म.प्र. की आयरन लेडी की अग्नि परीक्षा

विलेज टाइम्स समाचार सेवा : म.प्र. शिवपुरी- आम नागरिकों के प्रति सरल, सहज, संवदेनशील, मगर अपने कर्तव्य, जबावदेहियों के प्रति सतत म.प्र. की तेज तर्रार मंत्री का मिजाज किसी लोह महिला से कम नही तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। अगर किसी को अप्रत्याशित निर्णयों का जनहित में क्रियान्वयन देखना हो तो उन्हें म.प्र. सरकार की खेल युवा कल्याण, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्य मंत्री श्रीमंत यसोधरा राजे सिंधिया की कार्यप्रणाली, उनके जीवन का कड़ा संघर्ष तथा जनहित में लिये गये सतत निर्णयों को देखना चाहिए।  

कभी अपनी मातृश्री श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया के कार्य क्षेत्र में उनका राजनैतिक हाथ बटाने क्षेत्र की सेवा को सक्रिय हुई श्रीमंत यसोधरा राजे सिंधिया ने कभी-कभी सपने में भी न सोचा होगा कि जिस जनसेवा के मार्ग पर वह अपनी मातृश्री के साथ चल निकली है उसका सफर कितना कंटक व कष्टप्रद एवं संघर्षपूर्ण होगा। मगर सबसे छोटी बेटी होने का कारण उन्होंने अपनी मां श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया की कार्य स्थली और बुजुर्गो की विरासत को पूरी निष्ठा ईमानदारी से स हाला सार्वजनिक और राजनैतिक जीवन में अपनी कार्य प्रणाली से जो गरिमा एक राजनेता के रुप में उन्होंने राजनीति में कायम की। वह आज की राजनीति के लिये एक मिशाल है। 
          
कभी क्षेत्र के गरीब, मजदूरों की खातिर सीधे सरकार और वन, शराब, खनन माफियाओं से सीधे भिड़ भ्र्ष्टाचारियों के सामने ही मुखर विरोध करने वाली इस लोह महिला ने न तो कभी क्षेत्रीय विकास के लिये आंधी तूफान, भीषण गर्मी, ठंड, बरसात की परवाह की, न ही विरोधियों के षडय़ंत्रों के आगे हार मानी।  

कौन नहीं जानता म.प्र. में हुई इन्दौर की ऐतिहासिक इन्वेस्टर्स मीट को जिसका उदघाटन स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया और पहली बार म.प्र. की इन्वेस्टर मीट में इतने बड़े पैमाने पर देशी-विदेशी उघोगपत्तियों निवेशकों ने भाग लिया। 

आजादी के बाद से आज तक जिस तरह से म.प्र. में खेलों व धार्मिक परिस पत्तियों धार्मिक स्थलो की अपेक्षा हुई। आज उन्हीं उपेक्षित क्षेत्रों से जहां खिलाड़ी गोल्ड, सिल्वर मेडल ला रहे है तो दूसरी ओर गांव, गलियों में गरीब बच्चों द्वारा खेल खेले जा रहे है। श्रृखंला वद्व जीर्णशीर्ण हालत में जा पहुंचे धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्वार की श्रृंखला में जहां म.प्र. का गौरव बढ़ाया, तो वहीं अपनी मातृश्री के सपने को पूरा करने धार्मिक स्थलों का युद्ध स्तर पर जीर्णोउद्वार के माध्यम से उन्हें नया स्वरुप दिलाया।  

बहरहाल 90वे के दशक से कड़े संघर्ष, त्याग के बीच जनसेवा में जुटी यह आयरन लेडी की व्यक्तिगत ही नहीं, सार्वजनिक कड़े संघर्ष के साथ आम जन के प्रति सौम्यता और कार्य के प्रति उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति इस बात का प्रमाण है कि वह अपने कर्तव्य, जबावदेहियों से कभी विमुख नहीं रही, फिर कारक जो भी रहे हो। 

और आज यहीं कारण है कि जन आकांक्षाओं पर अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने वाले या फिर जनसेवा के लिये अलाली करने वाले वह लोग उनका सीधा सामना करने से कतराते है, जो सेवा को सत्ता सुख और जनभावनाओं को राजनीति चमकाने का माध्यम समझते है। देखना होगा कंटकों से जूझती यह आयरन लेडी आने वाले समय में वह कौनसी लकीर अपने सार्वजनिक जीवन में अपनी कर्तव्य निष्ठा और जनसेवा के चलते खींच पाती है जो म.प्र. की राजनीति और सत्ता के गलियारों में जनसेवा के नाम एक नजीर बन सके।   
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