निर्णय, नीति, साहस की सराहना और सहयोग देश में आवश्यक

व्ही.एस.भुल्ले/विलेज टाइम्स समाचार सेवा। ये सही है विषम परिस्थितियों के बावजूद डॉ. मनमोहन सिंह सहित पूर्व प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में चली सरकारें राष्ट्र व जनहित के मुद्दों पर साहसी और सराहनीय निर्णय ले, समृद्धशाली जनकल्याणकारी नीतियां बनाने में अपनी-अपनी परिस्थिति अनुसार सफल व सक्षम रही है। अगर बाह सुरक्षा सहित आन्तरिक सुरक्षा को लेकर जो निर्णय स्व. इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी सहित स्व. नरसिंह राव सरकार में हुये वह साहसिक सराहनीय ही कहे जायेगें। जिसकी कीमत हमारे दो प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा, राजीव गांधी एवं एक पूर्व मु यमंत्री बैयन्त सिंह को अपनी जान गवां कर चुकानी पड़ी। 

मगर उसके बाद देश में मानो कि सुरक्षा के नाम बाह व आन्तरिक स्तर पर जैसे साहस और निर्णय का क्रम टूट-सा गया। मगर इस बीच राष्ट्र व जन कल्याण तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था सहित आर्थिक समृद्धि, सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सराहनीय निर्णय भी हुये और नीतियां भी बनी और कानून भी। 

मगर बाह सुरक्षा व आन्तरिक सुरक्षा और अन्तराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के लिये जिस साहस की जनाकांक्षा देश में बनी वह 25 वर्षो में फलीभूत नहीं हो सकी। मगर 2014 के बाद जिस साहस और निर्णयों का परिचय पूरी दुनिया को हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के अन्दर ही नहीं, देश की सीमाओं के बाहर भी कराया जो एहसास देश की जनता को आन्तरिक सुरक्षा को लेकर कराया वह साहस पूर्ण और सराहनीय ही कहा जायेगा। 

जिससे देश में विश्वास और चेतना का उदय साफ परिलक्षित होता दिखाई देता है। इसके अलावा राष्ट्र जन कल्याण से जुड़ी सराहनीय कुछ नीति, कानून भी बनाने में सफल रहे। जिसमें जनधन, मुद्रा कोष, स्टार्टप, स्केल डब्लबमेन्ट, ग्रीन इंडिया, प्रधानमंत्री बीमा, प्रधानमंत्री सिंचाई, स्वच्छता अभियान जैसी कई योजनायें है। मगर बेहतर प्रबन्धन क्रियान्वयन व देश में दलगत राजनीति के चलते वह वो परिणाम देश को नहीं मिल सके, जिसकी देश ही नहीं स्वयं प्रधानमंत्री को आशा आकांक्षा थी। 

बहरहाल जो भी हो आ िार हमारे प्रधानमंत्री अपने साहस व निर्णयों के लिये सराहना के हकदार तो है ही, साथ ही वह उस मार्ग की ओर अग्रसर भी है, जिसके लिये महान भारतवर्ष को पहचाना जाता है। जिन्होंने समुचा जीवन राष्ट्र के लिये समर्पित कर, राष्ट्र व जनसेवा में लगा दिया है, जो आज भी दिन रात एक कर, देश को यहां तक लाने में सफल रहे। जहां से राष्ट्र को एक नई दिशा मिल सकती है, मगर जरुरत आज देश के प्रबुद्ध व मेहनतकस लोगों को संघर्ष के साथ प्रधानमंत्री का ध्यान उस दिशा में खींचने की जरुरत है जिससे यह महान राष्ट्र खुशहाल व समृद्धशाली बन सके। बरना लोकतंत्र में तो अच्छे-बुरे सवाल करना मानो इसकी संस्कृति बन गई है, मगर हमारे महान संस्कार ही ऐसे साहस और निर्णयों को सफलता का जामा पहना सकते है।  
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