देर से जागी सरकार, करेगी सहरिया समाज का कल्याण

वीरेन्द्र भुल्ले/विलेज टाइम्स समाचार सेवा
विगत एक दशक से हासिये पर पड़े शहरिया समाज की शुद अचानक कोलारस उपचुनाव में सरकार को क्यों आयी यह तो वहीं जाने। मगर सरकार की शहरिया विकास यात्रा के पूर्व की कार्यप्रणाली पर नजर डाले तो वह विचारण योग्य है। जैसी कि चर्चा म.प्र. के शिवपुरी जिले में बड़े जोरो पर है। जहां कोलारस विधानसभा में हालिया उपचुनाव स भावित है।  कभी कुपोषित बच्चों के पोषण पुर्नवास केन्द्र बंद करने के लिये कु यात सरकार पर सेकड़ों कुपोषित बच्चों की अकाल मृत्यु के आरोप लगे, तो कभी म.प्र. में मौजूद हजारों-लाखों कुपोषित बच्चों को लेकर सवाल हुये। 

          तो कहीं-कहीं स्वसहायता समूह के बेहतर संचालित होने के बावजूद भी उनके बंद होने के किस्से चले। मगर हद तो तब हो गई जब सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों में केन्द्र की योजना से चल रहे भाषायी शिक्षकों कई वर्षो तक आदिवासी बच्चों को पढ़वाने के बाद योजना बंद कर, उन्हें चलता कर दिया। इतना ही नहीं, उन्हें चिकित्सीय सुविधा प्राकृतिक आपदा एवं रोजगार सहित खेती-किसानी सहित पशु-पालन के लिये चलने वाली योजनाओं में फंड देना बंद कर दिया। एक बत्ती बिजली देने के नाम समुचे प्रदेश में बड़े-बड़े ठेकेदारों को काम दें, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल खड़े करने का काम किया। 

         भू-अधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाले पट्टों का वितरण भी आज दिनांक तक पूर्ण नहीं हो सका। गांव-गांव बिचने वाली अवैध शराब ने जहां शहरियाओं का जीवन संकट तो बच्चों का जीवन कुपोषित बनाने का काम किया तो वहीं सस्ते राशन की दुकानों का मामला भी मशीने लगने के बाद ही व्यवस्थित नहीं हो सका। जिससे यह सुनिश्चित हो सके। कि इस समाज के लिये सरकार कितनी संवेदनशील है। मगर गत दिनों म.प्र. के मु यमंत्री की थोकबंद घोषणाओं लगता है कि भले ही मामला उपचुनाव में हार-जीत का हो, अगर उनकी घोषणाओं पर विश्वास किया जाये तो सरकार ने खजाना खोल दिया है। 

       वहीं दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के जन्मदिन पर शहरिया विकास यात्रा के शुभार भ स्थल श्योपुर जिले के कराहल में अटल जी का एक भी चित्र अन्य नेताओं के अलावा समुचे पंडाल में नहीं दि ाा। इससे सरकार की मंशा और कार्यप्रणाली पर सवाल स्वभाविक है। मगर स्वाभिमानी मेहनतकस शहरिया समाज अपनी संस्कृति अपनी सामाजिक  प्रतिष्ठा को सरकार की अंधा-धुंध घोषणाओं और वोट कबाड़़ुओं के बीच सरकार से मिलने वाले अपने हकों को कैसे सुरक्षित संरक्षित र ा पायेगा यह स्वयं शहरिया समाज पर निर्भर है। जो विगत महीनों से अशोकनगर, गुना, बांरा, शिवपुरी जिले में शराबबंदी, शिक्षा एवं शहरिया समाज के स्वाभिमानी स मानजनक उत्थान के लिये स्वयं पंचायतें कर, अपने समाज को जागृत करने में जुटा है। 

             अगर वाक्य में ही सरकार शहरिया समाज का उत्थान चाहती है तो उसे बांटने बंद करने वाली योजनाओं की जगह ऐसी योजनाओं की शुरुआत पूरी निष्ठा ईमानदारी से करनी होगी। जिससे उनका जीवन आत्म निर्भर बना उन्हें सक्षम, शिक्षित बनाया जा सके और वह शासन के सहयोग से अपना जीवन सक्षम और सार्थक बना सके। 
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