पागल विकास और पगलाई सेवा को लेकर मचा बवाल

व्ही.एस.भुल्ले, विलेज टाइम्स समाचार सेवा : सच जो भी हो, मगर जिस तरह के अल्फाज सोशल मीडिया या चर्चाओं में आजकल सुर्खियां बन रहे है वह बड़े ही समाज को डराने वाले लगते है। अभी पागल विकास का बबन्डर थमा ही नहीं था कि पगलाई सेवा की कान फोडू चर्चाओं ने राजनैतिक हल्कों में तूफान ला खड़ा किया है। अब इसे विश्व के महान लोकतंत्र के राज्यों में आसन्न चुनावों को लेकर, सत्ता के लिये अल्फाजों का युद्ध कहे या मलयुद्ध जो सोशल मीडिया और चर्चाओं के माध्यम से छिड़ा है वह किसी भी लोकतंत्र के लिये शर्मनाक ही कहा जायेगा। अब ऐसे में दबाव की राजनीति पर सवार सत्ता का अहंकार लोकतंत्र को कहां ले जाकर छोड़ेगा, फिलहाल तो कहना मुश्किल, मगर इतना तय अवश्य है कि घर की बातों को अपने-अपने स्वार्थो के लिये अगर इस तरह चौराहों पर लाने का क्रम शुरु होगा तो यह कहां जाकर रुकेगा इसका अंदाजा एक स्वस्थ लोकतंत्र में लगाया जा सकता है।   

वैसे भी हमारे समाज में यह कहावत प्रबल रही है कि सवल का जब हाथ चलता है या सत्ता का जब दबाव चलता है तो निर्बल का फिर मुंह चलता है। सो ऐसे में पागल विकास या पगलाई सेवा को लेकर सवाल हो रहे है, तो ऐसे में सवालकर्ता और सेवा और विकास की समीक्षा अवश्य बनती है। और जिसकी शुरुआत भी सक्षम, सफल, व्यवस्था या व्यक्तियों को करना चाहिए। जिससे महान लेाकतांत्रिक व्यवस्था में कुतर्क पूर्ण सवाल और मिथ्यापूर्ण जबाव न बन सके। तभी हम इस महान लोकतंत्र को नई ऊंचाईयों तक ले जा पायेगें, नहीं तो इसी प्रकार तल्क अल्फाज, सनसनी तो मिथ्या जबाव समाज के मार्गदर्शक बन जायेगें। 

आखिर किसी भी सभ्य समाज और उस पर टिके लोकतंत्र में गर्व, गौरव और गरिमा भी तो शब्द है जिस पर समुचा समाज ही नहीं, लोकतंत्र भी नाज करता है। इसीलिये चर्चा जब भी हो, जैसी भी हो, गर्व, गौरव और गरिमा का याल लोगों को अवश्य रखना चाहिए फिर वह सोशल मीडिया को या फिर चौपाल।           

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