स्वयं के साथ मानव जाति ही नहीं, समुचे जीव-जगत का कल्याण ही मानव धर्म- मनीषा पांण्डेय


म.प्र. शिवपुरी- ब्राहण्ड में मौजूद जीवों का अस्तित्व परमपिता परमात्मा का आर्शीवाद है अगर हम अपने भूत से सीख लेते हुये वर्तमान को कर्मशील बना, सुन्दर भविष्य का निर्माण कर पाये तो यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी, स्वराज से हमें यहीं सीख मिलती है मनीषा पांण्डेय, जाति हमारी पहचान हो सकती, मगर यह संपूर्ण सत्य नहीं, असल पहचान तो हमारी हमारे द्वारा किये जाने वाले कार्र्योे से होती है जो हमें जाति, परिवार, समाज, गांव, गली, नगर, जिला, प्रदेश, देश ही नहीं समुचे विश्व में  पहचान दिलाते है- जयरानी तिर्की, अहिंसा वह मार्ग है, जो हमारे जीवन को सार्थक बनाता है और प्राकृतिक सिद्धान्त हमें बेहतर खुशहाल जीवन निर्वहन की सीख देते है। आरती राठौर, जीवन निर्वहन के साथ लोगों की मदद और निर्बल को संरक्षण प्रदान करना ही मानवीय गुण है- पीयूष शर्मा, प्रकृति हमें उस मार्ग की ओर अग्रसर होने का संदेश देती है जो जीवन्त है और जिससेे मानवीय जीवन खुशहाल बनता है- मनोज पाल, मां वह शब्द है जो अपने आप में पूर्ण और मानवीय कर्तव्य निर्माण का स्पष्ट संदेश है मगर वह सर्वोच्च और निस्वार्थ भी है जो निस्वार्थ संरक्षक हित चिन्तक है, इसीलिये महान है और पूजनीय भी है- लोकेन्द्र यादव, उक्त विचार म.प्र. शिवपुरी स्थित शिक्षा भारती बाल निकेतन हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित स्वराज के परिचर्चा कार्यक्रम के दौरान स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले के साथ चर्चा के दौरान रखी। 

ज्ञात हो कि विगत वर्षो से खुशहाल जीवन एवं खुशहाल संपन्न भारत निर्माण के लिये शुरु किये गये वैचारिक अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम से पूर्व स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने बच्चों से चर्चा में स्वराज के लक्ष्य और उद्देश्य पूर्ति में बच्चों, युवा, छात्र-छात्रों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुये कहा कि हम उस महान भू-भाग की सन्तान है जो पहले भी महान था और आज भी है और भविष्य में भी रहेगा। 

आज हमेें हमारी विरासत से सीख ले, वर्तमान से समन्वय कायम कर, बेहतर भविष्य निर्माण करने की है और यह अस भव भी नहीं है। अगर हम अपनी जबावदेही के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा ईमानदारी के साथ करें तो हम यह लक्ष्य हासिल कर सकते है। हमे यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे पूर्वज कितने महान और दूरदर्शी थे। जिन्होंने हमारी संस्कृति का संरक्षण और उमदा शिक्षा के माध्यम से हमें इस मुकाम तक पहुंचाया।

उन्होंने मां शब्द की उपायदेयता पर प्रकाश डालते हुये कहाा कि मां शब्द का उच्चारण समुची संस्कृति में निस्वार्थ कर्म जबावदेही का इतना बड़ा सास्वत सत्य है, जो त्याग, तपस्या, समर्पण, सरंक्षण का एक पवित्र उदाहरण जीव जगत में प्रस्तुत करता है। इसीलिये वह पूज्यनीय भी है और स मानीय भी है और जो जीव मां शब्द के उच्चारण भर से अपने कर्तव्य उत्तरदायित्व निर्वहन के लिये सजग रह, सक्रिय वहीं मानव कहलाता है। 

अन्त में स्वराज के संयोजक ने विद्यालय के गुरुजन, छात्र-छात्राओं का आभार मानते हुये बेहतर भविष्य निर्माण की शुभकामनाओं के साथ धन्यवाद भी दिया तथा परिचर्चा में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को स्वराज की ओर से पुरुस्कृत भी किया। इस मौके पर स्कूल के संचालक सुनील कुशवाह, प्राचार्य सुधीर कुशवाह एवं शिक्षक गण सहित स्वराज के धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर, पुष्पेन्द्र शर्मा इत्यादि उपस्थित थे।
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