डेरा वाले तो गये जेल, अब अघोषित सफेदपोश डेरों का क्या होगा

व्ही.एस. भुल्ले : राम रहिम के डेरे से जिस तरह की दुआंये-बदुआयें, रुंद चुकी चीथपुकारों की जो कहानियां आज, न्याय का हथोड़ा पडऩे से देश के सामने है। आखिर वो दिन कब आयेगा जब अघोषित सफेदपोश डेरों में दम तोडऩे वालो और स्वच्छ लोकतंत्र में गुटन पैदा करने वाली कहानियां देश के सामने आयेगीं। बाबाओं के डेरे तो घोषित आस्थाओं के केन्द्रों के रुप में देश के सामने थे और जो सच निकलकर आया वह भी देश के सामने है। 

मगर अघोषित सफेदपोश डेरों का सच अभी भी देश वासियों से कोसो दूर है। क्योंकि जिस महान लोकतांत्रिक व्यवस्था के मुहाने पर आज देश खड़ा है, वहां हमारा महान लोकतंत्र ऐन-केन प्राकरेण दम तोड़ता नजर आता है। मगर र्दुभाग्य कि हमारे देश की मासूम करोड़ों करोड़ जनता आज भी ऐसे घोषित और अघोषित डेरों के प्रति अंधी आस्थावान बन अंधे कुयें में संपन्न खुशहाल जीवन की उम्मीद गढ़ायेें बैठी है। आखिर उसकी आशा आकाक्षांओं का लोकतंत्र उसे कब हासिल होगा फिलहाल भविष्य के गर्भ में है।

मगर एक सच यह भी है कि जिस तरह अंधी आस्थाओं का खुलासा देश में हुआ है एक न एक दिन अवश्य अघोषित सफेदपोश डेरों का खुलासा भी अवश्य होगा। जो जनसेवा, राष्ट्र सेवा के नाम गरीब, मजबूर जनता को अच्छे जीवन का सब्ज बाग दिखा उसकी कड़ी मेहनत की कमाई का एक बड़ा भाग हड़प स्वयं और स्वयं के अघोषित डेरों से जुड़े अपने अंध भक्त, कार्यकर्ता, सेवकों के पोषण में लगे है। निश्चित ही ऐसे लोगों को न तो प्रकृति, न ही ईश्वर और न ही इस महान राष्ट्र का नागरिक क्षमा करने वाला है। 
जय स्वराज

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