सायलेन्ट किलर, राष्ट्रद्रोहियों पर कब कसेगी लगाम

विलेज टाइम्स। पैसों के लिये पागल मिलावट माफिया जिस तरह से जाने, अनजाने में खादय पदार्थो में मिलावट कर मोटा मुनाफा कमा स्वयं का घर भरने में लगे है उसे देखकर लगता है कि उन्हें न तो स्वयं, परिवार, समाज और राष्ट्र की परवाह है न ही उनका इन्सानियत से कोई वास्ता। पैसों के लिये पागल यह मिलावट माफिया खादय पदार्थो से लेकर जीवन्त रक्षक दवाओं के साथ इतना खतरनाक खेल, खेल रहे उसे देखकर  तो यही लगता है कि उनके अन्दर न तो मानवता न ही इंसानियत के कुछ अंश शेष बची है। 

आज इन मिलावट खोरो की बढ़ती फौज के चलते अब न तो देश की आने वाली नस्ल और न ही आम नागरिकों का जीवन सुरक्षित दिखता है। ऐसे में सरकारों का कत्र्तव्य ही नहीं, उत्तरदायित्व भी बनता है कि खादय पदार्थो की पूरी कीमत बसूलने वाले इन मोटे मुनाफा खोरो के खिलाफ 302 या राष्ट्रद्रोह के समकक्ष कानून बना कड़ी कार्यवाहीं कर ऐसे मिलावट खोरो को दंडित करना चाहिए जिस तरह से किसी भी राष्ट्र की सरकार आतंकवादी या राष्ट्रद्रोहियों के खिलाफ कानून के तहत कार्यवाही करती है। 

उसी प्रकार देश की नस्ल और नागरिकों को मिलावट खोरों के खिलाफ कड़ी कार्यवाहीं करते हुये कोई मुरब्त नहीं रखना चाहिए तभी जाकर विभिन्न खादय पदार्थो के पूरे दाम चुकाने के बाद मिल रहे मंद जहर से होने वाली धीमी मौतों व विभिन्न बीमारियों से लोगों को बचाया जा सकता है।  

आज जिस तरह से फल, सब्जियों को पकाने एवं पैकेट फूड आयटमों में केमिकलों का इस्तेमाल हो रहा है एवं दूध के व्यापार में दूध का उत्पादन बढ़ाने या मोटा मुनाफा कमाने विभिन्न खतरनाक औषधियों एवं केमिकलों का इस्तेमाल हो रहा है उससे आज आम नागरिक पूरे दाम चुकाने के बावजूद दहशत जदा है। वहीं जिस तरह से अनाज, दाल एवं तिलहन का उत्पादन बढ़ानेअज्ञानता बस मनमाने ढंग से रासायनिक खादय एवं कीटनाशक के रुप में पेस्टीसाइज दवाओं का प्रचलन बढ़ चला है उसने समुचे मानव जगत ही नहीं जीवन जन्तु, जानवरों का जीवन भी संकट डाल रखा है। जो किसी भी स य समाज और सेवा भावी सरकारों के लिये शर्मनाक है। 
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