दलों के दल-दल से इतर आगे आना होगा गांव, गली को

व्ही.एस.भुल्ले : जिस तरह की घुटन दलों के बीच मची दल-दल के चलते आम मतदाता मेहसूस कर रहा है उससे निजात पाने आवश्यक है। गांव, गली के लोग जागरुक हो, एक मंच पर आयें, क्योंकि जिस तरह से धन, बाहुबल और जर खरीद तथाकथित मीडिया की आड़ में आम मतदाता के साथ चुनावों के दौरान छल होता है और आम मतदाता 5 वर्ष के लिये हाथ मलता रह जाता है। उससे बचने के लिये अब आवश्यक है कि गांव, गली से ही ऐसे लोग निकले जो धन, बाहुबल के सहारे सत्ता हथिया आम गांव, गली, गरीब, किसान को खून के आंसू रुलाने वालो का सामना कर सके। तथा पैकेजो के माध्यम से मीडिया का नाम बदनाम करने वालो को भी आयना दिखा सके। 

क्योंकि निर्वाचन आयोग की लाख बन्दिसो के बावजूद भी पर्दे के पीछे से जो खेल तथाकथित मीडिया धन, बाहुबल वालो के बीच चलता है वह किसी से छिपा नहीं। इसीलिये अब समय आ गया जिस तरह देश भक्तों ने देश की आजादी की प्रथम क्रान्ति में जिन माध्यमों का उपयोग सन 1857 में संदेश समाचारों के आदान प्रदान के लिये किया। जिस तरह गांधी सहित अन्य देश भक्तों ने आजादी के लिये आपसी संपर्क संदेश का माध्यम चुना उसी को आगे बढ़ाते हुये लोकतंत्र के दुश्मनों से निजात पाने जरुरी है कि गांव, गली के लोग आगे आकर राष्ट्र व जनकल्याण में अपनी माहती भूमिका निभाये।  

आज महान लोकतंत्र में स्वस्थ, पारदर्शी, स्पर्शी व लोक कल्याणकारी सरकारों की स्थापना के लिये जरुरी है निर्वाचन से पूर्व बेहतर संपर्क, संदेशो से लेस उन मतदाताओं और उनमें जागरुकता की जिससे वह अच्छे और सच्चे जनप्रतिनिधि अपने बीच से बगैर किसी दबाव व दलों के प्रलोभनो के चुन सके। और यह तभी स भव है जब गांव, गली के चुने हुये प्रतिनिधि एक हो आने वाले आसन्न चुनावों में सत्ता के उन सौपानों तक पहुंचने की पहल करे। जहां गांव, गरीब, मजदूर, किसान के कल्याण की नीतियां बनाती है। जब तक गांव गली के लोग एक नहीं होते तब तक यह दलों की दल-दल खुशहाल समृद्ध जीवन में बाधा बनी रहेगी। 
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