उसका क्या योगदान रहा है इस पर भी ध्यान देना चाहिए जिससे एक सच्चा और अच्छा जनप्रतिनिधि चुना जा सके।  

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