भाई की प्रतिमा से गले लग, बताया परिवार का योगदान

वीरेन्द्र शर्मा विलेज टाइम्स समाचार सेवा : मौका था गांधी जयन्ती के अवसर पर जननायक कर्म योद्धा स्व. श्रीमंत माधवराव सिंधिया की बहुप्रतिशिक्षित प्रतिमा अनावरण का। यूं तो हजारों वर्ष से भारतीय संस्कृति में भाई-बहिन के पवित्र अगाध स्नेह और आपसी प्रेम समर्पण व त्याग का। शायद भाई की प्रतिमा अनावरण के वक्त माल्यार्पण पश्चात एक बहिन अपने प्रिय भाई की प्रतिमा से गले लग गई। उस क्षण जो भी खुशी शिकवा शिकायत की हो, यह तो म.प्र. सरकार की वरिष्ठ केबिनेट मंत्री श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया ही जाने या उनके नजदीक खड़े उनके भतीजे पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं सांसद लोकसभा में कॉग्रेस के सचेतक श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया। क्योंकि वह क्षण बड़ा ही भावुक था जिस क्षण देश के जन नायक एक कर्म योद्धा श्रीमंत माधवराव सिंधिया की प्रतिमा का अनावरण हो रहा था। 

स्व. श्रीमंत माधवराव सिंधिया को आज के लोकतंत्र में यूं ही जन नायक या कर्म योद्धा नहीं कहा जाता है। जो भी लोग उन्हें नजदीक से जानते है या उनके द्वारा किये गये अदभुत कार्यो को पहचानते है या उनके स्पर्शी स्वभाव और व्यवहार के साक्षीरहे है या जिन लोगों ने उनकी दूर दृष्टि को रेखांकित होते देखा है वे उनके बारे भली भांति समझते है। एक ओर उन्होंने अपनी मां से मिले संस्कारों के बल पर खुद को इस लोकतंत्र में जननायक के रुप में खड़ा कर, यह साबित किया कि भले ही उनका ताल्लुक एक राजवंश के मुखिया के बतौर सिंधिया राजवंश से था। मगर वह म.प्र. ही नहीं, समुचे देश यहां तक कि रेल मंत्री के रुप में विदेशों में भी अपना लोहा मनवा स्वयं के कार्यो कर्तव्य निष्ठा के बल पर आम जन के बीच एक जन नेता के रुप में स्थापित करने में सफल रहे।

उन्होंने एक बेटे पिता और भाई सहित अपने क्षेत्र के मुखिया के नाते भी वह सारी पर परा, संस्कृति, संस्कारों का भी पालन किया। जिसे आज के सार्वजनिक जीवन में दुर्लभ कार्य समझा जाता है। ग्वालियर-चंबल में विजयपुर, फटलाईजर, सितोली, स्प्रींग फैक्ट्री, मालनपुर, नवीन उघोग क्षेत्र बामौर उघोग क्षेत्र का जीर्णोउद्धार जीवाजी यूनिवर्सटी एम.बी.ए एवं अन्य नई फेकल्टियों की शुरुआत ग्वालियर में अन्तराष्ट्रीय स्तर का हॉकी व क्रिकेट स्टेडियम, हवाई अड्डा एवं विभिन्न जिलों में हवाई पट्टी समुचे संभाग में नवोदय विद्यालय और क्षेत्र की सबसे बड़ी गुना ईटावा रेल लाइन की स्थापना के साथ देश ही नहीं, विदेशों में भारतीय रेल की प्रतिष्ठा कायम करना उनके सार्वजनिक जीवन के वह कार्य है, जो परिणाम के रुप में आज पारदर्शी, स्पर्शी होकर लोगों के सामने है।  

मुझे ज्ञात है जब म.प्र. में भाजपा की पटवा सरकार ने प्रथम बार ऋण माफी का ऐलान किया था तब म.प्र. के शिवपुरी जिला मुख्यालय के सदन बाजार माध्यमिक विद्यालय में उन्होंने अपनी सभा में कहा था कि भाजपा सत्ता के लिये रिण माफी का ऐलान कर, राजनीति में गलत शुरुआत कर रही है। हमारे किसानों को रिण माफी नहीं, मान-सम्मान, स्वाभिमान से जीने साधन, संसाधन और संरक्षण की जरुरत है देश को धर्म, जाति, क्षेत्र की राजनीति नहीं सौहार्द पूर्ण राजनीति की जरुरत है। यह राजनीति में उनकी दूर दृष्टि ही थी जो आज की राजनीति देख सच साबित होती दिखाई देती है। 

एक बेटे के रुप में अपनी मां स्व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया की देह को अन्तिम विदाई देते वक्त देश ही नहीं, विश्व की एक से एक शख्सियतों यतों के बीच उन्हें दरकिनार कर, कि वह एक बड़े राजवंश के मुखिया देश के जाने माने बड़े नेताओं में से एक है। और उनके बच्चे, परिवारजन इस मौके पर मौजूद है अपनी मां की चिता के पास खड़े होकर एक बच्चे, बेटे के रुप में खूब फवक-फवक कर रोना, एक बेटे का अपने मां के प्रति अगाध स्नेह ही था जिसने समुचा जीवन, अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें, क्षेत्र ही नहीं, देश की जनता की सेवा करते हुये समर्पित कर दिया। 

आज आयरन लेडी के नाम से म.प्र. की राजनीति में अपना नाम स्थापित करने वाली उनकी बहिन श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया व अन्नदाता व पीडि़त, वंचितों की सेवा में जुटे, विकास पुरुष के नाम से याति रखने वाले श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया जो उनके पुत्र है। उनका राजनैतिक या सार्वजनिक जीवन इस बात के स्पष्ट संदेश देता है कि वह अपने पिता के द्वारा जनसेवा के क्षेत्र में खीची गई लकीर को और बड़ा करने का प्रयास करेगें जो शिक्षा, दिक्षा वह अपने पुत्र को सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के लिये देना चाहते है। शायद वह अभी से उनकी छोटी सी उम्र में साफ दिखाई देने लगा है। जैसी कि चर्चा है और पूर्व लोकसभा चुनाव में लोगों को देखने या सुनने में आया। 

बहरहाल आज की राजनीति को जरुरत है अपने ओहदे, पारिवारिक पृष्ट भूमि से इतर स्वयं को आम जन के बीच सच्चा जनसेवक साबित करने की जौ सिंधिया परिवार के लोग करते आये और करने का क्रम लाख संघर्ष के बावजूद भी जारी रखे हुये है। अनावरण के मौके पर श्रीमंत यसोधरा राजे सिंधिया ने भावुक होते हुये कहा कि मेरी मां श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया व मेरे भाई श्रीमंत माधवराव सिंधिया ने जीवन पर्यन्त पीडि़त, वंचित, मानवता ही नहीं, समुचे राष्ट्र की बगैर किसी स्वार्थ के पूरी निष्ठा ईमानदारी से की परिणाम कि दोनों एक पहला चुनाव गुना, शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से लड़ा और अन्तिम चुनाव भी गुना, शिवपुरी से लड़ा। दोनो के राजनीति में आने जाने का रास्ता एक ही रहा, राजनीति के चलते उनकी दलीय विचारधारा का रास्ता भले ही अलग रहा हो। मगर मुझे खुशी है कि वह ईश्वर के यहां अब एक है, जो हमें देख रहे होगें।  

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