राजनैतिक कंटकों के विरुद्ध लामबन्द होता मतदाता

विलेज टाइम्स समाचार सेवा : म.प्र. शिवपुरी- जो त्रासदी म.प्र. ही नहीं, शिवपुरी जिले ने तथाकथित राजनैतिक कंटकों के रहते, विगत कुछ वर्षो में झेली है उसे भुला पाना शायद ही सामान्य से सामान्य नागरिक को मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन सा लगता है जैसी कि चर्चा अब समुचे म.प्र. में ही नहीं शिवपुरी सहित समुचे ग्वालियर-चंबल में भी बड़े जोरो पर है। लोगों का मानना है कि विगत वर्षो में जिस तरह से प्रकृति प्रदत्त मानवीय सुविधाओं और शुल्क सहित सेवाओं के लिये कलफा है तथा प्राकृतिक संपदा ही नहीं विकास के नाम जनधन से लुटा है उससे आज आम मतदाता खासा नाराज है। जिस माफिया अंदाज में शिक्षा, स्वास्थ, पेयजल सहित उचित मूल्य का राशन तथा शराब माफिया का राज चला है, उसने क्या आम क्या खास गांव, गली, पीडि़त, वंचितों के परिवारों के चूल्हें तक हिला दिये।

अब जबकि 2018 में पुन: चुनाव होने की सुगबुहाहट के साथ राजनेता चुनावी तैयारी में जुट चुके है। ऐसे में आम मतदाता के बीच उसकी आशा, आकांक्षाओं की पूर्ति में मार्ग के कटंकों के विरुद्ध लामबन्द होना स्वभाविक है। देखा जाये तो राजनैतिक दल तथा राजनेताओं की चालाकियों से बाकिफ आम मतदाता अब तो यह कहने से भी नहीं चूकते कि जिन लोगों के चाल-चरित्र दोहरे है। शायद वह यह समझते है कि हमें ज्ञान नहीं और एक बार पुन:लामबन्द हो उनका मत मात्र इस आधार पर हथिया लेगें कि वह कितने महान दल या फिर कितने महान नेता के लिये वोट मांग या डलवा रहे है। उन्हें यह भी मुगालता है कि वह धन व बाहु बल के आधार पर हर बार की तरह इस बार भी जीत या हार के लिये सक्षम और सफल साबित होगें और ऐनकेन प्राकेरेण प्रत्याशी बन आम मतदाता को मजबूरन लुभा ही लेगें।

बहरहाल जो भी हो 2018 के चुनावों को लेकर आम मतदाता के बीच स्वयं को जनसेवा के नाम छले जाने की जो मानसिकता उसकी बन रही है, वह बड़ी ही विचित्र है। मगर फिलहाल की मानसिकता और चर्चाओं के आधार पर अर्थ निकाले जाये तो परिणाम बड़े ही चौकाने वाले हो, तो कोई अतिशंयोक्ति न होगी। फिलहाल तो ऐसे लोगों द्वारा वोट हथियाने के फड़ जमना शुरु हो गये है। जो म.प्र., ग्वालियर-चंबल ही नहीं खासकर शिवपुरी जिले के विकास व सेवाओं के नाम विगत वर्षो से कंटक साबित हो रहे है। 
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