हमारा स्वाभिमान ही हमारी अनमोल धरोहर, दुख, दर्द और दीपोत्सव

विलेज टाइम्स समाचार सेवा। दीपोत्सव की धूम के बीच दर्द इस बात का रहा कि जो आशंका शहीद सरदार भगत सिंह ने अंग्रेजों से लोहा लेते वक्त पूर्व स्वराज की बात कह कर की थी। दुख इस बात जिस गांधी ने अपने शिक्षा गुरु बाल गंगाधर तिलक जी के आग्रह पर साउथ अफ्रीका छोड़ भारत की तरफ रुक किया। और पूरे 1 वर्ष भारत भ्रमण पश्वात अपना शूटबूट छोड़ देश की खातिर लंगोटी लगा ली थी। 

आज जहां शहीद भगत सिंह की शंका साकार है कि चन्द लोग सेवा के नाम सत्ता सुख भोग रहे है और ताकतवर संगठित लोग गांव, गली, किसान, गरीब, पीडि़त, वंचितों का जीवन दुष्बार किये है जिसमें सबसे ज्यादा शर्मसार करने वाली बात तो यह कि कुछ लोग महान महात्मा गांधी से बराबरी ही नहीं, उन्हें कुछ भी बोल भारतीय संस्कृति को कलंकित कर रहे है। मगर हमारा र्दुभाग्य यह है कि हमारी महान विभूतियों को कुछ भी बोलने वाले लोग तो बोल रहे है, मगर सत्ता या स्वयं स्वार्थ में डूबे लोग मुंह भी नहीं खोल रहे है। 

मगर दीपोत्सव का पर्व हर वर्ष आने वाला पर्व है जो हर वर्ष हमें अंधेरे से उजाले और गन्दगी से स्वच्छता का संदेश अवश्य दे जाता है। बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल कर अपने घर अयोध्या पहुंचे प्रभुराम के आगमन पर भी दीपोत्सव मनाया गया था। धन, वै ाव के भंडार को हम पर उकेरने वाली मां लक्ष्मी जी का भी पूजन होता है। दूसरे दिन विपदा में संरक्षक और संरक्षण के प्रतीक गोर्बधन की पूजा की जाती है। और तीसरे दिन भाईदूज के रोज बहिनों का प्रेम और उनकी रक्षा की शपथ ली जाती है। इन त्यौहारी दिनों में आत्म चिन्तन और भगवान राम के सच्चे भक्त महात्मा गांधी जिन्होंने दुनिया से विदा लेते वक्त प्रभु भगवान राम को ही अन्तिम वक्त हे राम कहकर इस दुनिया से विदा ली।             

मगर दीपोत्सव के पावन पर जो बोधा एहसास हुआ लगता है वह अधूरा है क्योंकि जब तक हम व हमारे युवा ठीक से अपनी जबावदेही कत्र्तव्यों का निर्वहन से नहीं करते तब तक ऐसे एहसास और विचार बोध बने रहेगें। जरुरत है आज इस दीपोत्सव के पर्व से सुनहरा भविष्य संरक्षण और सुरक्षा की। जब हम अपने निहित स्वार्थ छोड़, भगवान राम कृष्ण  से सीख लेते हुये, एक भाई की तरह अपनी मर्यादा, कत्र्तव्य और जबावदेही को समझे। बरना त्यौहार आयेगें जायेगें और हम या हमारे इन्हीं दुख दर्द के साथ जीवन निर्वहन करते जायेगें। 
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment