सेवा की खातिर, शिव सरकार से दो-दो हाथ के मूड़ में- सिंधिया

व्ही.एस. भुल्ले : आज की राजनीति में जिस तरह लोग पैसा बना अपनी कद काठी बढ़ा जनसेवा के नाम आते हैं शायद सिंधिया के साथ ऐसा न हो। क्योंकि वह शुरू से ही देश ही नहीं विदेशों में जाने-माने या संपन्न सेवा भावी परिवार से आते हैं जिनकी कई पीढिय़ां आजीदी से पूर्व और आजादी के बाद जनसेवा के कार्यों में जुटी रही हैं। मगर राष्ट्र व जनसेवा हो या फिर विकास, जिस तेवर के साथ पूर्व केन्द्रीय मंत्री, लोकसभा के सचेतक सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इन्दौर में अपने जीवन व राजनैतिक मूल्यों को सामने रख, व्यक्ति गत आरोप प्रत्यारोप से इतर, भाजपा व म.प्र. की शिव सरकार पर हमला बोला है उसे देखकर लगता है कि वह अब भाजपा सहित शिव सरकार से दो-दो हाथ करने के मूड़ में आ गये है।

हमेशा व्यक्तिगत आरोप प्रत्यारोपों की राजनीति से दूर रहने वाले सिंधिया पर चुनावी संग्राम के दौरान भाजपा के नेता या म.प्र. प्रदेश सरकार के मुखिया, मंत्री, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सिंधिया परिवार को निशाने पर लेते रहे है। कभी सिंधिया परिवार की प्रष्ठ भूमि तो कभी अन्य आरोपों को लेकर मगर इस मर्तवा प्रदेश सरकार के मुखिया ने सिंधिया परिवार को आजादी के आन्दोलन में उसकी भूमिका को लेकर सवाल खड़े किये है। और प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री ने उस स्थिति में सिंधिया परिवार को लेकर सवाल खड़ें किये है। जबकि देश के प्रधानमंत्री देश के सर्वोच्च सदन में पार्टी के नेता, सरकारों में बैठे लोगों को म.प्र. के अटेर चुनाव के दौरान प्रदेश के मुखिया के इस व्यान की सिंधिया राजवंश ने भिण्ड के लोगों पर बड़े अत्याचार किये है। असहमति व्यक्त कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने पार्टी नेताओं को भी यह स्पष्ट ताकीत की थी कि सभी राजवंशो ने देश व जनता के लिये अच्छे से अच्छा कार्य किया है। मगर अटेर चुनाव पश्वात भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने एक बार फिर से सिंधिया परिवार को निशाने पर ले, सरकार से जांच कराने की बात कही। 

इतना ही नहीं म.प्र. के  मुख्यमंत्री ने जन युवा संवाद कार्यक्रम में आजादी में सिंधिया राजवंश की भूमिका पर सवाल खड़े कर सिंधिया परिवार पर निशाना साधने का कार्य किया जिसका जबाव देर से ही सही मगर उन्होंने जीवन मूल्यों एवं सिद्धांतों की राजनीति का पालन करते हुये व्यक्तिगत सवाल खड़े न करते हुए एक नीतिगत जबाव दिया है।

उन्होंने इन्दौर में कहा कि जब उनकी दादी कै. राजमाता विजयाराजे सिंधिया जनसंघ सहित भाजपा को गढ़ रही थी तब उनसे उनके नेताओं ने मेरे परिवार का इतिहास क्यों नहीं पूछा? उन्होंने मीडिया से प्रतिउत्तर के भाव से कहा कि आज भी उनकी दो बुआ भाजपा में ही नेता है एक राजस्थान में राजस्थान में भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री तो दूसरी शिव सरकार में मंत्री हैं। उनसे ही मेरे परिवार के बारे में जानकारी ले लेते। फिर भी सन्तुष्टि न मिले तो मेरे पास आ जाये मैं उन्हें पूरी जानकारी दे दूंगा।

देखा जाये तो शिव सरकार ही नहीं, म.प्र. की भाजपा के कई नेताओं के निशाने पर सिंधिया विगत एक दशक से इसीलिये भी है क्योंकि सरकार के मुखिया ही नहीं, म.प्र. की भाजपा के मुखिया नेता यह अच्छी तरह भांप चुके है कि अगर कहीं उनकी सरकार का विगत 13 वर्षो से अघोषित सहयोग और सरकार से मिल मलाई छानने वालो की जगह कॉग्रेस ने सिंधिया को बागडोर थमा 2018 में सिंधिया को  मुख्यमंत्री का चेहरा प्रोजेक्ट कर दिया तो शिव सरकार ही नहीं भाजपा सरकार की लुटिया डूबना तय है। 

क्योंकि विगत एक दशक से खाटी नेता की तरह सिंधिया विकास व जनसुविधाओं, अन्याय, अत्याचार को लेकर भाजपा की शिव सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहे है। और आज वह म.प्र. में एक ऐसे नेता के रुप में स्थापित हो चुके है कि समुचे म.प्र. में कॉग्रेस ही नहीं, आम जनता उन्होंने एक कर्तव्य निष्ठ जीवट, ईमानदार एक ऐसे नेता के रुप में देख रही है जो भाजपा के विगत 10 वर्ष के कुशासन, भ्रष्टाचार से मुक्ती दिला सकते हैं, जैसी कि चर्चा है। 

इसीलिये म.प्र. भाजपा सरकार के मुखिया और नेता गाहे-बगाहे सिंधिया की घेरबंदी में जुटे रहते है। मगर जिस तेवर के साथ सिंधिया ने अब म.प्र. भाजपा और सरकार के मुखिया को चुनौती दी है। उसके परिणाम क्या होगें यह तो भविष्य ही तय करेगा। मगर इतना अवश्य तय है कि अगर आलाकमान ने सिंधिया को म.प्र. का  मुख्यमंत्री चेहरा तय करने में 2014 जैसी देरी की तो यह म.प्र. में कॉग्रेस के लिये आत्मघाती कदम होगा। बेहतर हो कॉग्रेस आलाकमान समय रहते शीघ्र निर्णय ले और सिंधिया कॉग्रेस के सिपाही के रुप में मैदान डटे रहे। तभी कोई सार्थक परिणामों के बारे में भविष्यवाणी राजनैतिज्ञों द्वारा की जा सकती है।
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