वोट नीत से आहत सिन्ध और विभिन्न समाज, ले सकते है, अहम फैसला, सियासत पर भारी स्वाभिमान

वीरेन्द्र भुल्ले, विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. शिवपुरी- जिस तरह से कोलारस के आसन्न उपचुनावों को लेकर राजनैतिक दलों और नेताओं के बीच श्रेय लूट सीट हथियाने की जुबानी जंग छिड़ी है। उसे देख सिन्ध किनारे रहने वाला स्वाभिमान समाज अगर कोई अहम फैसला लेता है तो कोई अति संयोक्ति न होगी। वर्तमान हालातों के मद्देनजर कहीं ऐसा न हो, कि कहीं सियासतदारों पर स्वाभिमान भारी न पड़ जाये।

सीट हथियाने के लिये कोलारस विधानस ाा क्षेत्र में मचे सियासी गदर के बीच सबसे अधिक परेशानी सत्ताधारी दल के सामने नजर आ रही जैसी कि आजकल कोलारस क्षेत्र में चर्चा सरगर्म है। क्योंकि विपक्षी दल तो अपने प्रत्याशी को लेकर आश्वस्त है और किसी विवाद के बीच उसके पास उसका ऑप्सन भी है। मगर जिस तरह से विभिन्न समाजों के बीच कोलारस से अपने समाज के किसी व्यक्ति को टिकट को लेकर रस्सा कसी जारी है। वह देखने योग्य है इतना ही नहीं समाज से इतर वो नेता भी पीछे नहीं जो तन, मन, धन से अपनी पर फॉरमेन्स के आधार पर सत्ताधारी दल से टिकट चाहते है। 

जिसमें सर्वाधिक मेहनत और पैसा लगाने वालो में रघुवंश वाले ज्यादा आश्वस्त नजर आ रहे है तो वहीं दूसरी और पूर्व विधानसभा में मिली करारी हार, तो पूर्व में कोलारस से मिली पहली अपनी जीत से कोलारस के प्रबल दावेदार जैन साहब को भी संगठन से संकेत मिलने की बात चल रही है। मगर अनुसूचित कोटे से कई मर्तवा प्रतिनिधित्व कर चुके राष्ट्रीय जी का भी प्रयास है कि उन पर भी विचार हो, वहीं युवाओं में अजीत जैन छोटा, राघवेन्द्र गोलू व्यास, विपिन खेमेरिया, राजकुमार खटीक, रामू बिन्दल, कल्याण सिंह यादव, धनपाल सिंह जैसे कार्यकत्र्ता भी पार्टी के कार्यो में काफी सक्रिय नजर आ रहे है। 
अगर हम विभिन्न समाजों में चल रही चर्चाओं पर गौर करे तो धाकड़ समाज सबसे अधिक पसोपेश में है। जिसमें शिव साधना फैन्स क्लब के बबलू धाकड़ अपना अघोषित दावा बनायें हुये है तो वहीं पूर्व मण्डल अध्यक्ष नरेन्द्र धाकड़ के अलावा सलोनी सिंह एवं सरिता का नाम भी चर्चा में है। तो वहीं अनुसूचित समाज से जहां पूर्व डीएसपी नरेन्द्र सिंह आर्य, श्रीमति रामकली चौधरी के भी नाम चर्चा नये लोगों में चर्चा में है। 

जहां तक अनुसूचित जाति का सवाल है तो हालिया चर्चाओं में पूर्व जिला पंचायत सदस्य व वर्तमान अनुसूचित जन जाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष महेश आदिवासी एवं सामाजिक कार्यकत्र्ता जिसने समुचे कोलारस, बदरवास में शराब छोडऩे शिक्षित बनने अभियान में बढ़ चढक़र समाज बदलने में योगदान दिया उस आदिवासी महिला रज्जो आदिवासी के नाम पर भी आदिवासी समाज नजर गढ़ायेे हुये है जिसकी चर्चा भी बड़े जोरो से है। 

रहा सवाल ब्राह्मणों का तो पूर्व विधायक नरेन्द्र बिरथरे, धैर्यवर्धन शर्मा स्वयं अपनी दावेदारी खारिज करते है। तो वहीं इन प्रभावी नामों के अलावा सुरेन्द्र शर्मा, प्रमेन्द्र सोनू बिरथरे जो किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष है कि भी कोलारस क्षेत्र में पार्टी आधार पर सक्रियता देखी जा सकती है। मगर सत्ताधारी दल मंच से सीधे तौर पर कमल का ही नाम आगे बढ़ाया जा रहा है। अब इस सियासी घमासान के बीच कोलारस के स्वाभिमानी मतदाताओं की नजर एक ओर सिंधिया तो दूसरी ओर शिवराज पर टिकी है मगर टिकट को लेकर अन्त: फैसला तो फिलहाल संगठनों को ही लेना है। 

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