कोलारस की जनता दलों से यक्ष सवाल, तो दल हार-जीत का पैमाना तय करने में जुटे

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। म.प्र. शिवपुरी। विगत 2 माह की मशक्कत और आदर्श आचरण संहिता सहित 24 फरवरी मतदान का दिन सुनिश्चित हो जाने के पश्चात अपना-अपना भाग्य आजमाने आतुर बैठे, राजनैतिक दल सहित निर्दलीय अपनी-अपनी जीत और प्रतिद्वन्दियों की हार सुनिश्चित करने में जुट गये है। वहीं कोलारस की महान जनता भी इस उपचुनाव में कुछ यक्ष सवालों के साथ अपना बहुमूल्य मत देने का मन बनाने में जुटी है। सफलता किसे हासिल होगी, किसको दल अपना चेहरा सुनिश्चित करेगें, कौन बगावत, तो कौन साथ चलेगा, यह सच सामने आने में अभी कुछ वक्त इतंजार करना पड़ सकता है। 

मगर बगावत के स्वर अन्दर ही अन्दर अभी से बुंलद होने लगे है जैसी कि समुचे कोलारस विधानसभा में चर्चा सरगर्म है। बहरहाल बगावत या बफादारी का खुलासा, तो नामांकन की निर्धारित तिथि और फार्म वापसी की तारीख तय करेगी। मगर 33 सेक्टरों मे बटे इस कोलारस विधानसभा क्षेत्र में 2.45 लाख से अधिक मतदाता तो इस विधानसभा क्षेत्र को 33 सेक्टरों में बांटा गया है, जहां 24 फरवरी को मतदान होगा। 

देखा जाये तो इस चुनाव में प्रमुख राजनैतिक दल, कॉग्रेस, भाजपा के अलावा लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी सहित आम आदमी पार्टी भी अपने प्रत्याशियों पर विचार कर सकती है। कॉग्रेस, भाजपा की खुल्लम खुल्ला तैयारियां के बीच जिस तरह से अन्दर ही अन्दर यह दल अपनी-अपनी तैयारियों में जुटे वह काबिले गौर है। 

अगर सूत्रों की माने तो इन दलों का हल्ला भले ही न हो, मगर थोकबंद वोटों पर इन दलों ने खासी पैठ बना रखी है। वहीं अन्य दल भी अपनी-अपनी प्रष्ठ भूमि तलाश रहे है। मगर सबसे बड़ी जोर आजमाइस तो सत्ताधारी दल भाजपा जो ऐड़ी चोटी का जोर लगा, गांव-गांव की खांक छान रही है। तो वहीं कॉग्र्रेस भी अपने नेता पूर्व मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरफ ताक रही है। अपने पुस्तैनी वोट बैंक और जातिगत प्रभाव वाले क्षेत्रों के सहारे जीत का आंकड़ा बिठा रही है। अपने नेता के भरोसे मजबूत स्थिति में बैठी कॉग्रेस को फिलहाल कोई भ्रम नहीं। वहीं सरकार के मु यमंत्री ही नहीं, सरकार के मंत्री भी श्रंृखलाबद्ध दौरे कर, घोषणाओं, विकास कार्यो की धांके लगा चुके है और जिसमें कई सीधे लाभ वाली योजनाओं का क्रियान्वयन भी करा चुके है। श्रंृखला बद्ध समाजों की मंत्रियों की उपस्थिति में हुई बैठकों का संज्ञान ले तो कोई ऐसा प्रभावी समाज नहीं छोड़ा गया जिनकी बैठके कर उन्हें अपने पक्ष में करने का प्रयास न हुआ हो। वहीं कॉग्रेस भी लीक दर लीक विभिन्न समाजों की बैठक कर चुकी है। 

अब देखना होगा कि उन समाजों व जन मानस पर सत्ताधारी दल और विपक्ष ने क्या प्रभाव छोड़ा है और अपने अमूल्य मत का वह उपयोग किसके पक्ष में करेगें। मगर इस सबके के बीच कोलारस ही नहीं, सिंध, कूनों के किनारे रहने वाली स्वाभिमानी जनता के सामने यक्ष सवाल यह है और उसे अपना बहुमूल्य मत देने पूर्व वोट मांगने वालों से करना भी चाहिए जैसी कि प्रबुद्धजनों में चर्चा है। कि क्या इस क्षेत्र में बेरोजगारी पेयजल, सिंचाई, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा, स्वास्थ की समस्या हल हो गयी क्या भविष्य में हल होने की कोई स भावना है, अगर है तो कब तक। 

क्या व्यवस्था से भ्रष्टाचार खत्म हो गया नहीं तो क्यों? आखिर कब तक भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था का निर्माण हो सकेगा। आखिर कब तक आम गरीब, किसान, पीडि़त, वंचित को वह स मान मिल सकेगा जिसके लिये वह आज भी आशान्वित है। क्या चुनाव में भाग्य आजमाने वाले प्रत्याशी या दल कोलारस की जनता को बतायेगें कि जिसे उन्होंने अपना प्रत्याशी बनाया है। उसका स्वयं परिवार, समाज या क्षेत्र राज्य, राष्ट्र कल्याण में अभी तक क्या योगदान रहा है। उसकी योग्यता क्या है और कोलारस को समृद्ध, खुशहाल बनाने के लिये उसके पास क्या प्रमाणिक, स्पर्शी सर्वमान्य योजना है। 

अगर कोलारस की महान जनता ने इन सवालों को ध्यान में रख मतदान किया तो निश्चित ही वह एक सफल, सक्षम प्रत्याशी चुनने में अवश्य सफल होगी, बरना चुनावों का क्या, चुनाव तो वर्षो से होते चले आ रहे है और आम गरीब, किसान, पीडि़त, वंचित अपना भाग्य कोसते, जो उन्हें न तो नैसर्गिक ही दे सका, न ही उनका भविष्य समृद्ध खुशहाल बना सका।   

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