हार-जीत के इतिहास के बीच सफलता की उम्मीद: हर रोज कोलारस में बनते बिगड़ते समीकरण

विलेज टाइम्स समाचार सेवा | जिस तरह से कोलारस उपचुनाव के मद्देनजर भाजपा ने प्रदेश के मुखिया के नेतृत्व में पूरे लावो लश्कर के साथ पूरी ताकत झौंक रखी है उसके पीछे उसकी स्पष्ट मंशा साफ दिखाई देती है। कि वह कोई भी ऐसी कमी अपनी सुनिश्चित विजय के रास्ते नहीं छोडऩा चाहती जिससे उसे पूर्व में मिली शिवपुरी उपचुनाव में हार की तरह पछताना पड़े। जिसके चलते स्वयं मु यमंत्री जहां तीन मर्तवा कोलारस विधानसभा क्षेत्र में आ चुके है। तो वहीं उनके मंत्री मण्डल के कई सहयोगी सदस्य विधायक, सांसद, नेता निरन्तर दौरे कर, भाजपा की जीत का मार्ग सुनिश्चित करने में लगे है। 

          कोलारस विधानसभा चुनावों के मद्देनजर जिस तरह से सरकार में खजाना खोल रखा है उससे भाजपा सरकार की मंशा साफ है कि वह चुनाव से पूर्व ही यह सुनिश्चित कर लेना चाहती है कि उसके जीत के मार्ग में कोई बाधा न रहे। वहीं शान्त पड़़़ी कॉग्रेस में अन्दर ही अन्दर जनस पर्क के दौर तो चल रहे है। मगर प्रमाणिक परिणामों की दिशा में  बहुत कुछ ज्यादा होता दिखाई नहीं पड़ता है। कारण स्पष्ट है कि जिस तरह टिकट के दावेदारों की लाइन भाजपा में ल बी होती जा रही है उसी तरह कॉग्रेस में भी टिकट मांगने वालो की सं या कुछ कम नहीं। जिसका स्पष्ट प्रभाव समुचे लोकसभा क्षेत्र में देखा जा सकता है। 

            बहरहाल जिस तरह की घेराबंदी आम मतदाता की कोलारस विधानसभा क्षेत्र में कॉग्रेस, भाजपा द्वारा की जा रही है उसे देखकर लगता है कि चुनावी संघर्ष साधारण नहीं असाधारण रहने वाला है। मगर जिस तरह से विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी भाजपा ने आम मतदाता का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है वह काबिले गौर है। अगर वह जनता के ध्यान को वोट में बदलने में नाकामयाब रही जैसी कि स भावना भाजपा रणनीत के तहत दिखाई देती है। तो उसके लिये यह शिवपुरी की तरह आत्मघाती कदम साबित होगा। 

           देखना होगा चुनाव आते-आते किसका पलड़ा भारी और किसका हल्का होगा यह तो आने वाला समय तय करेगा। मगर इतना तो तय है कि अगर कॉग्रेस और भाजपा दोनो ही अपनी रणनीति में सटीक बदलाव नहीं किये। तो किसी को भी जीत का मुगालता पाले हार का मुंह दे ाना पड़ सकता है। 
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