कड़ी मेहनत पर हावी होती महत्वकांक्षायें, दलों में मचे दल-दल में कहीं दम न तोड़ जाये आशा-आकांक्षायें

विलेज टाइम्स समाचार सेवा, म.प्र. शिवपुरी- कोलारस में आसन्न उपचुनाव के चलते टिकट की महत्वकांक्षा पाले टिकट के दावेदार ही नहीं, अब तो सामाजिक तौर पर भी विभिन्न समाजों में प्रतिनिधित्व को लेकर आवाजे बुंलद होने लगी है। अगर यो कहे कि व्यक्तिगत निष्ठाओं से लेकर राजनैतिक निष्ठायें भी, अगर कोलारस क्षेत्र में चुनाव के दौरान दरकती दिखाई दे, तो कोई अति श्योक्ति न होगी। वर्तमान हालातों के मद्देनजर जिस तरह से महत्वकांक्षाओं के चलते तूफान आने से पहले की शान्ति दलों के भीतर दिखाई दे रही है वह बहुत कुछ बयां करती है। देखा जाये तो सबसे बड़ा सरदर्द टिकट को लेकर जितना कॉग्रेस के अन्दर नहीं, उससे कहीं ज्यादा कमल दल में दिखाई देता है। जहां कॉग्रेस के अन्दर अपने नेता की मंशा को लेकर जिस तरह का अनुशासात्मक सनाका खिचा है। वहीं अनुशासित केडर वैश पार्टी में भी भारी अनुशासन का इन्तजाम संगठन ने कर रखा है। 

मगर घोषित अघोषित तौर पर जिस तरह की सक्रियता टिकट पाने वालो की संगठन के अन्दर देखी जा रही है और विभिन्न समाजों में स्वयं के समाज के किसी व्यक्ति को मौका दिये जाने की आवाजे अपुष्ट तौर से बुंलद की जा रही है उसका परिणाम हालिया तौर पर एक समाज विशेष के सम्मेलन में जिसका दावा है कि कोलारस विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक वोट उन्हीं के समाज के है। को समझाईस देने उक्त समाज के राष्ट्रीय नेता से लेकर कई विधायक और समाज के नेता जुटे, जहां मुख्य अतिथि बतौर पधारे मुख्यमंत्री, पुत्र को समाज के लिये कहना पड़ा कि संगठन ने यूं तो हमारे समाज को समुचे प्रदेश का नेतृत्व करने का मौका दिया है। और हमारे समुचे समाज को ही टिकट मिला है। इसीलिये समुचे समाज की जबावदेही है कि हम सभी मिलकर कोलारस से भाजपा को भारी मतो से विजयी बनाये।

ज्ञात हो कि इससे पूर्व शिव साधना फैन्स क्लब के बबलू धाकड़ से लेकर अब तक डॉ. सलोनी सिंह, सरला, मुकेश इत्यादि के नामों की चर्चा बनी रही है। इसके अलावा अनुसूचित जनजाति से महेश आदिवासी एवं रज्जो आदिवासी तथा अनुसूचित जाति से नरेन्द्र कुमार आर्य, राजकुमार खटीक, रामकली चौधरी के अलावा यादव समाज के कल्याण सिंह यादव, धनपाल सिंह यादव, युवा टीम में पार्टी के लिये बेहतर प्रदर्शन करने वालों में विपिन खेमेरिया, गोलू व्यास, प्रमेन्द्र सोनू बिरथरे, मुकेश सिंह चौहान, अजीत जैन छोटा, जितेन्द्र जैन गोटू है। वहीं पूर्व विधायकों में पार्टी के विभिन्न कार्यो को मूर्तरुप देने में लगे नरेन्द्र बिरथरे, देवेन्द्र जैन, ओमप्रकाश खटीक, वीरेन्द्र रघुवंशी भी पार्टी जिताने के लिये दिन-रात एक किये हुये है। इनमे से कुछ तन, मन, धन से पार्टी की सेवा में लगे है तो कुछ पार्टी की जीत सुनिश्चित करने अहम जबावदेही निभाने में लगे है। तो वहीं प्रदेश कार्यकार्यणी सदस्य व मीडिया पैनेलिस्ट धैर्यवर्धन शर्मा और सुरेन्द्र शर्मा जिनके आग्रह पर मुख्यमंत्री द्वारा 54 करोड़ के विकास कार्यो की स्वीकृति कोलारस क्षेत्र में की है। अगर यो कहे कि पार्टी को जिताने सभी फिलहाल एक जुट होकर लगे है। 

मगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो कोलारस विधानसभा क्षेत्र में 9 हजार से अधिक वोटों का दखल रखने वाला गुर्जर समाज इस बात को लेकर नाखुश है कि जहां राजनैतिक दल विभिन्न समाजों की बैठके करने में जुटे है। वहीं गुर्जर समाज को इकनौर किया जा रहा है। अगर चुनावों के दौरान भी इसी तरह का व्यवहार गुर्जर समाज के साथ दलों का रहा, तो गुर्जर समाज को भी समाज हित में फैसला लेना पड़ सकता है। उनका मानना है कि 9 हजार से अधिक का वोट बैंक उन 30 हजार वोट वाले समाज पर अपना व्यवहारिक प्रभाव रखते है। क्योंकि वह जंगल में मिल-जुलकर प्रेम पूर्वक अपना-अपना जीवन निर्वहन करते रहे है। 

देखना होगा फिलहाल कोलारस की दावेदारी के लिये दबे पांव आम आदमी पार्टी भी गांव-गांव में अपनी पैठ बनाने में लगी है। जिसमें विधानसभा प्रभारी का दावा है कि वह जल्द ही उनकी ग्रामीण यात्रा के साथ ही वह बदरवास, खतौरा, रन्नौद, पचावली, कोलारस होते हुये खरई, तेन्दुआ से लुकवासा तक एक बड़ी रैली का आयोजन करने जा रही है। रहा सवाल प्रत्याशी लडऩे लड़ाने का तो इसका निर्णय पार्टी से मिले निर्देशों के आधार पर समय परिस्थिति अनुसार किया जायेगा।

ऐसी स्थिति में दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा और कॉग्रेस इस चुनाव को किस रणनीति के सहारे आशा-आकांक्षाओं को पूरा करते हुये महत्वकांक्षाओं को काबू करने में कामयाब होगें देखने वाली बात होगी। जबकि जीत-हार और दावेदारों की बढ़ती लिस्ट और अन्य दलों के मंसूबे भी दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दलों के सामने है।
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