ये सियासत है या षडय़ंत्र

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। जिस परिवार ने देश के लिये कभी जान की परवाह नहीं की आज उसे हार जीत के आंकड़े समझाये जाते है। तो कभी लोग नैतिकता का पाठ पढ़ाने से भी नहीं हिचकिचातेे। ऐसे में बार-बार कॉग्रेस अध्यक्ष की ताजपोशी को लेकर नये-नये व्यानों से कॉग्रेस जैसे महान  दल का नुकसान ही हो रहा जिस तरह का नुकसान कॉग्रेस विगत 25 वर्षो से उठाती आ रही है। और यह दबाव की राजनीति का ही परिणाम है जो कॉग्रेस आज की स्थिति में है। 

जब समुचा देश हार-जीत चुकी कॉग्रेस जब आज भी जिस भी हालत में खड़ी है और जिस तरह की सियासत कॉग्रेस को बदनाम करने हो रही है ऐसे में हिमाचल, गुजरात के परिणाम अहम हो सकते है। मगर डर-डर कर भी जीवन संगठन नहीं चलते। जब सभी प्रदेशों ने राहुल के नाम पर मुहर लगा दी है तो ऐसे में बार-बार नई-नई तारीख घोषित कर कॉग्रेस आखिर क्या संदेश देना चाहती है?

बेहतर हो कॉग्रेस के नये अध्यक्ष की घोषणा शीघ्र हो, जिससे देश की राजनीति में कम जोर होते प्रमुख विपक्षी दल को मजबूत बना लोकतंत्र को मजबूत किया जा सके। बरना ये सियासत हमारे महान लोकतंत्र षडय़ंत्र ही साबित होगी फैसला कॉग्रेस को करना है। 
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