राष्ट्रवाद के नाम संस्कार विहीन जमात का नंगा नाच, अनैतिक मार्ग से प्राप्त सत्तायें कभी कल्याणकारी नहीं हो सकती

विलेज टाइम्स समाचार सेवा : कभी सी.डी., हिन्दू-मुस्लिम तो कभी घटिया आरोप-प्रत्यारोप और भ्रष्टाचार, जातिवाद के नाम धु्रवीकरण किसी भी समाज राष्ट्र का भला नहीं कर सकते और उस स्थिति में तो बिल्कुल भी नहीं, जहां सत्ता हासिल करने सीडी जैसे अनैतिक माध्यमों से मातृशक्ति का अपमान हो, इस तरह के अनैतिक के रुप से इस नंगे नाच को न तो हिन्दू-मुस्लिम न ही इस महान राष्ट्र के महान नागरिक स्वीकार कर सकते। हर धर्म, जाति, समाज, राष्ट्र में मातृशक्ति का अपना योगदान और स मान होता है। अगर सत्ताओं के लिये सीडी या अन्य माध्यमओं से मातृशक्ति को मोहरा बनाया जाता है। तो यह किसी भी स य समाज और राष्ट्र के लिये शर्मनाक बात है। 

इन सीडी जारी कर्ताओं को कैसे उचित ठहराया जा सकता है जिन्हें अनैतिक कार्य पर कार्यवाहीं के लिये कानून के पास जाना चाहिए उससे इतर वह चौराहों पर सीडी का सहारा लें, स्वार्थो के लिये मातृशक्ति की नुमाइंश कराते है और सत्ता प्राप्ति के लिये इसे सुगम मार्ग मानते है। गुजरात से लेकर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, म.प्र., उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान में भी कई सीडी मामले आते रहे है, जिन्होंने सत्ताओं व स य समाज को प्रभावित किया है। 

आखिर ऐसे कौन लोग है जो देश में पुरुषार्थ, सेवा करने के बजाये सीडीओं को अपनी स्वार्थ सिद्धि या सत्ता प्राप्ति का अचूक अस्त्र मानते है। देखा जाये तो न तो इस तरह की अनैतिक हरकतों को यह महान देश और नही इस देश के महान नागरिक स्वीकार कर सकते।

बल्कि इस महान राष्ट्र के महान नागरिकों चााहिए कि वह ऐसे व्यक्ति, दल, संगठन की पहचान कर, उसे सत्ता से बाहर रख, सबक सिखाये, जिससे ऐसे लोग कभी भी अपने निहित स्वार्थ पूर्ति या सत्ता प्राप्ति के लिये हमारी महान संस्कृति को कलंकित न कर सके। 

जबकि लोकतंत्र में सत्ता प्राप्ति के लिये अहम सीडी या हिन्दू-मुस्लिम नहीं, बल्कि सेवा, कार्यो का वह रिपोर्ट कार्ड जनता को दिखाना चाहिए और देश की महान जनता को बताना चाहिए कि उन्होंने राष्ट्र, समाज, परिवार व स्वयं के उत्थान में उनका या उनके दल का क्या योगदान रहा है या राष्ट्र व जनकल्याण के लिये उनके पास क्या भावी योजना है। 

वैसे भी कहते है कि लोकतंत्र में सत्ता का एकाधिकार खतरनाक होता है सवाल चुनावों के दौरान आस्था का नहीं, सवाल उस आशा-आकांक्षाओं की अनुभूति एहसास का है। जिसे नैतिक लोगों को भली भांति समझना होगा। संस्कारवानों को वह आचरण का अनुशरण करना होगा जिससे एक चरित्रवान राष्ट्र व समाज का निर्माण हो। 

क्योंकि सत्ता प्राप्ति के अनैतिक मार्ग न तो कल्याणकारी हो सकता है, न ही उसे उचित ठहराया जा सकता। राष्ट्रवाद के नाम अनैतिकता का नंगा नाच करने वालो को सोचना चाहिए कि लोगों को रोजगार, शिक्षा, सुरक्षा और पुरुषार्थ के प्रदर्शन हेतु संसाधनों की आवश्यकता होती है न कि हिन्दू-मुस्लिम और उन सीडियों की जिन्हें सीढ़ी समझ लोग सत्ता सिंहासन तक पहुंचने का सुगम मार्ग समझते है। 
जय स्वराज   
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment