डण्डा चले डटके- शिवराज सिंह, अवैध शराब विक्रेताओं पर बरसे मुख्यमंत्री

वीरेन्द्र भुल्ले, विलेज टाइम्स समाचार सेवा, म.प्र. शिवपुरी- कोलारस विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रन्नौद में विकास यात्रा सह अंत्योदय मेला में शिरकत करने पहुंचे म.प्र. के मुख्यमंत्री ने खचाखच भरे पण्डाल को संबोधित करते हुये व्यथित मुद्रा में कहा कि शराबबंदी होगी। मगर धीरे-धीरे लेकिन शासकीय दुकानों के अलावा अवैध शराब बेचने वालों पर पुलिस का डण्डा डट कर चले। वह यहीं पर नहीं रुके उन्होंने मानव के रुप में मौजूद पैचासिक प्रवृत्ति के लोगों के लिये फांसी की सजा को पर्याप्त बताया। 

उन्होंने कहा कि जो दुष्कर्त्य जैसे जघन्य अपराधों को अन्जाम देते है ऐसे लोगों को समाज में जिन्दा रहने का हक नहीं होना चाहिए उन्होंने अपनी परंपरागत योजनाओं के उल्लेख के साथ सरकार का पूरा फोकस आदिवासी, वनवासियों की ओर करते हुये कहा कि अभी तो सरकार ने कुपोषण के विरुद्ध मुक्कमल लड़ाई लडऩे व हर प्लाट, मकान विहीन व्यक्ति को आवास तथा हर माता-बहिनों को 1000 रुपये पोषण आहार के लिये देने का निर्णय लिया है इतना ही नहीं, सरकार चरण पादुका योजना भी जल्द शुरु कर वन उपज से जीवन निर्वहन करने वालो को वन उपज के मूल्य निर्धारण करेगी। 

मुख्यमंत्री यहीं पर नहीं रुके और उन्होंने आसन्न चुनावों के मद्देनजर सिंचाई, बिजली, शिक्षा व नगर पंचायत बनाने की भी बात कही। इस सम्मेलन को जलसंसाधन मंत्री नरोत्तम मिश्रा, राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता, प्रभारी मंत्री रुस्तम सिंह, विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी संबोधित किया। 

भय, भूख, भ्रष्टाचार पर बोले स मान जनक रोजगार पर चुप ही रहे शिवराज 
शायद शिवपुरी में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस की अब तो नियति-सी बन गयी है कि वक्ता अपनी बात कहने की स्थिति में आ जाते है मगर यक्ष सवालों से पल्ला झाड़ या तो दूर हो जाते है या फिर सवालों से बचकर निकल जाते है, अब आम पत्रकारों की समझ से यह बात परे होती जा रही है। और जैसी कि चर्चा है कि सारा कुछ सत्ताधारी दल या वक्ता सुनियोजित पहले ही अघोषित तौर तय कर लेते है कि सरकार के अहम पदो पर शपथ लेने वाले जबावदेह लोग जनता से जुड़े अहम सवालों से कैसे बच पाये और बड़ी ही साफगोई से कैसे अपनी बात मीडिया के बीच रख पाये। लगता है सत्ताधारी दल अब जनता को वहीं पढ़ाना चाहते है जो सुनियोजित और सत्ताधारी दल के लिये सहज हो। 

बहरहाल ऐसा ही कुछ प्रदेश के मुखिया म.प्र. के मुख्यमंत्री की प्रेस ब्रीफिंग में हुआ जो कि पूर्व निर्धारित नहीं थी और तत्कालिक थी। जो भाषण मुख्यमंत्री ने मंच से दिये, उनकी पुन: व्याख्या पश्चात वह एक-दो सवालों के जबाव अव्यस्थित सवालो के बीच दे, पत्रकारों के बीच से चलते नजर आये। मगर जब स्वयं विलेज टाइम्स संपादक ने मुख्यमंत्री से मनुहार की सर जनता से जुड़े अहम सवाल है आपको जबाव देना चाहिए लोग जानना चाहते है आपने मुख्यमंत्री बनने के साथ ही 12 वर्ष पूर्व कहा था कि आप प्रदेश को भय, भूख, भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनायेगें प्रदेश के नौजवानों को सम्मान जनक रोजगार दिलायेगें आखिर आज सच क्या है? 

इस सवाल के जबाव में म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमने समुची ग्वालियर-चंबल घाटी को डकैत मुक्त कर दिया है और जब भी इक्का-धुक्का डकैत सर उठाते है उनका खात्मा कर दिया जाता है। गरीबों के लिये 1 रुपये किलो नमक, अनाज और भ्रष्टाचार पर हमारी सरकार लगातार सख्त हो कार्यवाही कर रही है। धन्यवाद   

बहरहाल प्रदेश के मुखिया से सवाल जबाव उनके बेमिशाल 12 वर्ष बेहाल हाल प्रदेश तथा दल के प्रति निष्ठा और लोकतांत्रिक आस्था को लेकर भी बात हो सकती थी। जिसने उन्हें 12 वर्ष का मु यमंत्री तो बना दिया मगर वह एक सच्चे जनसेवक या शासक बन सके या नहीं और जिसके चलते समुचा सिस्टम ही अब कॉलप्स कर रहा है, इत्यादि सवाल अधूरे ही छूट गये। 

मुख्यमंत्री जी चाहते और प्रेस प्रबन्धक व्यवस्था बनाते तो इन अहम सवालों पर भी सरकार का पक्ष समुचे प्रदेश के सामने मुख्यमंत्री स्पष्ट कर सकते थे। जिसमें सरकार की एक से एक योजनाओं का जिक्र हो सकता था। साथ सिंधिया के उस संकल्प पर भी बात हो सकती थी जो उन्होंने किसानों पर गोली चलवाने वाली सरकार के उखाड़ फेकने तक माला न पहनने का संकल्प ले रखा है। बहरहाल सरकार की मंशा सरकार जाने प्रबन्धकों की महत्वकांक्षा वहीं पहचाने। मगर प्रदेश और लोकतंत्र का जो ह्रास वर्तमान हालातों में हो रहा है वह काफी शर्मनाक और दर्दनाक है। 
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