आजादी को अक्षुण व देश को संवेदनशीलता के साथ संभालकर चलने का वक्त

व्ही.एस. भुल्ले :  जिस तरह की हाय-तौबा देश की व्यवस्था को लेकर मची है वह स्वभाविक रुप से कई वर्षो से प्रत्यासित थी और प्रमाण की समुचे देश ...

व्ही.एस. भुल्ले : जिस तरह की हाय-तौबा देश की व्यवस्था को लेकर मची है वह स्वभाविक रुप से कई वर्षो से प्रत्यासित थी और प्रमाण की समुचे देश में शासन करने वाली पार्टी दो अंको में सिमट गई, तो 30 वर्ष से दो सदस्य वाली पार्टी 3 अंकों में पहुंच सत्ता पर आरुढ़ हो गई। यह परिणाम देश के अन्दर आज से 30 वर्ष पूर्व शुरु हुई उथल-पुथल और सत्ता में बैठे रहे उन लोगों की कर्तव्य निष्ठा और जबावदेही सहित निहित स्वार्थो का परिणाम है जिससे देश की जनता को व्यतीत रही ही। साथ ही स्वार्थ, भ्रष्टाचार, अहम अहंकार सहित नैतिक पतन का एक ऐसा लंबा कारवां चला कि देश कलफ उठा और उसने 77 के बाद एक बार फिर से ऐसा जनादेश देश को दिया जिसकी कार्यशैली को लेकर कुछ दल व समाज विशेष द्वारा बात-बात पर सवाल खड़े किये जा रहे है। तो दूसरी ओर अराजकता पूर्ण माहौल के जब तब दृश्य सडक़ों पर नजर आ रहे है जो देश के हर नागरिक ही नहीं हर उस राष्ट्रभक्त के लिये चिन्ता का विषय है। जो अपने राष्ट्र में और अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था में गहरी आस्था रखते है।

आज जिस तरह का माहौल अन्तराष्ट्रीय स्तर पर महान भारत को लेकर बन रहा है और जिस तरह की स्थिति देश और देश में मौजूद कुव्यवस्था को लेकर पनपी है निश्चित ही उन आशंकाओं का समाधान आवश्यक है। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि मौजूदा सरकार जितनी जबावदेही और राष्ट्र समर्पण के साथ अपने कर्तव्य निर्वहन में जुटी है उतनी ही निष्ठा के साथ विपक्ष भी सरकार पर सवाल खड़े करने से नहीं चूक रहा। 

मगर मौजूदा हालात में सभी के लिये राष्ट्र सर्वोपरि होना चाहिए और देश के हर नागरिक को यह ज्ञात भी होना  चाहिए कि राष्ट्र से बढक़र और कोई दूसरा विषय नहीं हो सकता। क्योंकि राष्ट्र कोई अकेला भूभाग नहीं इसमें 130 करोड़ लोगों की आशा आकांक्षाओं का वह प्रतिबिंब है। जिसे हर नागरिक अपने संपन्न, खुशहाल एवं स्वाभिमान जीवन के रुप में देखना चाहते है। 

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अगर हमारी आस्थायें राष्ट्र के प्रति अगर अक्षुण नहीं रही, तो न तो यह राष्ट्र और न ही इस राष्ट्र में रहने वाले व्यक्ति, परिवार, समाज भी सुरक्षित रह पायेगें। इतिहास गवाह है विभिन्न भाषा, बोली, क्षेत्र एचं संस्कृतियों से सुजिज्जत हमारा महान राष्ट्र उस प्रतिविंब के समान है जिसकी छत्र-छाया में भारत केवल भारत नहीं एक महान भारत के रुप में जाना जाता है।  

जरुरत आज इस बात की है कि जब तक हम व्यक्ति से व्यक्ति और परिवार से समाज तथा समाज से राष्ट्र तक सभी को एक सूत्र में नहीं पिरो लेते तब तक हमारी आजादी अक्षुण रख पाना असंभव है। जिसके लिये पूरी संवेदनशीलता के साथ अपने-अपने कत्र्तव्य एवं उत्तरदायित्वों का निर्वहन आवश्यक है। और यह तभी संभव है जब सभी मिलकर हमारे महान आध्यात्म से प्राप्त शिक्षा, तकनीक के साथ हमारी सांस्कृतिक विरासत, संस्कारों को अपने जीवन में ढाल पाये। 

हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि हम उस महान भूभाग एवं उस महान सांस्कृतिक विरासत के उत्तराधिकारी है। जिसने भारत को समुचे विश्व में सबसे खुशहाल, संपन्न राष्ट्र होने का दर्जा दिया। अगर हम हमारी विरासत हमारे राष्ट्र और हमारे महान नागरिकों को अक्षुण रख उन्हें सदमार्ग के साथ उचित और उत्तम संसाधन मुहैया करा पाये, तो यह हमारे लिये सबसे बड़ी राष्ट्र भक्ति और मानवता सहित जीव-जगत और प्रकृति की सेवा होगी। 

आज पक्ष-विपक्ष को हमारे महान राष्ट्र को सामने रख अपनी रणनीतियां बना ऐसे व्यवहार को उपयोग लाना होगा जिसे लोग देख, सुन ही नहीं, मेहसूस भी कर सके। प्रतिशोध की राजनीति तो फिर भी होती रहेगी मगर आज जब हमें हमारे राष्ट्र को महान बनाने का मौका मिला है तो इसके लिये पूर्ण निष्ठा ईमानदार के साथ हमारा समर्पण ही सबसे बड़ा धर्म और कर्म है। 
जय स्वराज 

COMMENTS

Name

तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
ltr
item
Village Times: आजादी को अक्षुण व देश को संवेदनशीलता के साथ संभालकर चलने का वक्त
आजादी को अक्षुण व देश को संवेदनशीलता के साथ संभालकर चलने का वक्त
https://3.bp.blogspot.com/-tgCScZPJOgM/WZGz4L6iq6I/AAAAAAAAHq4/QgLLd4kJO7Yr8bnBpumCXSKZldxeXNpIgCLcBGAs/s1600/tiranga.jpg
https://3.bp.blogspot.com/-tgCScZPJOgM/WZGz4L6iq6I/AAAAAAAAHq4/QgLLd4kJO7Yr8bnBpumCXSKZldxeXNpIgCLcBGAs/s72-c/tiranga.jpg
Village Times
http://www.villagetimes.co.in/2017/08/blog-post_14.html
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/2017/08/blog-post_14.html
true
5684182741282473279
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy