जांबाज पुलिस पर मुख्यमंत्री का ट्यूट 40 हजार का अरुआ, 10 लाख की स्मेग, करोड़ों की अवैध शराब और उत्खन्न पर गाज

म.प्र. शिवपुरी- बढ़ते अपराधों पर लगाम का नमूना भले ही विधि संबत हो, मगर जो तरीका शिवपुरी पुलिस अपने पुलिस कप्तान के मार्गदर्शन में म.प्र. शिवपुरी जिले में इख्तयार किये हुये है वह काबिले गौर है। हाल ही में दस्यु विहीन हो चुके म.प्र. के शिवपुरी जिले में साहसिक मुठभेड़ में पकड़ा गया 40 हजार ईनामी दुर्दान्त डकैत अरुआ और उसकी गिरफ्तारी पर म.प्र. सरकार के मुख्यमंत्री का ट्विट इस बात के स्पष्ट संदेश है कि म.प्र. की शिव सरकार किसी भी हालत शन्ति का टापू कहे जाने वाली म.प्र. की भूमि को अपनी सजग पुलिस के माध्यम से अशान्ति का टापू नहीं बनने देना चाहती। फिर चाहे वह म.प्र. के कुछ जिलो में नक्सलवाद हो या फिर खत्म हो चुकी प्रदेश में डकैत समस्या हो। 

अरुआ के बाद शिवपुरी जिले के ही थाना दिनारा फॉरलेन हाईवे सिल्चर से जैसलमेर पर एक स्कारपियों से 10 लाख रुपये कीमत की स्मेक सहित 3 अपराधियों की गिरफतारी ने पुलिस की बांछे खिला दी है। अगर खबरों की माने तो जब से आई.पी.एस सुनील पाण्डेय की स्थापना दस्यु प्रभावित शिवपुरी जिले में की गई है तब से दस्यु घटना के नाम यह जिला शान्त बना हुआ है। मगर विगत कुछ माहों में जिस तरह से अवैध शराब और रेत खनन उत्खन्न के मामलों में करोड़ों रुपये की शराब, रेत पकडऩे की कार्यवाहीं हुई है। उससे शराब, रेत माफियाओं की सांसे तो पहले से ही हलक में थी। मगर अब जिस तरह फरार घूम रहे अपराधी और अवैध नशे के कारोबार पर पुलिस ने अपनी नजर गढ़ाई है उससे अवैध कारोबारी अपराधियों में हडक़ंप मचा है। 

शिवपुरी पुलिस की कार्यप्रणाली इसीलिये भी काबिले गौर है कि अविश्वास के वातावरण में पुलिस के प्रति विश्ववास की जो नीव आई.पी.एस सुनील पाण्डेय ने रखी है उसका परिणाम है कि पुलिस को जनता के माध्यम से सटीक सूचनायें अपराधी और माफियाओं की मिलने लगी है। 

जब इस संबध में आई.पी.एस अफसर सुनील पाण्डेय से यह जानना चाहा कि आपको मिल रही सफलताओं के पीछे का राज क्या है। आपकी की पुलिस के कार्य को स्वयं मुख्यमंत्री ने ट्यूट कर अपनी वचनबद्धता में शामिल किया है। क्या किसी पुरुस्कार की तैयारी है? इस पर उक्त आई.पी.एस अफसर का सपाट-सा जबाव था कि यह टीम वर्क है, मुझे गर्व है कि मेरे जवान, अफसर पूर्ण निष्ठा ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन प्रभावी तरीके से कर रहे है और पुलिस के लिये अपराध, अपराधियों की धरपकड़ सतत प्रक्रिया है। मगर जब अप्रत्याशित परिणाम प्राप्त होते है तो हमें खुशी भी होती है और गर्व भी महसूस होता है।  

रहा सवाल पुरुस्कार तो इसका निर्णय हमारे वरिष्ठ अधिकारी सरकार करती है हमारा कर्तव्य है, कि हमें मिली जवाबदेही को समझना और पूर्ण निष्ठा के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करना है जिसे हमारी पुलिस बखूबी ढंग से टीम भावना के साथ निभा रही है। 

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