कॉग्रेस का वैभव, गौरवशाली इतिहास, तो नेतृत्व, गंभीर, ऊर्जावान है

वीरेन्द्र भुल्ले, विलेज टाइम्स समाचार सेवा: समाज, संगठन या सत्ता, सल्तनतों में चापलूस, गद्दार, महत्वकांक्षी, स्वार्थी, सिपहसालारों के चलते पूर्व में भी बड़ी-बड़ी वैभव गौरव, शक्तिशाली, सत्ता, सल्तनतें, संगठन, समाज तबाह हुये है। मगर वैचारिक आधार पर वह पुन: सत्ता में न लौटे हो, ऐसा भी संभव नहीं है। कहते है जिनके इतिहास होते है, वहीं इतिहास रचते है। कभी-कभी शीर्षत्थ का परिस्थिति बस कमजोर होने का मतलब यह नहीं कि खून में तासीर नहीं। आज पार्टी भी वहीं है और खून भी वहीं बस जरुरत अब कारवां बढ़ाने है और पार्टी को मजबूती प्रदान करने की है। जिससे नेतृत्व भी वैभवशाली, गंभीर, ऊर्जावान होगा और एक मर्तबा फिर से यह महान संगठन अपनी खोई प्रतिष्ठा को कायम करने में सफल और सक्षम होगा।

मगर यह तब संभव है, जब नेतृत्व में ऐसे विधा, विद्ववान, कार्यकर्ता नेताओं की लंबी चौड़ी फौज हो, जो मानवता, राष्ट्रवादी होने के साथ अनुशासित, संस्कारित हो, जिसके लिये नेतृत्व को ही हीरा पहचानने और उसे तरासने की शुरुआत स्वयं करनी होगी। क्योंकि देश बड़ा है और तमाम विविधता, जिसे समझने चलाने दो 500 नहीं हजारों, लाखो ऐसे सिपहसालारों की आवश्यकता होगी, जो निस्वार्थ भाव से राष्ट्र व जनसेवा कर सके और वैचारिक आधार पर आम जन की आशा-आकांक्षा तथा देश की विरासत अनुरुप कॉग्रेस को खड़ा कर सके।
  
आज ऐसे हजारों लाखों लोगों की फौज समुचे देश में मौजूद है जो अहम, अहंकारी कुटिल महत्वकांक्षी, स्वार्थियों से दूर कॉग्रेस के मान-सम्मान और मानवता व राष्ट्र के लिये काम करना चाहती है। मगर नेतृत्व संरक्षण के अभाव में या तो वह फैले फूटे पढ़े है या उस दिन का इन्तजार में है, कि जब कोई ऊर्जावान नेतृत्व सीधी कमान संभाल सटीक निर्णय ले, संगठन को मजबूती के दिशा में आगे ले जाने तत्पर हो। लगता है राहुल के चुन लिये जाने के बाद यह संभव हो, अगर ऐसा हुआ, तो यह हमारे महान देश ही नहीं, कॉग्रेस सहित राष्ट्र व मानवता और लोकतंत्र के लिये यह गौरवता की बात होगी। 

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