उच्च नैतिक मूल्य, त्याग, तपस्या, बलिदान ही हमारी महान संस्कृति है। क्या खट्टर सरकार का इस्तीफा, राष्ट्र, दल व जनहित में सही रास्ता , देश को प्रधानमंत्री जी से बड़ी उम्मीद

व्ही.एस.भुल्ले, विलेज टाइम्स समाचार सेवा : जिस तरह से हरियाणा में विगत 3 वर्षो में एक के बाद एक 3 बड़े ही अराजक घटनाक्रम घटे जनहानि से लेकर स पत्ति  हानि जिस बड़े पैमाने पर हुई और जिस प्रकार की कड़ी टिप्पणियां माननीय हरियाणा, पंजाब हाईकोर्ट द्वारा खट्टर सरकार को लेकर की गई है। उन्हें देखते हुये लगता है खट्टर सरकार के सामने राष्ट्र, दल, जनहित की खातिर इस्तीफे से बेहतर और कोई विकल्प नहीं हो सकता। क्योंकि उच्च नैतिक मूल्य, त्याग, तपस्या, बलिदान ही हमारी महान संस्कृति रही है जिसके आधार पर हजारों वर्षो से भारतीय समाज स्वाभिमान के साथ रहता आया है। खासकर जिस दल से खट्टर आते है उस दल की नैतिक यात्रा कुछ कम नहीं रही है और उस दल को भी खड़ा करने में न जाने कितनी पीढिय़ां राष्ट्र हित के लिये खप चुकी है। तब जाकर उसे यह ओहदा हासिल हुआ जो केन्द्र सहित कई राज्यों में उसकी सरकारे है।

जिन उच्च नैतिक मूल्य कड़ी मेहनत, त्याग, तपस्या के बल इस दल ने देश ही नहीं, विदेशों तक में विगत 3 वर्षो में भारत का जो सर ऊंचा किया है वह अक्षुण है। मगर र्दुभाग्य ही सही जिस तरह की घटना राम रहिम को लेकर हरियाणा में घटी है और जिस तरह से इस घटनाक्रम को टकटकी लगाकर विगत 24 घन्टों से देश ही नहीं, विदेशों में देखा गया और जो टिप्पणियां जनभावनाओं के बीच से आ रहे है, उसकी कीमत सिर्फ खट्टर सरकार का इस्तीफा ही हो सकता है, जैसी कि चर्चा है। 

एक चर्चा यह भी है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष को या तो पार्टी स्तर पर हस्तक्षेप कर, सीधा संदेश देना चाहिए या फिर देश के प्रधानमंत्री जिन्होंने दिन रात एक कर समुचे विश्च विरादरी और देश में जो विश्वास 125 करोड़ लोगों में जाग्रत किया है। उसे देखते हुये तथा घटनाक्रम कि संवेदनशीलता को देखते हुये सरकार को ही बर्खास्त कर देना चाहिए नही तो कई वर्षो की दल की त्याग, तपस्या जहां दांव पर है तो वहीं प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार की प्रतिष्ठा दांव पर है। जो उसने देश में भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और देश के लोगों के अन्दर विश्वास पैदा कर, प्राप्त की है। देखना होगा कि दल के तेज तर्रार अध्यक्ष पहले अपनी जबावदेही का निर्वहन करते है या फिर देश को आगे ले जाने में जुटे, नव भारत निर्माण में जुटे प्रधानमंत्री अपना राजधर्म निभाते है जैसी कि जनभावना और संभावना। 
जय स्वराज 
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