गुजरात में राहुल की धुआंधार बैटिंग और सोनिया का सन्यास

विलेज टाइम्स समाचार सेवा: गुजरात चुनाव के परिणाम भले ही जो भी हो, मगर भाजपा की माद में घुस जो धुआंधार बैटिंग राहुल ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान की उसने भाजपा की चूले तक हिला दी। जिससे बिलबिलाई भाजपा पूरे चुनाव में कभी विकास के मुद्दों से इतर धु्रवीकरण राजनीति करती नजर आयी, तो कभी भाजपा के पालनहार कहे जाने वाले मोदी को भुनाती नजर आयी। ये अलग बात है कि जिग्नेश, अल्पेश, हार्दिक की तिगड़ी के सहारे चुनावी समर में कूदी कॉग्रेस को भी यह इल्म नहीं रहा होगा कि राहुल जैसा नेता भी भाजपा की मुफीद पिच गुजरात में जाकर इतनी जबरदस्त बैटिंग कर सकते है। कि राजनैतिक पंण्डितो को भी नये सिरे से राहुल के बारे में सोचना पड़ा। कभी इकतरफा जीत का मंसूबा पाले भाजपा ने भी यह नहीं सोचा होगा कि यह चुनाव उनके लिये राहुल के विरुद्ध इतना कसमाकस पूर्ण माहौल में लडऩा पड़ेगा। 

मगर फिलहाल पहली मर्तबा अपनी सफलतम पारी से अपनी मां सोनिया गांधी को यह विश्वास दिलाने में वह कामयाब रहे कि वह जिन हाथों में कॉग्रेस को सौंप सन्यास का मन बना चुकी है वह हाथ शायद अब भविष्य में कभी कॉग्रेस को निराश नहीं करेगें। इसीलिये शायद राहुल की धुआंधार गुजरात की पारी देख, वह सन्यास का मन बना घोषणा कर चुकी कि वह अब राजनीति से विधा ले रही है। 

बहरहाल एग्जेक्ट पोलों के बीच हार-जीत के दावे जो भी हो, मगर इतना तो तय है कि राहुल ने अपनी जबावदेही पूरे सिदद्त से पूर्ण करते हुये गुजरात चुनाव में भाजपा के छक्के छुड़ा दिये। अगर खुदा न खास्ता गुजरात के परिणाम उत्साहजनक रहे तो निश्चित ही भाजपा के लिये आने वाले समय में राहुल के रुप में एक बड़ी चुनौती सामने होगी। क्योंकि कमजोर संगठन के बावजूद भाजपा जैसे दल को जबरदस्त टक्कर राहुल उनके राजनैतिक जीवन में सबसे बड़ी कामयाबी है, जो कॉग्रेस की आगे की दशा और दिशा तय करेगी। 
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